WEBVTT

00:09.163 --> 00:11.283
[अब्बास]: हूँ! एकदम श्रीदेवी जैसे लग रही है।
(गाड़ी के चलने की आवाज़)

00:11.403 --> 00:13.803
[सोनम]: रह-रह के पागल हो जाते हो क्या तुम?
(गाड़ी के रुकने और दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

00:15.043 --> 00:16.083
[अब्बास]: आओ।

00:19.483 --> 00:20.523
अच्छा, सोनम।

00:20.803 --> 00:22.243
[अब्बास]: तुमको लिपस्टिक लेना था ना?
[सोनम]: हाँ।

00:22.403 --> 00:24.083
[अब्बास]: तुम ले लो। हम ज़रा मारवाड़ी से
मिल के आते हैं। [सोनम]: चूड़ियाँ भी।

00:24.203 --> 00:25.563
[अब्बास]: ठीक है?
[सोनम]: हाँ। ठीक है।

00:30.323 --> 00:31.163
[दुकानदार]: आइए, बहन जी।

00:31.283 --> 00:33.273
[सोनम]: भैया, चूड़ियाँ दिखाइएगा।
[दुकानदार]: जी।

00:33.283 --> 00:34.763
[बदमाश]: खट्टा कम डाले हो क्या,
भैया?

00:34.883 --> 00:36.723
[सोनम]: नीले रंग की नहीं,
लाल रंग की चाहिए।

00:36.843 --> 00:38.603
[बदमाश 2]: खट्टा तो, भैया, यहाँ है।

00:39.363 --> 00:41.123
[बदमाश]: वहीं से ले लेते हैं खट्टा अपना।

00:41.283 --> 00:42.523
[सोनम]: अरे, ये नहीं, भैया।
[दुकानदार]: ये देखिए।

00:42.643 --> 00:44.363
[सोनम]: चमकीली नहीं है?
[बदमाश]: बैठ जाएँ, मैडम?

00:44.483 --> 00:46.163
[दुकानदार]: अ...
चमकीले वाला भी दिखाते हैं।

00:46.883 --> 00:48.643
[बदमाश]: इसमें खट्टा कम है।
दोस्त कह रहा है। [दुकानदार]: ये देखिए।

00:48.763 --> 00:50.483
[बदमाश]: तो एक बार चख लीजिए,
तो खट्टा बढ़ जाएगा।

00:50.763 --> 00:53.323
[सोनम]: निकलो यहाँ से।
[बदमाश]: अरे, चख के देखिए तो, करारा है।

00:53.443 --> 00:54.883
[सोनम]: निकलते हो या निकालूँ चप्पल?

00:55.003 --> 00:56.683
[बदमाश]: लीजिए ना।
[सोनम]: निकलो!

00:58.323 --> 01:00.003
[बदमाश]: ए, मैडम ने गिरा दिया रे।
एक और ला।

01:00.523 --> 01:02.643
[बदमाश 2]: बनाओ, बनाओ। और खट्टा बनाओ।
[सोनम]: भैया, एक साइज़ छोटी देना।

01:02.763 --> 01:04.563
[बदमाश 2]: अरे, खा लीजिए, मैडम जी।

01:05.243 --> 01:07.523
[बदमाश]: दूसरा बनवाए हैं।
[सोनम]: समझ में नहीं आ रहा तुम्हें?

01:07.723 --> 01:10.003
[बदमाश]: अरे, हमारा भाग्य खुल जाएगा।
चख लीजिए ना।

01:10.403 --> 01:11.963
[बदमाश]: मैडम। मैडम।
[सोनम]: भैया, वो लिपस्टिक...

01:12.083 --> 01:14.483
[सोनम]: दिखाओ ना।
[अब्बास]: भो** के! खाइए!

01:14.603 --> 01:16.883
[अब्बास]: तुमको बेटा, हम खिलाते हैं। [सोनम]:
अब्बास! अब्बास! अब्बास! नहीं, नहीं, अब्बास!

01:17.003 --> 01:18.843
[सोनम]: अब्बास, नहीं! अब्बास! [अब्बास]:
भाग, भो** के! भाग, भो** के! भाग, भो** के!

01:18.963 --> 01:19.883
[बदमाश 3]: कर क्या रहा है? ए!
[सोनम]: अब्बास, मर जाएगा वो!

01:20.003 --> 01:20.803
[अब्बास]: भो** के!
[सोनम]: अब्बास, नहीं!

01:20.923 --> 01:23.563
[अब्बास]: चल निकल! भाग! चल, भाग, ब***द!
[सोनम]: अब्बास! अब्बास, शांत हो जाओ।

01:23.683 --> 01:25.403
[अब्बास]: भाग यहाँ से!
[सोनम]: अब्बास, नहीं! शांत, शांत, शांत!

01:25.523 --> 01:26.763
[सोनम]: अब्बास। अब्बास, नहीं।
[अब्बास]: क्या पढ़ते हो बे?

01:26.883 --> 01:28.083
[सोनम]: अब्बास, छोड़ दो उस को।
[बदमाश]: सोशियोलॉजी, भैया।

01:28.203 --> 01:30.403
[अब्बास]: तो सा**! यहाँ ब***द लवलॉजी कर रहे
हो यहाँ पे? [सोनम]: अब्बास! अब्बास, प्लीज़।

01:30.523 --> 01:32.323
[सोनम]: निकलो तुम यहाँ से! अब्बास।
[अब्बास]: भाग! भाग!

01:32.443 --> 01:33.403
[सोनम]: अब्बास, नहीं!
[अब्बास]: भाग!

01:33.523 --> 01:35.003
[अब्बास]: भाग यहाँ से!
[सोनम]: मार ही दोगे क्या?

01:35.363 --> 01:36.643
[अब्बास]: और क्या? मार ही देंगे?

01:36.963 --> 01:38.803
[सोनम]: तुम बात-बात पे कट्टा उठा लेते हो।

01:39.163 --> 01:41.403
[सोनम]: अगर लग जाती तो तुम्हें?
[अब्बास]: अरे, हमें नहीं लगा।

01:41.563 --> 01:44.003
[अब्बास]: तुम्हें कोई छेड़ता है ना,
तो सा** मेरा ख़ून खौल जाता है।

01:49.803 --> 01:51.323
(रोली के रोने की आवाज़)

01:53.003 --> 01:53.883
[विजय]: बस।

01:55.803 --> 01:57.123
ये पिता भी ना,

01:57.803 --> 01:59.003
बड़े अजीब होते हैं।

02:01.483 --> 02:04.843
जब तक होते हैं,
तब तक लगता है जैसे जेलर हो,

02:06.763 --> 02:07.963
और जब नहीं होते हैं,

02:09.003 --> 02:10.683
एक ख़ालीपन छोड़ जाते हैं।

02:11.643 --> 02:14.483
फिर ऐसा लगता है जैसे कोई होता,

02:16.523 --> 02:19.563
जो रोकता, टोकता, मना करता।

02:22.283 --> 02:23.243
पिता...

02:24.163 --> 02:26.083
अंधेरे में एक दीये की तरह होते हैं।

02:28.883 --> 02:30.363
और इस अंधेरे में जिसे...

02:31.723 --> 02:33.203
दीया समझते रहे,

02:36.243 --> 02:37.923
वो बिल्ली की आँख निकली।

02:38.723 --> 02:40.283
[रोली]: दुख तो इस बात का है, विजय
(रोते हुए)

02:40.603 --> 02:43.283
कि हमारे माता-पिता
एक स्वाभाविक मौत नहीं मरे। (रोते हुए)

02:43.563 --> 02:45.163
इन दरिंदों ने मारा है उन्हें।
(रोते हुए)

02:45.963 --> 02:48.163
और इस बात का बदला तो
हम लेकर रहेंगे। (रोते हुए)

02:51.523 --> 02:54.483
(रोली के रोने की आवाज़)

03:00.283 --> 03:02.443
[विजय]: आप सरस्वती देवी को
हाँ बोल दीजिए।

03:05.603 --> 03:10.123
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

03:35.963 --> 03:38.723
[सोनम]: अब क्या देखने आए हैं?
कि हम लोग ज़िंदा हैं या मर गए?

03:40.203 --> 03:42.483
जाइए। हमें भैया के हत्यारे से
कोई बात नहीं करनी है।

03:42.603 --> 03:45.363
[सोनम की माँ]: बेटी, घर पे आए मेहमान से
इस तरीक़े से बात नहीं किया जाता।

03:45.483 --> 03:47.883
[सोनम]: तो किस तरीक़े से बात
करते हैं, अम्मा? [सोनम की माँ]: बेटा, समझो।

03:48.003 --> 03:49.963
[रामानंद]: अम्मा...
[सोनम]: सब बात हम ही समझें।

03:54.043 --> 03:57.643
[रामानंद]: बिटिया,
हम आप सब के दुख को समझते हैं।

04:00.203 --> 04:01.443
पर यक़ीन मानिए।

04:02.363 --> 04:05.123
हमारे ऊपर ग़लत इलज़ाम लगाया गया है।

04:06.643 --> 04:08.443
राजनीति की गई है हमारे साथ।

04:09.243 --> 04:11.883
[सोनम]: तो उस दिन क्यों नहीं कहे?
आज क्यों कहने आए हो आप?

04:12.163 --> 04:13.923
[रामानंद]: क्योंकि हम जानते थे कि उस दिन

04:14.283 --> 04:16.963
आप का दर्द, आप का ग़ुस्सा,

04:18.043 --> 04:19.203
गहरा था।

04:19.643 --> 04:21.923
हम कुछ भी कहते,
आप नहीं मानते।

04:22.403 --> 04:25.163
और हमें डर था
कि हम जो कुछ भी कहें, उस को

04:25.283 --> 04:26.723
मज़ाक समझा जाएगा।

04:27.963 --> 04:30.603
पर हम आज आए हैं,
क्योंकि हमें लगने लगा है कि

04:31.963 --> 04:34.123
आपके साथ कुछ मज़ाक होने जा रहा है।

04:35.843 --> 04:37.243
[सोनम]: मतलब, हम समझे नहीं।

04:39.363 --> 04:42.723
[रामानंद]: आजकल आप जिनके साथ
समय व्यतीत कर रही हैं,

04:45.163 --> 04:46.603
जानती हैं कौन है वो?

04:49.163 --> 04:50.803
वो वसीम का भाई है।

04:51.803 --> 04:54.763
वही वसीम
जिसने महावीर की जान ली,

04:58.803 --> 05:00.083
और हमारी कुर्सी।

05:01.963 --> 05:03.643
वैसे, आप समझदार हैं।

05:05.843 --> 05:07.123
महावीर की बहन हैं।

05:11.203 --> 05:12.963
बहुत पढ़ना चाहता था वो।

05:15.883 --> 05:16.923
माने,

05:17.923 --> 05:19.163
आप भी पढ़ सकती हैं।

05:20.163 --> 05:23.083
और अगर आप को
महावीर का बदला लेना है,

05:23.323 --> 05:24.763
तो हम आप के साथ हैं।

05:24.883 --> 05:26.843
बस हम जैसा बोलें,
वैसा करो।

05:26.963 --> 05:29.003
बाक़ी सब हम संभाल लेंगे।

05:31.123 --> 05:32.243
और ये सब...

05:33.323 --> 05:34.563
सब संभाल लेंगे हम।

05:36.643 --> 05:38.243
माने, आप सोच के बताइएगा।

05:51.523 --> 05:54.363
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

05:54.483 --> 05:57.483
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

05:57.763 --> 06:00.683
[कॉन्स्टेबल 1]: देखिए, बहन जी।
आप को कोई ग़लतफ़हमी हुई है।

06:01.203 --> 06:03.403
[कॉन्स्टेबल 1]: आप को पता है आप किस के
बारे में बात कर रही हैं? [सोनम]: हाँ, पता है।

06:03.523 --> 06:05.643
[सोनम]: वही वसीम ख़ान ना,
जिस ने हमारे भाई को मरवाया

06:05.763 --> 06:08.323
और उस के छोटे भाई अब्बास ने
हमारे साथ बलात्कार किया है।

06:08.683 --> 06:10.123
हम ग़रीब हैं और वो गृह मंत्री,

06:10.243 --> 06:12.203
तो क्या आप उन के ख़िलाफ़
शिकायत नहीं लिखेंगे?

06:12.323 --> 06:13.443
हमें न्याय नहीं मिलेगा?

06:13.563 --> 06:15.203
[कॉन्स्टेबल 1]: आप बहुत बड़ी बात कह रही हैं।

06:15.363 --> 06:17.683
ऐसे बेबुनियाद किसी पे
इलज़ाम नहीं लगाना चाहिए।

06:18.403 --> 06:19.523
आप एक बार फिर से
सोच लीजिए, मैडम।

06:19.643 --> 06:21.283
[सोनम]: सोच लिया है।
अगर हमें न्याय नहीं मिला ना,

06:21.403 --> 06:24.203
तो हम इसी थाने के बाहर
अपना आत्मदहन कर लेंगे। समझे आप?

06:24.683 --> 06:26.523
[कॉन्स्टेबल 1]: अरे, मैडम। मेरी बात तो सुनिए।
[सोनम]: चल, माँ।

06:27.483 --> 06:29.203
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! (चिल्लाते हुए)

06:30.923 --> 06:33.403
[वसीम]: अब्बास कहाँ है?
[गुंडा 1]: भैया, वो अपने कमरे में सो रहे हैं।

06:33.523 --> 06:35.363
[वसीम]: अरे, गाँ** पे लात मार कर
उठाओ चू** को!

06:35.483 --> 06:36.283
[गुंडा 1]: जी, भैया।

06:36.403 --> 06:38.443
[वसीम]: हमारी नींद उड़ाकर
सो रहे हैं, भो** के!

06:39.363 --> 06:42.043
हमारा परिवार जो है ना,
चू** से भरा हुआ है।

06:42.523 --> 06:45.323
और इन के चू*** का
बोझ कौन उठा रहा है? हम!

06:47.523 --> 06:49.283
[वसीम]: यहाँ आओ।
[अब्बास]: जी, भाई जान?

06:50.283 --> 06:52.363
[वसीम]: तुम्हारा क्या कोई
चक्कर चल रहा है? हाँ?

06:52.483 --> 06:55.443
[अब्बास]: हाँ... भाई जान! भाई जान!
[वसीम]: भो** के! क्या पूछे तुम से? क्या पूछे?

06:55.603 --> 06:57.523
[वसीम]: मा***द! लौंडियाबाज़ हाँ!
[अब्बास]: भाभी! भाभी जान!

06:57.643 --> 06:58.923
[अब्बास]: भाभी!
[वसीम]: करियर की माँ चो* दी!

06:59.043 --> 07:00.603
[वसीम]: भो** के!
[वसीम की बेग़म]: क्या? क्या कर रहे हैं उस को?

07:00.723 --> 07:01.683
[वसीम की बेग़म]: क्या कर रहे हैं आप?

07:01.803 --> 07:03.003
[वसीम]: भाभी जान को पता है, भाई जान।

07:07.043 --> 07:08.123
[वसीम]: आप को पता था?

07:14.043 --> 07:16.363
[दरोगा 1]: सर,
अब हमें करना क्या है?

07:23.243 --> 07:26.003
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:26.123 --> 07:29.083
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:29.203 --> 07:32.043
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:32.163 --> 07:34.923
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:35.043 --> 07:37.923
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:38.043 --> 07:40.883
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:41.003 --> 07:43.923
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:44.043 --> 07:46.923
[उद्घोषक]: वसीम ख़ान...
[सभी लोग]: मुर्दाबाद! मुर्दाबाद!

07:48.843 --> 07:51.163
[रामानंद]: कोई इंसान बड़ा हो,

07:52.043 --> 07:53.243
अच्छी बात है।

07:54.403 --> 07:58.003
उस को बड़ा ओहदा मिले,
अच्छी बात है।

07:58.563 --> 08:02.883
लेकिन ओहदा मिलने के बाद
इंसानियत भूल जाए,

08:03.843 --> 08:05.323
बुरी बात है!

08:05.443 --> 08:08.243
(सभी के तालियाँ बजाने की आवाज़)

08:09.683 --> 08:12.123
[रामानंद]: हमारी देश की नारी

08:13.843 --> 08:16.003
बरसों से शोषित है।

08:17.203 --> 08:18.963
उस के साथ बुरा हुआ है!

08:20.243 --> 08:22.763
लेकिन आज वो जाग रही है!

08:24.803 --> 08:28.723
और जागने के बाद
ये जो सैलाब आया है,

08:28.843 --> 08:33.603
इसको वसीम ख़ान जैसे
तिनके रोक नहीं पाएंगे!

08:33.723 --> 08:36.403
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:36.523 --> 08:38.923
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:39.043 --> 08:41.723
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:41.843 --> 08:44.443
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:44.563 --> 08:47.243
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:47.363 --> 08:49.883
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:50.003 --> 08:52.603
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:52.723 --> 08:55.323
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:55.483 --> 08:58.083
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

08:58.283 --> 09:00.763
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

09:00.923 --> 09:03.483
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

09:03.603 --> 09:04.563
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदा...

09:04.683 --> 09:07.123
[सरस्वती]: आप ने तो
घोड़े की आधी घर वाली चाल चल दी,

09:07.243 --> 09:09.003
वसीम को रास्ते से हटाने के लिए।

09:09.123 --> 09:10.403
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद!

09:10.523 --> 09:13.803
[रामानंद]: मुख्यमंत्री जी को भी
घोड़े की चाल बहुत पसंद थी।

09:14.643 --> 09:16.523
और हम ठहरे उनके शिष्य।

09:16.683 --> 09:18.003
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद...
[उद्घोषक]: रामानंद राय...

09:18.123 --> 09:21.483
[रामानंद]: देखिए, क्या चाल चली है
कि लोग भी हमारे साथ हैं

09:22.523 --> 09:26.363
और जो हमारे विरोधी हैं,
वो भी हमारे साथ आकर खड़े हो गए हैं,

09:26.803 --> 09:28.843
जैसे कि आप हमारे साथ खड़ी हैं।

09:28.963 --> 09:31.243
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

09:31.363 --> 09:33.283
[रामानंद]: शांत हो जाइए। शांत हो जाइए।
[उद्घोषक]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!

09:35.163 --> 09:37.083
[रामानंद]: जैसे कि आप लोग देख रहे हैं,

09:37.363 --> 09:41.483
हमारी पार्टी एचएसबी की दिग्गज नेत्री

09:41.883 --> 09:44.723
स्वर्गीय श्री बंसीराम जी की बहुत ही क़रीबी,

09:45.203 --> 09:48.123
सरस्वती जी आज हमारे साथ हैं।

09:48.923 --> 09:54.563
उनके यहाँ होने से
हमारी आवाज़ और बुलंद हो गई है!

09:54.843 --> 09:56.513
तालियों से स्वागत करें आप!

09:56.523 --> 09:59.763
(सभी के तालियाँ बजाने की आवाज़)

10:00.283 --> 10:03.803
[सरस्वती]: हम आप सब महिला साथियों के
हौसले को सलाम करते हैं

10:04.363 --> 10:07.283
और इस आंदोलन का समर्थन करते हैं।

10:07.443 --> 10:10.883
[नागरिक 1]: सरस्वती मैम, बलात्कारी तो
आदरणीय गृह मंत्री के भाई हैं।

10:11.003 --> 10:13.043
तो ऐसे में पुलिस
कैसे न्याय कर पाएगी?

10:14.243 --> 10:15.723
[रामानंद]: देख...
[सरस्वती]: आप लोग निश्चिंत रहिए।

10:16.403 --> 10:17.523
[सरस्वती]: न्याय मिलेगा।

10:17.843 --> 10:19.043
[सरस्वती]: हम...
[रामानंद]: ज़रूर मिलेगा!

10:19.363 --> 10:21.563
[रामानंद]: क्यों नहीं मिलेगा न्याय?
हम हैं ना!

10:21.963 --> 10:23.483
हमारे होते हुए कौन रोकता है?

10:23.883 --> 10:26.363
वो चाहे उनका बेटा हो,
भाई हो, बाप हो!

10:27.043 --> 10:30.043
क्योंकि हम अपराधी के
अपराध को देखते हैं

10:30.323 --> 10:33.363
उस की हैसियत
और उस की औक़ात को नहीं देखते!

10:33.483 --> 10:36.043
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

10:36.483 --> 10:38.683
[रामानंद]: अब चलो!
[उद्घोषक]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!

10:38.803 --> 10:41.363
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

10:41.483 --> 10:44.083
[उद्घोषक]: रामानंद राय...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

10:45.163 --> 10:46.843
[दरोगा 1]: सर,
मामला हाथ से बाहर निकल गया है।

10:48.123 --> 10:50.003
अब्बास को बचाना
अब मुश्किल होगा।

10:51.163 --> 10:53.123
और सर,
जिस पार्टी का आप साथ दे रहे हैं,

10:53.963 --> 10:55.563
वही लोग दबाव बना रहे हैं।

10:58.683 --> 10:59.883
[वसीम]: कौन बना रहा है दबाव?

11:00.283 --> 11:01.563
[दरोगा 1]: सर, सरस्वती देवी।

11:07.923 --> 11:10.443
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

11:11.683 --> 11:13.603
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

11:14.563 --> 11:16.083
[वसीम]: हेलो।
[बाबर]: वसीम।

11:16.683 --> 11:17.923
[बाबर]: ये हम क्या सुन रहे हैं?

11:18.363 --> 11:19.723
आख़िर चल क्या रहा है वहाँ?

11:20.443 --> 11:21.563
[वसीम]: हम देख रहे हैं।

11:21.723 --> 11:23.443
[बाबर]: सिर्फ़ देख ही तो रहे हो तुम।

11:24.043 --> 11:26.403
हमारे बेटे को
बलात्कारी कहा जा रहा है,

11:26.923 --> 11:29.763
और तुम गृह मंत्री होते हुए भी
तमाशबीन बने हुए बैठे हो।

11:30.283 --> 11:31.483
[वसीम]: हम ने आप से कहा ना,

11:32.883 --> 11:34.483
हम ठीक कर देंगे सब।
हम देख रहे हैं।

11:34.763 --> 11:36.643
[बाबर]: नहीं, ग़लती तो मेरी थी,

11:36.843 --> 11:38.443
जो हम ने तुम पर भरोसा किया।

11:39.003 --> 11:40.843
अरे, सूबे के गृह मंत्री हो

11:40.963 --> 11:43.203
और एक मामूली सा
केस नहीं संभाल सकते हो?

11:43.723 --> 11:46.283
लगता है हमें ही वहाँ आ करके
सब कुछ देखना पड़ेगा?

11:46.803 --> 11:50.163
ये तुम्हारे तरीक़े से तो
पूरे ख़ानदान के मुँह पर कालिख ही पुत जाएगी।

11:50.363 --> 11:51.483
[वसीम]: सही कह रहे हैं आप!

11:51.843 --> 11:54.283
ख़ानदान के मुँह पर कालिख
हमारी वजह से पुत रही है।

11:54.803 --> 11:57.003
आप का लाडला तो
ख़ानदान का नाम रोशन कर रहा है।

11:58.563 --> 12:00.883
वहाँ बैठे-बैठे नसीहत देना
बहुत आसान है।

12:01.123 --> 12:02.763
जब आप यहाँ थे,
आप ने क्या उखाड़ लिया?

12:04.563 --> 12:06.883
ग़लती करे आप का लौंडा,
गाँ** मराए वसीम ख़ान।

12:07.003 --> 12:09.683
[बाबर]: बस! यही तो मुश्किल है तुम्हारी।

12:10.763 --> 12:12.483
तुम्हारे भीतर का
गुंडा तो निकलेगा नहीं।

12:12.603 --> 12:14.643
[वसीम]: क्योंकि बचपन से देखते आए हैं ना
आप जैसे लोगों को।

12:15.003 --> 12:18.683
हर क़दम, हर मोड़ पर ज़रूरत है
आप को वसीम ख़ान जैसे गुंडे की।

12:18.883 --> 12:19.963
[बाबर]: ठीक है।

12:20.523 --> 12:22.563
तुम्हें कुछ करने की ज़रूरत नहीं है।

12:23.043 --> 12:25.603
अब जो कुछ भी है,
वो अब हम यहीं दिल्ली से करेंगे।

12:26.603 --> 12:27.683
[वसीम]: हूँ!

12:30.563 --> 12:31.963
मारें तुम्हारे एक!

12:40.283 --> 12:41.403
चू**!

12:44.043 --> 12:45.083
[वसीम की बेग़म]: देखिए,

12:45.763 --> 12:47.803
शायद हम नहीं समझते हैं
यहाँ क्या चल रहा है,

12:48.443 --> 12:50.363
पर अब्बास को समझते हैं और...

12:50.883 --> 12:53.683
वो सौ ग़लतियाँ कर ले,
पर बलात्कार...

12:56.523 --> 12:58.363
हमें इतना विश्वास है उस पर।

13:06.643 --> 13:07.563
[रोली]: विजय।

13:10.203 --> 13:11.643
हम से नहीं हो पाएगा।

13:14.003 --> 13:16.443
हम...
हम राजनीति में नहीं आ पाएंगे।

13:17.843 --> 13:19.083
[विजय]: हम जानते हैं, रोली जी,

13:19.723 --> 13:21.403
आप के दिमाग़ में
क्या चल रहा है।

13:22.763 --> 13:26.763
रामानंद राय हम लोगों से
कहीं ज़्यादा ताक़तवर है राजनीतिक रूप से।

13:28.283 --> 13:30.483
तो हमें भी अपनी ताक़त
इकट्ठा करनी पड़ेगी।

13:31.883 --> 13:33.723
और वो सिर्फ़
राजनीति से आ सकती है।

13:34.323 --> 13:36.563
[रोली]: क्या राजनीति इतनी गंदी चीज़ होती है,

13:37.323 --> 13:39.163
जो अपनों को भी नहीं छोड़ती?

13:40.923 --> 13:42.923
और बस एक ही
सवाल मन में आता है।

13:44.883 --> 13:47.243
इस गंदगी में पैर क्यों रखें?

13:48.043 --> 13:52.163
[विजय]: कई बार गंदगी साफ़ करने के लिए
गंदगी में उतरना पड़ता है।

13:54.043 --> 13:57.483
और यही एक मौक़ा है,
एक तीर से दो शिकार करने का।

13:59.243 --> 14:01.363
रामानंद राय को तो जवाब देंगे ही देंगे,

14:01.483 --> 14:04.363
मगर साथ ही साथ
अपना खोया हुआ मान,

14:05.443 --> 14:06.563
सम्मान,

14:08.043 --> 14:09.803
हर चीज़ उस से वापस लेंगे।

14:13.043 --> 14:14.323
और आप भी जानती हैं

14:17.643 --> 14:19.843
कि विजय सिंह हमेशा आप के साथ है।

14:25.243 --> 14:26.883
[बाबर]: आज तो बिलकुल हद ही हो गई!

14:27.643 --> 14:29.763
इतने दिनों से सियासत कर रहा हूँ,

14:30.123 --> 14:33.003
लेकिन आज तक किसी को
आँख उठा करके देखने की हिम्मत नहीं हुई!

14:33.763 --> 14:35.643
इस सब की वजह
तुम हो, वसीम, तुम!

14:35.763 --> 14:36.803
[वसीम]: अच्छा?

14:37.043 --> 14:38.643
हम से तो कोई
बदतमीज़ी नहीं करता।

14:40.683 --> 14:42.163
[बाबर]: किस ग़लतफ़हमी में रह रहे हो?

14:43.003 --> 14:45.483
सुनो। हमारी बात सुनो।

14:46.203 --> 14:48.643
और ये बात हम एक
सियासतदान की तरह नहीं,

14:49.523 --> 14:51.483
हमारे चचा की
हैसियत से कह रहे हैं।

14:53.123 --> 14:54.363
छोड़ो विजय सिंह को,

14:55.123 --> 14:57.443
अपने विधायकों की फ़िक्र भी छोड़ो।

14:58.483 --> 15:00.883
सरस्वती देवी के पाले में चले जाओ।

15:01.163 --> 15:02.363
[वसीम]: क्या कहना चाह रहे हैं आप?

15:03.003 --> 15:05.283
उस बंसीराम की चेली के पाले में

15:05.403 --> 15:08.363
पूर्वांचल का सब से बड़ा
बाहुबली वसीम ख़ान चला जाए? हाँ?

15:09.043 --> 15:10.043
[बाबर]: देखो, वसीम।

15:10.723 --> 15:13.203
तुम सरस्वती देवी के बारे में
कुछ भी समझो,

15:14.003 --> 15:17.963
लेकिन आवाम उसे
बंसीराम का वारिस समझती है।

15:18.603 --> 15:20.163
इसीलिए उस से हमदर्दी करती है।

15:20.483 --> 15:22.483
और जहाँ तक मैं समझता हूँ,

15:23.323 --> 15:26.363
वो सीएम की कुर्सी से
बहुत ज़्यादा दूर नहीं है।

15:26.843 --> 15:29.443
[बाबर]: सरस्वती उस कुर्सी के
चाहे जितना नज़दीक चले जाए,

15:30.443 --> 15:32.083
जब तक हमारे विधायक हैं,

15:32.283 --> 15:33.803
थोड़ी दूरी ज़रूर बनी रहेगी।

15:33.963 --> 15:35.043
(बाबर के हँसने की आवाज़)

15:35.763 --> 15:40.483
[बाबर]: और अगर तुम्हारे वो सारे
विधायक उसने ख़रीद लिए तो?

15:41.883 --> 15:45.163
देखो, मेरी बात
समझने की कोशिश करो।

15:46.363 --> 15:48.963
इस से पहले की
सर झुकाने की नौबत आए,

15:50.243 --> 15:52.043
सरस्वती देवी से हाथ मिला लो।

15:53.003 --> 15:55.363
[वसीम]: और उस से क्या होगा?
[बाबर]: उस के साथ सौदा करो।

15:56.803 --> 15:59.523
[बाबर]: सीएम की कुर्सी के बदले
उस से विजय सिंह माँग लो।

16:00.443 --> 16:02.923
और एक बार
विजय सिंह तुम्हारे रास्ते से हट गया,

16:03.043 --> 16:04.963
तुम्हारी सारी मुश्किलें आसान हो जाएंगी।

16:05.523 --> 16:07.043
और रही उस औरत की बात,

16:07.603 --> 16:10.083
उसको तो फिर देख लेंगे।
पाँच साल बाद।

16:10.483 --> 16:13.443
[वसीम]: हूँ!
अब ये हमें राजनीति सिखाएंगे!

16:20.123 --> 16:21.123
[सरस्वती]: बैठिए, बैठिए।

16:28.443 --> 16:31.603
आज हम यहाँ एक ज़रूरी
घोषणा करने के लिए उपस्थित हुए हैं।

16:32.363 --> 16:33.363
साथियों,

16:33.803 --> 16:35.523
युवा हमारे देश का भविष्य हैं।

16:36.123 --> 16:40.603
और इसलिए हम ने पार्टी की महिला मोर्चा को
और सशक्त बनाने के इरादे से

16:40.963 --> 16:47.883
उस का नेतृत्व अब एक युवा, क़ाबिल और होनहार
नेत्री के हाथ में सौंपने का फ़ैसला किया है।

16:48.723 --> 16:51.723
तो स्वागत कीजिए
महिला मोर्चा की नयी अध्यक्ष,

16:52.003 --> 16:55.323
तेज़ तर्रार, प्रतिभाशाली
रोली राय का।

16:55.803 --> 17:00.683
(सभी के तालियाँ बजाने की आवाज़)

17:21.043 --> 17:22.003
[रामानंद]: रोली।

17:22.763 --> 17:24.083
कैसी हो?

17:24.203 --> 17:25.403
आओ, बैठो।

17:28.123 --> 17:31.563
[रोली]: बहुत सोचे तो लगा
कि आप के पदचिन्हों पर चलना चाहिए।

17:31.763 --> 17:33.163
[रामानंद]: हूँ।

17:33.643 --> 17:36.563
कितनी मेहनत की है आप ने
इस मुकाम तक पहुँचने के लिए।

17:37.563 --> 17:39.763
कितने अपनों को
अपने से दूर किया है।

17:41.723 --> 17:43.763
और आप की इस मेहनत का फ़ायदा

17:43.883 --> 17:45.883
तो किसी घर के सदस्य को ही
होना चाहिए ना।

17:48.163 --> 17:50.763
तो इसीलिए आप को अपनी प्रेरणा मान

17:51.323 --> 17:53.603
हम ने राजनीति में
अपना पहला क़दम रखा है।

17:54.883 --> 17:56.283
ठीक किया ना हम ने, चाचा?

17:57.443 --> 17:59.763
[रामानंद]: अवश्य। अवश्य।

18:00.803 --> 18:03.043
माने,
हमारा कर्तव्य था तुम्हें समझाना।

18:04.323 --> 18:08.003
तुम्हारा अधिकार है
अपनी मर्ज़ी से जीना।

18:09.523 --> 18:12.323
वैसे, हमारा आशीर्वाद
सदैव तुम्हारे साथ रहेगा।

18:12.923 --> 18:14.883
कभी भी किसी चीज़ की
मदद चाहिए हो तो

18:15.003 --> 18:16.883
[रामानंद]: तो घर के दरवाज़े हमेशा तुम...
[रोली]: बड़े चाचा।

18:18.643 --> 18:21.803
[रोली]: अब मदद लेंगे नहीं, देंगे।

18:26.643 --> 18:27.803
पार्टी की मीटिंग है।

18:28.843 --> 18:29.803
चलते हैं।

18:31.123 --> 18:32.163
[रामानंद]: आशीर्वा...

18:49.203 --> 18:51.323
[वसीम]: बातों की रस्सी
ऐंठना हमें आता नहीं।

18:51.803 --> 18:53.123
साफ़-साफ़ बात कहते हैं।

18:54.283 --> 18:56.763
आप के मुख्यमंत्री बनने से
हमें कोई आपत्ति नहीं है।

18:57.883 --> 18:59.443
[रामानंद]: आपत्ति ना सही,

19:00.163 --> 19:01.483
चाहत तो होगी।

19:01.683 --> 19:02.843
[वसीम]: बहुत छोटी सी।

19:04.043 --> 19:05.683
अब्बास के ख़िलाफ़ जो मुकदमा है,

19:06.323 --> 19:07.483
उसे रफ़ा-दफ़ा कराइए।

19:08.923 --> 19:12.403
[रामानंद]: 24 घंटे के अंदर
वो लड़की केस वापस कर लेगी।

19:13.123 --> 19:14.163
और कुछ?

19:14.523 --> 19:16.723
[वसीम]: हमारे जूते में एक कील घुस आई है,

19:17.963 --> 19:19.723
जो आए दिन हमें
बहुत परेशान करती है।

19:22.163 --> 19:23.443
[रामानंद]: वसीम ख़ान,

19:24.283 --> 19:26.403
अब हमें विजय सिंह की क्या ज़रूरत?

19:41.203 --> 19:45.323
(लैंडलाइन फ़ोन पर नंबर घुमाने की आवाज़)

19:50.523 --> 19:53.403
[सदानंद]: मैडम,
आप का अनुमान बिलकुल सही है।

19:54.363 --> 19:57.923
ये वसीम ख़ान और रामानंद भाई साहब ने
आपस में गठबंधन कर लिया है।

19:58.803 --> 20:01.243
[सरस्वती]: ये मा***द रामानंद राय
बचना नहीं चाहिए।

20:01.763 --> 20:04.123
नहीं तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे।
बता रहे हैं!

20:04.523 --> 20:05.763
सा**!

20:05.883 --> 20:06.763
[सदानंद]: जी।

20:07.043 --> 20:12.323
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

20:12.763 --> 20:15.443
[सदानंद]: भाई साहब को बैकुंठ धाम
भेजने का समय आ गया है।

20:15.723 --> 20:16.803
[सनकी]: हूँ।

20:17.163 --> 20:18.083
बोलो।

20:19.443 --> 20:20.963
बड़े भैया की दिनचर्या बोलो।

20:22.963 --> 20:25.443
[सदानंद]: रोज़ सुबह-सुबह टहलने के लिए
निकल जाते हैं।

20:26.243 --> 20:29.163
उस के बाद तैयार होकर
जनता की फ़रियाद सुनने निकल पड़ते हैं।

20:30.683 --> 20:32.923
कल पड़ोस के गाँव में
किसानों से मिलने जा रहे हैं।

20:33.563 --> 20:35.923
वही सही वक़्त होगा
उन को ऊपर भेजने का।

20:37.163 --> 20:39.523
[सनकी]: वहीं सुनसान सड़क पे करेंगे कांड।

20:40.363 --> 20:41.403
(बंदूक लोड करने की आवाज़)

20:44.203 --> 20:46.963
(पुलिस-मंत्रियों की गाड़ियों के साइरन की आवाज़)
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)

21:31.803 --> 21:33.203
[गुंडा 2]: भैया,
और कितना दूर चलना है?

21:33.363 --> 21:35.843
[भैया]: अबे, सनकी भैया, हाईवे तक बुलाए हैं।
चुपचाप चलता रह।

21:41.403 --> 21:42.363
[सनकी]: चले आओ!

21:48.843 --> 21:49.843
[भैया]: जी, भैया?

21:51.363 --> 21:54.243
[सनकी]: क्या भैया?
भैया-वैया नहीं हैं हम तुम्हारे?

21:55.083 --> 21:56.523
काम के लिए आए हो। काम करो।

21:56.883 --> 21:57.843
[भैया]: हाँ, भैया।

21:58.963 --> 22:00.483
[सनकी]: घुमा के लगा दो ठिकाने पे।

22:01.123 --> 22:02.883
[सनकी]: चलो।
[भैया]: चल! आजा। चलो, बे!

22:03.083 --> 22:05.883
(पुलिस-मंत्रियों की गाड़ियों के साइरन की आवाज़)
(गाड़ियों के चलने की आवाज़)

22:35.923 --> 22:37.843
[रामानंद]: माने, रास्ते में...

22:38.443 --> 22:40.723
कैसे हो, विजय बेटे? हूँ?

22:40.963 --> 22:42.163
[विजय]: हम अच्छे हैं, चाचा जी।

22:42.483 --> 22:45.923
कुछ ज़रूरी सलाह लेने के लिए
आप से यहाँ मिलने चले आए।

22:47.003 --> 22:49.203
[रामानंद]: गाड़ी में चल के बात करते हैं। आओ।
[विजय]: चाचा जी।

22:49.323 --> 22:50.763
[रामानंद]: हाँ?
[विजय]: सिर्फ़ हम और आप।

22:51.603 --> 22:54.163
[रामानंद]: अरे, गाड़ी में हम
और तुम ही तो होंगे। आओ।

22:54.603 --> 22:58.163
[विजय]: चाचा जी, सिर्फ़ हम और आप।

22:58.603 --> 22:59.883
[रामानंद]: बोल देते हैं।

23:00.443 --> 23:01.403
(रामानंद के हँसने की आवाज़)

23:02.323 --> 23:03.283
[रामानंद]: भाई!

23:04.403 --> 23:05.363
निकलो तुम लोग।

23:05.483 --> 23:06.843
(गाड़ी के स्टार्ट करने की आवाज़)

23:07.203 --> 23:10.523
(पुलिस-मंत्रियों की गाड़ियों के साइरन की आवाज़)
(गाड़ियों के चलने की आवाज़)

23:13.723 --> 23:14.763
[भैया]: आ गए, सा**!

23:26.763 --> 23:28.883
(बंदूकों से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गार्ड के कराहने की आवाज़)

23:30.523 --> 23:32.403
(बंदूकों से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

24:23.123 --> 24:24.243
[सनकी]: हट!
(चिल्लाते हुए)

24:50.883 --> 24:52.003
[रामानंद]: अच्छी जगह है।

24:53.283 --> 24:55.963
[विजय]: बेचन चाचा की बात
हम को मान लेनी चाहिए थी।

24:58.243 --> 24:59.483
वो कहते रह गए,

25:01.203 --> 25:02.603
लेकिन उन की बात नहीं मानी।

25:04.603 --> 25:06.403
जब से आप ने हमारी जान बचाई है,

25:07.843 --> 25:11.883
तब से लेकर आप को हम
अपने जीवन में देवता का दर्जा दिए थे।

25:13.763 --> 25:17.243
आँख मूँद कर भरोसा किए थे आप पे।

25:20.243 --> 25:21.323
[रामानंद]: विजय बेटा,

25:23.163 --> 25:28.123
हमारे लिए तुम्हारे मन में कोई...
खटास तो नहीं आ रही है ना?

25:28.723 --> 25:30.043
[विजय]: ये राजनीति भी ना,

25:32.283 --> 25:34.203
अगर सगा भाई भी आड़े आ जाए,

25:35.043 --> 25:36.763
तो उसे दरकिनार कर देती है।

25:38.403 --> 25:39.683
बेचन चाचा,

25:41.203 --> 25:42.603
हमारे लिए पिता समान थे।

25:44.043 --> 25:47.163
और आप ने हमारे सर से
हमारे दूसरे बाप का साया भी छीन लिया।

25:47.283 --> 25:48.243
[रामानंद]: अरे!

25:48.683 --> 25:50.043
ये...
(हँसते हुए)

25:50.163 --> 25:52.523
[रामानंद]: अरे, ये सब क्या उलटी-सीधी बात है?
[विजय]: रोली! (रोते हुए)

25:55.483 --> 25:56.683
[रामानंद]: मतलब, क... क... क्या...

25:56.803 --> 25:58.043
क्या रो... क्या रोली?

25:58.323 --> 26:01.003
[विजय]: अरे, रोली के माता-पिता तो
आप के अपने सगे भाई-भाभी थे।

26:01.123 --> 26:02.083
[रामानंद]: हाँ।

26:02.243 --> 26:04.643
[विजय]: उन की आप ने हत्या करवा दी।

26:05.163 --> 26:07.843
[रामानंद]: क्या बात कर रहे हो?
[विजय]: रोली जो आप की इकलौती भतीजी है,

26:08.243 --> 26:10.283
[विजय]: उसे इतने सालों तक
झूठी सहानुभूति देते रहे!

26:10.403 --> 26:12.763
[रामानंद]: अरे, बहुत प्यार करते हैं उस को,
भाई! [विजय]: इस नीच राजनीति के लिए!

26:12.923 --> 26:15.243
[रामानंद]: अरे, नहीं, भाई!
लोग कान भरे हैं तुम्हारे!

26:15.363 --> 26:17.003
अरे, उन को लगता है कि

26:17.123 --> 26:18.483
हम तुम्हारे लिए ख़ास हैं,

26:18.603 --> 26:20.643
[रामानंद]: क्योंकि तुम हमारे बेटे के समान...
[विजय]: चुप!

26:21.323 --> 26:22.563
[विजय]: बेटा मत बोलिएगा।

26:25.843 --> 26:28.563
सत्ता के लालच में सब को
शतराज की गोटी समझते रहे।

26:30.323 --> 26:32.763
[कट्टा]: भैया, इन के काफ़िले पे हमला हुआ है।

26:33.043 --> 26:34.043
कोई नहीं बचा।

26:34.723 --> 26:35.763
(विजय के हँसने की आवाज़)

26:37.003 --> 26:38.243
(विजय के हँसने की आवाज़)

26:41.723 --> 26:42.843
[विजय]: चाचा जी।

26:44.123 --> 26:46.083
एक बार आप ने हमारी जान बचाई।

26:48.963 --> 26:50.123
इस बार...

26:51.363 --> 26:52.763
हम ने आप की जान बचा दी।

26:53.003 --> 26:54.603
[रामानंद]: देखो,
ग़लतफ़हमी हुई है तुम को।

26:56.243 --> 26:58.123
[रामानंद]: ए, विजय, विजय, देखो, देखो!
[विजय]: हिसाब बराबर।

26:58.243 --> 26:59.443
[रामानंद]: नहीं! भैया विजय, देखो।

26:59.643 --> 27:00.683
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

27:04.003 --> 27:05.083
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

27:23.043 --> 27:24.123
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

27:31.203 --> 27:33.443
[न्यूज़ एंकर]: अभी-अभी मिली
ताज़ा ख़बर के अनुसार

27:33.563 --> 27:37.243
पूर्वांचल के कद्दावर नेता,
उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री

27:37.363 --> 27:40.043
श्री रामानंद राय के
काफ़िले पर हमला हुआ है,

27:40.163 --> 27:41.803
जिस में उन का
निधन हो गया है।

27:41.923 --> 27:44.803
हमलावर ने उन के
सीने पे तीन गोलियाँ दागी।

27:44.923 --> 27:47.443
श्री रामानंद राय के छोटे भाई सदानंद ने

27:47.563 --> 27:50.163
आरोप लगाया है
कि इस हत्या कांड के पीछे

27:50.283 --> 27:51.683
वसीम ख़ान का हाथ है।

27:51.803 --> 27:54.403
क्योंकि इसे अंजाम देने वाला सनकी पांडे,

27:54.523 --> 27:56.483
जो वसीम ख़ान का ख़ास है।

27:56.603 --> 27:58.603
रामानंद राय के अचानक निधन ने

27:58.723 --> 28:01.323
पूरे प्रदेश को सकते में डाल दिया है।

28:01.723 --> 28:04.643
राज्यपाल ने उन की मौत पर
शोक व्यक्त करते हुए

28:04.763 --> 28:06.393
उन के परिवार के प्रति

28:06.403 --> 28:08.113
गहरी संवेदना व्यक्त की है।

28:08.123 --> 28:12.243
(सदानंद के रोने की आवाज़)

28:18.003 --> 28:19.163
[सदानंद]: छोड़ गए!
(रोते हुए)

28:19.483 --> 28:21.323
(सदानंद के रोने की आवाज़)

28:29.643 --> 28:30.603
[सदानंद]: भैया।
(रोते हुए)

28:32.443 --> 28:39.003
(सदानंद के रोने की आवाज़)

28:48.043 --> 28:51.363
[सदानंद]: भाई साहब को वसीम ख़ान की तरफ़ से
लगातार धमकी मिल रही थी।

28:52.043 --> 28:55.283
वसीम ख़ान का दाहिना हाथ, सनकी,
(रोते हुए)

28:56.323 --> 28:59.643
उन को बार-बार मारने की
कोशिश कर रहा था, लेकिन वो बचते रहे।

29:00.563 --> 29:02.403
इस बार बच नहीं पाए।
(रोते हुए)

29:04.043 --> 29:07.443
वसीम ख़ान और सनकी
अपने मंसूबे में कामयाब हो गए। (रोते हुए)

29:09.483 --> 29:12.363
लेकिन हम जाँच करवाएँगे
(रोते हुए)

29:12.483 --> 29:14.603
और सच का पता करके रहेंगे।
(रोते हुए)

29:15.043 --> 29:17.803
बस, आप लोगों का साथ चाहिए।
(रोते हुए)

29:28.563 --> 29:32.603
[वसीम]: ये जो कांड है ना, ये आप के
और आप के उस लाडले की वजह से हुआ है।

29:33.403 --> 29:36.283
ना वो चू*** करता,
ना हम रामानंद राय से मिलते

29:36.443 --> 29:38.443
और ना आज हमारा
राजनीतिक करियर ख़त्म होता।

29:39.523 --> 29:41.003
आप को पता है
दुख की बात क्या है?

29:42.243 --> 29:44.043
हमारी गाँ** हमारे ख़ुद के
घर वालों ने मारी है।

29:44.163 --> 29:45.843
बाहर वालों में तो
कभी दम था ही नहीं!

29:46.443 --> 29:48.323
लेकिन हम भी वसीम ख़ान हैं,
वसीम ख़ान!

29:48.843 --> 29:50.283
बचपन से लड़ते-भिड़ते आ रहे हैं।

29:50.443 --> 29:52.163
इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे।

29:54.243 --> 29:55.403
[बाबर]: वसीम!

30:07.203 --> 30:10.563
(फ़ोन पर नंबर डायल करने की आवाज़)

30:13.443 --> 30:14.723
[बाबर]: बाबर ख़ान बोल रहे हैं।

30:15.123 --> 30:17.003
प्रधान मंत्री जी से
बात हो सकती है?

30:17.363 --> 30:19.043
[टेलीकॉलर]: जी, थोड़े देर में करवाते हैं।

30:19.963 --> 30:21.323
[बाबर]: जी। अच्छी बात है।

30:31.163 --> 30:33.923
[सरस्वती]: सिर्फ़ आरोप नहीं लगेगा,
गवाही भी होगी।

30:34.043 --> 30:37.123
और गवाही देने वाला होगा
स्वयम् रामानंद का भाई।

30:38.163 --> 30:40.243
आप लोगों के लिए
इतना तो काफ़ी होता होगा ना?

30:40.723 --> 30:43.283
[सरस्वती]: एक आरोपी अभियुक्त को
जेल भेजने के लिए? [दरोगा 2]: जी, मैडम।

30:45.083 --> 30:46.763
[सरस्वती]: हम शपथ लेने का सोच रहे हैं।

30:47.563 --> 30:48.643
क्या विचार है आप का?

30:48.763 --> 30:49.963
[दरोगा 2]: अवश्य, मैडम।

30:50.563 --> 30:51.843
शुभस्य शीघ्रम, मैडम।

30:58.123 --> 30:59.883
[सनकी की बीवी]: सा**, झाँ** ने
मैया चो** के रख दी है!

31:00.003 --> 31:01.923
[सनकी की बीवी]: मा***द, सा**!
[राहुल]: अरे, दीदी, ये सब चक्कर में ना पड़ो।

31:02.043 --> 31:04.883
[राहुल]: तुम्हारा प्रेम प्रेम
और उस का प्रेम चोपड़ा हुआ है, मा***द!

31:05.043 --> 31:07.483
भागा पड़ा है यहाँ से
भो** के सब को फँसा के।

31:07.603 --> 31:09.723
[राहुल]: और करो प्रेम विवाह!
[दरोगा 3]: रुक जाओ सारे के सारे!

31:10.043 --> 31:11.283
[राहुल]: दीदी, लग रहा है,
पुलिस आ गई, दीदी।

31:11.403 --> 31:12.723
[दरोगा 3]: एक-एक कमरा चेक करो!

31:12.843 --> 31:14.083
एक-एक बंदूक का
लाइसेंस चेक करो!

31:14.203 --> 31:15.723
[सनकी की बीवी]: अरे, ऐसे आप घर में
कहाँ घुसे जा रहे हैं?

31:15.843 --> 31:16.763
[सनकी की बीवी]: घर में कोई नहीं है!
[दरोगा 3]: चुप!

31:16.883 --> 31:17.683
[दरोगा 3]: नहीं तो लगाऊँगा एक!

31:17.803 --> 31:19.513
[राहुल]: साहब, कहाँ जा रहे हैं, साहब?
[दरोगा 3]: तू कहाँ भाग रहा है बे?

31:19.523 --> 31:20.443
[राहुल]: अरे, साहब...
[दरोगा 3]: कहाँ भाग रहा है बे?

31:20.563 --> 31:21.843
[राहुल]: अरे, साहब, ये सनकी का घर है।
हमारा घर नहीं है।

31:21.963 --> 31:23.243
[राहुल]: कुछ नहीं है, साहब, इस घर में।
[कॉन्स्टेबल]: साहब, गाँजा मिला है।

31:23.363 --> 31:24.403
[कॉन्स्टेबल]: अंदर और है।

31:25.163 --> 31:26.513
[दरोगा 3]: ये क्या है बे?
[राहुल]: अरे, साहब, ये हमारा नहीं है!

31:26.523 --> 31:28.043
[दरोगा 3]: गाँजे की खेती करते हो! चुप! चल!
[राहुल]: सनकी का है, साहब, गाँजा ये!

31:28.163 --> 31:29.883
[राहुल]: ग़लत धंधा वही करता है, साहब!
[दरोगा 3]: इस की माँ को चो**, साहब!

31:30.003 --> 31:32.083
[दरोगा 3]: अरे, सनकी गया माँ चु**! चल,
मा***द! [राहुल]: अरे, कॉलर छोड़के बात करिए आप!

31:32.203 --> 31:33.683
[राहुल]: पहले कॉलर छोड़िए आप!
[दरोगा 3]: ए, चलो रे सब लोग!

31:33.803 --> 31:35.403
[राहुल]: पहले कॉलर छोड़िए, साहब!
[दरोगा 3]: चल!

31:35.523 --> 31:36.523
[दरोगा 3]: चल!
[राहुल]: कहा ना, कॉलर छोड़िए हमारा!

31:36.643 --> 31:39.043
[राहुल]: अरे, साहब, छोड़ दीजिए।
बता रहे हैं कि आप ग़लत कर रहे हैं।

31:39.163 --> 31:40.683
[राहुल]: हम सनकी नहीं हैं!
[दरोगा 3]: चुप! ए, चुप!

31:40.883 --> 31:43.243
[राहुल]: अरे, साहब, बात समझिए।
[दरोगा 3]: लेके चल इस को। बैठा इस को अंदर।

31:43.363 --> 31:44.803
[राहुल]: अरे, साहब, बात समझिए।

31:45.323 --> 31:47.323
सनकी मा***द का है, साहब।

31:49.563 --> 31:54.283
(पुलिस जीप की सायरन की आवाज़)

31:58.203 --> 32:00.163
[सरस्वती]: सब को सूचना पहुँच गई है ना?
[सदानंद]: मैडम।

32:01.283 --> 32:02.363
[सरस्वती]: आप लोग चलिए।

32:07.523 --> 32:08.603
[सदानंद]: मैडम जी।

32:09.443 --> 32:12.363
मैडम जी,
रामानंद राय मारे गए।

32:13.123 --> 32:14.843
अब आप मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं।

32:15.123 --> 32:16.443
वसीम ख़ान जेल जा रहा है।

32:16.683 --> 32:19.563
मतलब, आप के रास्ते के
सारे काँटे साफ़ हो गए।

32:20.123 --> 32:21.483
और आप के पौ बारह हो गए।

32:22.403 --> 32:25.473
अब हमें भी
वो पार्टी में स्थान मिल जाता तो।

32:25.483 --> 32:26.403
(फ़ोन पर नंबर डायल करने की आवाज़)

32:26.523 --> 32:28.843
[सदानंद]: ज़्यादा नहीं,
वो भाई साहब का स्थान।

32:29.123 --> 32:32.443
मतलब, उन के फोटो के नीचे
बैठ के थोड़ा जनता की सेवा कर पाता,

32:32.643 --> 32:34.163
गौ माता के आशीर्वाद से।

32:37.203 --> 32:38.883
(लैंडलाइन पर रिंग बजने की आवाज़)
(फ़ोन रिसीवर उठाने की आवाज़)

32:39.283 --> 32:41.683
[एसपी]: हेलो।
[सरस्वती]: वसीम ख़ान गिरफ़्तार होना चाहिए,

32:41.923 --> 32:43.843
[सरस्वती]: लेकिन किसी थाने में
नहीं पहुँचना चाहिए।

32:44.163 --> 32:46.603
और साथ में विजय सिंह भी
ज़िंदा नहीं बचना चाहिए।

32:47.283 --> 32:48.163
ठीक है?

32:48.283 --> 32:50.283
[एसपी]: जी, मैडम। हो जाएगा।

32:54.523 --> 32:55.683
[सरस्वती]: कुछ कह रहे थे आप?

32:56.283 --> 32:57.443
[सदानंद]: अ...
(हँसते हुए)

32:57.843 --> 33:00.323
मैम, वो पार्टी में स्थान...

33:01.323 --> 33:03.243
भाई साहब वाला मिल जाता...

33:04.283 --> 33:05.083
[सरस्वती]: स्थान?

33:05.203 --> 33:07.683
[सदानंद]: जी। जी, मैडम।
बहुत मेहनत किया है। आप को तो...

33:08.883 --> 33:10.803
[सरस्वती]: सोचते हैं। हूँ?

33:42.963 --> 33:45.003
(अब्बास के रोने की आवाज़)

33:50.283 --> 33:51.203
[अब्बास]: अब्बू।
(रोते हुए)

34:02.043 --> 34:03.443
सब ग़लत हो रहा है, अब्बू।
(रोते हुए)

34:05.523 --> 34:06.763
हम ने कुछ नहीं किया है।
(रोते हुए)

34:06.883 --> 34:08.163
[बाबर]: जानता हूँ, बेटा।

34:09.403 --> 34:10.643
सब जानता हूँ मैं।

34:11.683 --> 34:16.643
बस... जैसा मैंने तुझ से कहा है,
वैसा ही कर।

34:17.123 --> 34:18.203
[अब्बास]: हाँ।

34:18.483 --> 34:20.283
तुझे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है।

34:21.043 --> 34:21.963
हूँ?

34:23.563 --> 34:27.483
और इस वसीम ख़ान को तो
असली सियासत अब हम सिखाएंगे।

34:34.403 --> 34:35.763
[गुंडा 5]: ईद मुबारक, भाई जान।

34:36.643 --> 34:37.683
[ताहिर]: सलाम।

34:38.603 --> 34:39.963
ईद मुबारक हो, चाचा।

34:42.203 --> 34:43.043
[वसीम]: ईद मुबारक।

34:43.163 --> 34:44.483
[वसीम]: कैसे हैं आप?
[विधायक]: ख़ैरियत।

34:44.603 --> 34:46.683
[विधायक 3]: ईद मुबारक।
[वसीम]: ईद मुबारक हो। सलाम।

34:47.483 --> 34:48.593
[विधायक 4]: आप को भी मुबारक।

34:48.603 --> 34:52.523
(पुलिस जीप के सायरन की आवाज़)

35:03.043 --> 35:04.403
[सीबीआई ऑफिसर]: मिस्टर वसीम ख़ान।

35:07.243 --> 35:08.203
सीबीआई।

35:09.243 --> 35:10.643
आप को हमारे साथ चलना होगा।

35:11.443 --> 35:13.363
[वसीम]: आरोप क्या है?
[सीबीआई ऑफिसर]: नकली नोट छापना,

35:13.843 --> 35:15.043
[सीबीआई ऑफिसर]: उन का वितरण करना,

35:15.443 --> 35:17.723
पाकिस्तान के आतंकी संगठन का साथ देना।

35:18.003 --> 35:19.363
ये सब इलज़ाम हैं आप पर।

35:19.683 --> 35:21.363
[बिलाल]: वसीम ख़ान को लेकर जाओगे तुम?

35:21.643 --> 35:22.843
[बिलाल]: वसीम ख़ान को!
[सीबीआई ऑफिसर 2]: ए!

35:22.963 --> 35:24.483
[सीबीआई ऑफिसर 2]: अनुशासन में रहो!
[बिलाल]: ए!

35:25.403 --> 35:26.723
[सीबीआई ऑफिसर]: कृपया,
हमारे साथ सहयोग करें।

35:29.883 --> 35:32.323
[गुंडा 4]: ऐसे कैसे ले जा सकते हो? [बिलाल]:
ऐसे कैसे भाई जान को ले जा सकते हैं आप? हाँ?

35:32.723 --> 35:34.883
[ताहिर]: बिलाल चाचा,
कहाँ लेकर जा रहे हैं अब्बू को?

35:36.803 --> 35:37.883
[ताहिर]: अब्बू!

35:39.443 --> 35:40.393
अब्बू!

35:40.403 --> 35:41.913
अब्बू,
ये कहाँ लेके जा रहे हैं आप को?

35:41.923 --> 35:43.763
(पुलिस जीप के सायरन की आवाज़)

35:43.883 --> 35:46.683
[ताहिर]: जाने दो। जाने दो
अब्बू के पास। अब्बू, रुको!

35:46.803 --> 35:47.923
[ताहिर]: रुको!
[बिलाल]: अरे, ताहिर!

35:48.043 --> 35:49.843
[ताहिर]: गाड़ी रोको!
[बिलाल]: ताहिर, रुको ना। बच्चा।

35:49.963 --> 35:51.403
[ताहिर]: अरे, छोड़ो हमें। गाड़ी रोको।
[बिलाल]: रुक जा, बच्चा!

35:51.523 --> 35:53.523
[बिलाल]: अरे, ताहिर यार, रुको!
[ताहिर]: छोड़ दो अब्बू को!

35:53.683 --> 35:55.043
[बिलाल]: अरे!
[बिलाल]: अरे, ताहिर! ताहिर, रुको!

35:55.163 --> 35:57.043
[ताहिर]: मा***द!
[वसीम की बेग़म]: ताहिर! ताहिर, रुक!

36:15.963 --> 36:16.923
[सरस्वती]: नमस्ते।

36:23.043 --> 36:24.443
ज़फर क़ादरी साहब,

36:25.603 --> 36:28.843
आप के बाहुबली नेता वसीम ख़ान तो
अब सीधे जेल जा रहे हैं।

36:29.883 --> 36:31.123
आप कहाँ जाएंगे,

36:31.803 --> 36:33.563
ये तो सोच ही लिया होगा
आप लोगों ने?

36:34.203 --> 36:35.043
नहीं?

36:35.163 --> 36:37.563
[क़ादरी]: बिलकुल, मैडम जी।
हमारा समर्थन तो आप ही को जाएगा।

36:38.443 --> 36:41.243
मगर प्रदेश में जेल तो
बाहुबलियों का ठेका है।

36:42.123 --> 36:43.603
हमारी सुरक्षा कौन करेगा?

36:44.003 --> 36:45.963
[सरस्वती]: आप की सुरक्षा
हमारी ज़िम्मेदारी है।

36:46.643 --> 36:48.683
वसीम ख़ान से डरने की
कोई ज़रूरत नहीं है।

36:49.363 --> 36:50.563
हम वचन देते हैं।

36:51.603 --> 36:52.843
घबराइए मत। हूँ?

36:53.923 --> 36:56.763
[क़ादरी]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

36:56.883 --> 36:59.603
[क़ादरी]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

36:59.723 --> 37:02.563
[क़ादरी]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

37:02.683 --> 37:05.203
[क़ादरी]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

37:05.323 --> 37:10.883
(पुलिस जीप के सायरन की आवाज़)

37:13.443 --> 37:14.483
[डीजी]: सर!

37:15.963 --> 37:17.363
[बाबर]: आइए, डीजी साहब।

37:22.803 --> 37:24.843
[डीजी]: सर, वसीम ख़ान के ख़िलाफ़
गिरफ़्तारी का वारंट है।

37:25.283 --> 37:27.483
[बाबर]: पहले ईद की
मुबारकबाद तो ले लीजिए।

37:29.323 --> 37:31.003
[डीजी]: सर, प्लीज़,
आप हमारा सहयोग करें।

37:31.523 --> 37:33.163
वरना हमें घर की तलाशी लेनी पड़ेगी।

37:34.043 --> 37:36.443
[बाबर]: कल तक इसी चौखट की
बोटियाँ तोड़ते थे

37:37.203 --> 37:38.603
और आज तेवर दिखा रहे हो।

37:39.843 --> 37:42.763
लेकिन फ़िल्म वाली पुलिस की तरह

37:42.883 --> 37:44.563
यूपी पुलिस ने तो देर कर दी।

37:45.403 --> 37:47.283
वसीम ख़ान को तो
सीबीआई ले गई।

37:49.403 --> 37:50.443
[डीजी]: ठीक है, सर।

37:50.963 --> 37:51.963
हम चलते हैं।

38:04.963 --> 38:07.563
(लैंडलाइन फ़ोन पर नंबर घुमाने की आवाज़)

38:10.923 --> 38:12.803
(लैंडलाइन फ़ोन पर रिंग बजने की आवाज़)

38:12.923 --> 38:14.803
[हिमांशु]: हेलो?
[विजय]: कैसे हैं, एसीपी साहब?

38:15.643 --> 38:16.683
[हिमांशु]: कौन?

38:16.963 --> 38:18.043
[विजय]: विजय सिंह।

38:21.883 --> 38:23.083
[हिमांशु]: कहो। कैसे याद किया?

38:23.243 --> 38:24.523
[विजय]: बहुत साथ दिया आप ने हमारा,

38:25.363 --> 38:26.803
तो सोचा कि अब हमारी बारी है।

38:27.523 --> 38:30.963
अगर आप आश्वासन दें
कि हमारे साथ उचित व्यवहार होगा,

38:32.803 --> 38:34.203
तो आत्मसमर्पण करना चाहते हैं।

38:36.443 --> 38:37.603
लेकिन सिर्फ़ आप को।

38:38.243 --> 38:40.483
[हिमांशु]: आत्मसमर्पण तो
तुम यूपी पुलिस को भी कर सकते हो।

38:41.163 --> 38:42.163
मुझे ही क्यों?

38:42.403 --> 38:43.323
(विजय के हँसने की आवाज़)

38:45.323 --> 38:47.163
[विजय]: वैसे,
तो पूरा पूर्वांचल ही हमारा गढ़ है,

38:48.443 --> 38:51.923
लेकिन प्रदेश की पुलिस पे
भरोसा नहीं है हम को।

38:52.763 --> 38:54.163
36 का आँकड़ा है उन के साथ।

38:55.563 --> 38:56.843
[हिमांशु]: और मुझ पे है?

38:57.163 --> 38:58.963
[विजय]: भरोसा जीता है आप ने हमारा।

38:59.883 --> 39:01.883
[हिमांशु]: मैं पूरी कोशिश करूँगा
तुम्हें कोई तकलीफ़ ना हो।

39:02.363 --> 39:03.323
[विजय]: ठीक है फिर।

39:03.643 --> 39:05.243
मिलने का समय
और जगह हम बताएँगे।

39:06.403 --> 39:07.883
[हिमांशु]: तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार करूँगा।

39:17.003 --> 39:18.483
(हिमांशु के आहें भरने की आवाज़)

39:20.523 --> 39:24.123
(सभी के तालियाँ बजाने की आवाज़)

39:35.803 --> 39:36.843
[कट्टा]: भैया, नहीं।

39:37.523 --> 39:38.683
आप सामने नहीं जाएंगे।

39:40.683 --> 39:42.083
पहले हम जाके माहौल समझेंगे।

39:42.443 --> 39:43.723
[छुन्नू]: कट्टा ठीक कह रहा है, भैया।

39:44.923 --> 39:46.443
सब कुछ तो इतना ठीक चल रहा है।

39:46.923 --> 39:48.923
फिर क्यों ज़रूरत है
आत्मसमर्पण करने की?

39:51.003 --> 39:53.243
[विजय]: सब कुछ ठीक चल रहा है,
तभी तो आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं।

39:54.923 --> 39:56.443
और हम को लगता है
कि यही सही समय है।

39:58.323 --> 39:59.323
[छुन्नू]: ठीक है।

40:00.323 --> 40:02.363
[छुन्नू]: हम दोनों भी आप के साथ चलेंगे।
[कट्टा]: हाँ।

40:05.123 --> 40:06.163
[विजय]: नहीं, छुन्नू।

40:07.643 --> 40:09.083
परिवार को तुम्हारी ज़रूरत है।

40:09.843 --> 40:11.523
और वैसे भी,
ये मेरा कियाधरा है।

40:13.283 --> 40:14.563
तो भरना भी मुझे ही पड़ेगा।

40:16.163 --> 40:17.643
बस ये समझ लो कि ये एक

40:18.843 --> 40:20.843
आने वाले अच्छे कल की
नयी शुरुआत है।

40:23.123 --> 40:26.643
(छुन्नू और कट्टा के रोने की आवाज़)

40:31.163 --> 40:32.123
[अधिकारी]: मैं...

40:32.803 --> 40:35.003
[सरस्वती]: मैं, सरस्वती देवी,

40:35.443 --> 40:37.123
ईश्वर की शपथ लेती हूँ

40:37.283 --> 40:38.803
कि मैं विधि द्वारा स्थापित

40:39.043 --> 40:40.763
भारत के संविधान के प्रति

40:41.123 --> 40:43.323
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगी।

40:44.163 --> 40:47.483
मैं राज्य की प्रभुता
और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगी।

40:48.483 --> 40:50.443
मैं राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में

40:50.683 --> 40:52.483
अपने कर्तव्यों का श्रद्धा पूर्वक

40:52.843 --> 40:55.043
और शुद्ध अंतःकरण से
निर्वहन करूँगी।

40:56.043 --> 40:58.043
तथा मैं भय या पक्षपात

40:58.883 --> 41:00.443
अनुराग या द्वेष के बिना

41:01.003 --> 41:02.723
सभी प्रकार के लोगों के प्रति

41:03.043 --> 41:06.203
संविधान और विधि के
अनुसार न्याय करूँगी।

41:07.883 --> 41:09.443
[दरोगा 4]: घेरो सा** को।
[सब इंस्पेक्टर]: जी, सर।

41:11.443 --> 41:16.283
(सभी के तालियाँ बजाने की आवाज़)

41:16.803 --> 41:19.163
[उद्घोषक 4]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

41:19.283 --> 41:22.283
[उद्घोषक 4]: सरस्वती देवी...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

42:08.403 --> 42:11.283
[सब इंस्पेक्टर]: विजय सिंह और हिमांशु पटनायक
आमने-सामने खड़े हैं, सर।

42:12.203 --> 42:13.243
[कट्टा]: चलें?

42:19.003 --> 42:20.083
[हिमांशु]: चलेंगे।

42:22.803 --> 42:24.123
पहले विजय सिंह तो आ जाए।

42:29.203 --> 42:31.123
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

42:31.283 --> 42:33.763
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

42:34.363 --> 42:36.603
(बंदूकों से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

43:03.723 --> 43:05.203
[दरोगा 4]: हम प्रदेश पुलिस से हैं!

43:05.803 --> 43:07.883
हमें अपना काम करने दो,
हिमांशु पटनायक!

43:15.563 --> 43:18.403
फ़ौरन कंट्रोल रूम को ख़बर करो
कि विजय सिंह को हम ने मार दिया है।

43:18.523 --> 43:19.403
[सब इंस्पेक्टर]: जी, सर।

43:21.323 --> 43:23.523
[दरोगा 4]: तुम जाओ। एम्बुलेंस लेके
आओ जल्दी से। [केशव]: सर...

43:36.323 --> 43:39.483
[हिमांशु]: विजय सिंह आत्मसमर्पण करने वाला है,
ये बात यूपी पुलिस तक कैसे पहुँची?

43:41.803 --> 43:42.923
कोई तो है!

43:43.843 --> 43:51.603
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
