WEBVTT

00:08.523 --> 00:11.403
(ज़ोरों से डंडा और कोड़े मारने की आवाज़)
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

00:11.723 --> 00:13.883
[छुन्नू]: मार सा**! और तेज़ मार!
(कराहते हुए)

00:15.003 --> 00:18.243
[दरोगा 1]: पूर्वांचल में
आतंकवाद फैला रहे हैं, ह***!

00:18.443 --> 00:20.123
(ज़ोरों से डंडा और कोड़े मारने की आवाज़)
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

00:20.243 --> 00:21.643
[दरोगा 1]: छुन्नू सिंह चू**!

00:22.003 --> 00:23.043
मारो!
(चिल्लाते हुए)

00:24.603 --> 00:27.483
[छुन्नू]: सा**, गिरफ़्तार किए हो,

00:27.603 --> 00:30.643
तो थाने लेके चलो ना।
यहाँ क्यों लाए हो, बे?

00:30.763 --> 00:32.763
[दरोगा 1]: थाने जाएंगे, मा***द!
[छुन्नू]: हाँ?

00:33.283 --> 00:36.363
[छुन्नू]: तुम्हारे जीजा वसीम ख़ान के
हुक्म से लेके आए हो ना?

00:37.723 --> 00:38.843
सा**,
(कराहते हुए)

00:38.963 --> 00:43.403
विजय सिंह का नाम सुन के
गाँ** फट गया है तुम्हारे गृह मंत्री जी का!

00:43.523 --> 00:44.683
[दरोगा 1]: मारो मा***द को!
(चिल्लाते हुए)

00:45.083 --> 00:47.203
(ज़ोरों से डंडा और कोड़े मारने की आवाज़)
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

00:51.123 --> 00:52.443
[विजय]: छुन्नू को पुलिस उठा कर ले गई है।

00:54.123 --> 00:56.763
और इस से पहले कि उस के साथ कोई हादसा हो जाए,
हमें उसे छुड़वाना है, चाचा जी।

00:57.403 --> 00:59.043
[रामानंद]: विजय, तुम्हें क्या लगता है?

00:59.883 --> 01:02.723
माने, किस के आदेश पे
उठाया होगा पुलिस ने उसे?

01:03.003 --> 01:04.363
[विजय]: इस में लगना क्या है, चाचा जी?

01:04.523 --> 01:05.963
वही होगा सा**, मा***द!

01:06.403 --> 01:07.603
वसीम ख़ान।

01:09.323 --> 01:10.403
ये उसी का काम है।

01:10.723 --> 01:12.643
[रामानंद]: भाई,
हम तो पहले ही तुम्हें बताये थे।

01:13.003 --> 01:15.283
तुम्हारे परिवार को
बहुत परेशान करने वाला है।

01:16.483 --> 01:20.243
माने, कहाँ-कहाँ पे नज़र रखें, भाई?
समझ में नहीं आता है।

01:21.043 --> 01:23.243
[विजय]: माने, तो ये बहुत हो गया
आई स्पाई का खेल।

01:24.123 --> 01:25.483
अब इसे हम जल्दी ख़त्म करेंगे।

01:26.643 --> 01:29.203
अगर वो अपने गुंडे दिखाता ना,
तो हम भी अपना तेवर दिखाते उसे।

01:30.363 --> 01:32.443
लेकिन वो अपने गृह मंत्री होने का
फ़ायदा उठा रहा है।

01:33.003 --> 01:34.683
राजनैतिक पावर इस्तेमाल कर रहा है।

01:35.083 --> 01:36.763
और अब हमें उस से बड़ा पावर बनना है।

01:39.083 --> 01:42.043
और इस के लिए आप को सब से पहले
मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाना है अब।

01:43.003 --> 01:45.643
[रामानंद]: विजय, जानते हो
तुम्हारी ख़ासियत क्या है?

01:47.203 --> 01:49.083
माने, तुम पढ़े-लिखे हो,

01:49.643 --> 01:51.683
परिस्थितियों को भाँप लेते हो

01:51.803 --> 01:54.603
और परिस्थितियों के हिसाब से
अगला क़दम उठाते हो।

01:57.603 --> 02:00.163
[विजय]: अब सारे विधायक वसीम ख़ान के नहीं,

02:01.603 --> 02:02.763
आप के होंगे।

02:03.763 --> 02:05.603
और ये विजय सिंह का वादा है आप से।

02:07.403 --> 02:09.243
मगर छुन्नू को कुछ नहीं
होना चाहिए, चाचा जी।

02:10.003 --> 02:12.963
[रामानंद]: देखो, विजय।
हम वसीम को पसंद नहीं करते।

02:13.603 --> 02:16.403
लेकिन छुन्नू की ख़ातिर
हम वसीम ख़ान से मिलेंगे।

02:17.723 --> 02:19.483
लेकिन तुम एक बात याद रखना।

02:20.723 --> 02:22.483
उन विधायकों पे नज़र रखो।

02:22.603 --> 02:25.963
मेंढक होते हैं, मेंढक।
कभी भी फुदक सकते हैं।

02:41.283 --> 02:42.323
[सनकी]: वो...

02:42.843 --> 02:45.283
क्या है ना आजकल
हम फूले नहीं समा रहे हैं।

02:46.123 --> 02:48.603
ऐसा मन में बिलकुल
कौतुहल सा मचा रहता है।

02:49.763 --> 02:52.923
हमें तो बस अब ये लग रहा है
कि हम झट से चुनाव खेलें,

02:53.323 --> 02:54.443
फट से मंत्री बनें

02:54.563 --> 02:57.323
और खट से जाके
हेलिकॉप्टर में जाके बैठ जाएँ।

02:57.523 --> 02:59.803
और फिर पूरे प्रदेश का ना
मुआयना करेंगे।

03:00.043 --> 03:02.363
और फिर वहीं जाके थूकेंगे सा**!

03:03.483 --> 03:04.963
[सरस्वती]: क, का, ह, र, याद किए नहीं

03:05.803 --> 03:07.443
और किताब पढ़ने की सोचने लगे!

03:09.563 --> 03:11.603
अपने भावना पर क़ाबू रखना सीखो।

03:12.723 --> 03:14.483
राजनीति के लिए बहुत ज़रूरी है।

03:16.283 --> 03:17.683
[सनकी]: हूँ।

03:17.923 --> 03:19.363
हर काम का वक़्त होता है।

03:20.163 --> 03:22.643
हम ने जो कहा है,
पहले वो करो।

03:22.923 --> 03:24.723
[सदानंद]: काम तो सुना ही नहीं,
करेंगे क्या ये?

03:24.883 --> 03:27.323
[सनकी]: अरे, यार, उस दिन तुम आए थे,
हम ने तुम से कहा था कि हम कर देंगे।

03:27.483 --> 03:29.243
एक बार बोले थे कर देंगे,
तो कर देंगे ना।

03:29.563 --> 03:31.043
[सरस्वती]: काम जानना बहुत आवश्यक है।

03:33.163 --> 03:34.803
हम किसी को धोखे में
नहीं रखना चाहते।

03:36.723 --> 03:38.323
[सनकी]: धोखे की बात है,
तो बोलिए।

03:40.963 --> 03:42.443
[सरस्वती]: रामानंद राय को मारना है।

03:42.723 --> 03:43.563
[सनकी]: हूँ?

03:49.563 --> 03:51.283
अरे, तुम्हारे तो भाई हैं ना वो, सदानंद?

03:53.563 --> 03:54.563
सा**!

03:55.923 --> 03:57.483
ग़ज़ब ही आदमी हो, यार!

03:58.043 --> 03:59.603
अपने भाई को मरवा दोगे?

04:03.043 --> 04:06.403
हम यहाँ सोच रहे हैं
कि हम ही इस प्रदेश के दर ह** आदमी हैं।

04:07.843 --> 04:09.723
अरे, तुम तो दर-दर के ह** निकले।

04:10.683 --> 04:12.913
घोर कलियुग आ गया है, भाई। मैडम।

04:12.923 --> 04:15.243
[सरस्वती]: यूँ ही बात करके समय नष्ट मत करो।

04:16.203 --> 04:18.363
मार पाओगे या नहीं?
ये बताओ।

04:20.643 --> 04:21.643
[सनकी]: मार देंगे।

04:23.003 --> 04:24.083
हमें क्या है?

04:24.443 --> 04:25.843
गोली ही तो चलानी है।

04:27.163 --> 04:28.483
[सरस्वती]: वो कोई आम आदमी नहीं है।

04:30.043 --> 04:31.203
रामानंद राय है।

04:31.643 --> 04:33.083
[सनकी]: हम भी कोई आम आदमी नहीं हैं।

04:33.963 --> 04:35.203
सनकी पांडे हैं।

04:37.043 --> 04:38.363
[सरस्वती]: सदानंद आप की मदद करेंगे।

04:42.803 --> 04:44.083
[सनकी]: सा**!

04:45.923 --> 04:46.963
(सदानंद के हँसने की आवाज़)

04:51.243 --> 04:54.283
[सुधा]: पता नहीं, छुन्नू को
कहाँ लेके गए होंगे? (रोते हुए)

04:56.123 --> 04:58.363
[विजय]: अम्मा, आप फ़िक्र मत कीजिए।
हम पता कर रहे हैं।

04:59.003 --> 05:00.403
और छुन्नू जल्दी मिलेगा।

05:01.403 --> 05:03.083
[सुधा]: हूँ।
[विजय]: परेशान मत होइए आप।

05:13.843 --> 05:16.643
[रोली]: बॉम्बे वाला एसीपी
हिमांशु हम से मिलने आया था।

05:28.963 --> 05:31.683
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

06:00.163 --> 06:01.283
(दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़)

06:09.803 --> 06:15.283
(पत्र खोलने की आवाज़)

06:15.523 --> 06:16.833
'विजय सिंह ने देश के दुश्मन
डॉन को मारने की क़सम खाई है।'

06:16.843 --> 06:17.953
'प्रिय हिमांशु जी, अगर मिलना है
तो ये ख़बर बंबई के अख़बारों में छपवा दो।'

06:17.963 --> 06:19.203
'आप का शुभचिंतक, विजय सिंह।'

06:21.363 --> 06:22.603
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

06:48.683 --> 06:49.633
[क़ादरी का बेटा]: मम्मी, नहीं!

06:49.643 --> 06:50.713
[क़ादरी की बेग़म]: लोना, बेटा।
[क़ादरी का बेटा]: मम्मी, प्लीज़।

06:50.723 --> 06:51.913
[क़ादरी की बेग़म]: कितने पतले होते जा रहे हो।
[क़ादरी का बेटा]: नहीं, मम्मी! नहीं।

06:51.923 --> 06:52.913
[क़ादरी का बेटा]: मम्मा, प्लीज़, नहीं।

06:52.923 --> 06:55.563
[क़ादरी]: अरे, पिया करो।
क्यों नहीं पीते हो? हाँ?

06:55.763 --> 06:57.163
जवाब दो! क्यों नहीं पीते हो?

06:57.283 --> 07:00.323
[क़ादरी का बेटा]: जब आप को ख़ाली बैग मिला था,
तो आप ने क्यों जवाब नहीं दिया?

07:01.923 --> 07:03.243
[क़ादरी]: ये सब कौन बोला तुमको?

07:03.803 --> 07:06.403
[क़ादरी का बेटा]: दो लोग खड़े थे
स्कूल के बाहर, उन्होंने मुझे बताया।

07:07.003 --> 07:08.763
[क़ादरी]: अरे, फ़ालतू लोगों से
बात मत किया करो।

07:09.003 --> 07:10.643
इस को ले जाओ!
इस को ले जाओ! इस को ले जाओ!

07:13.483 --> 07:15.323
बाहरी लोगों से बात मत किया करो!

07:19.643 --> 07:21.323
अरे, यार, गाड़ी निकालो, यार!

07:24.243 --> 07:25.643
सा** हिम्मत देखो सा** की।

07:26.083 --> 07:28.643
हमारे बच्चे के ज़रिए ही
हमको धमकी दिलवा रहे हैं।

07:30.243 --> 07:32.043
[ड्राइवर 1]: तो मान लीजिए ना
आप उन की बातों को।

07:32.323 --> 07:33.203
[क़ादरी]: क्या?

07:33.563 --> 07:35.523
[ड्राइवर 1]: तो आप उन की
बातों को मान लीजिए।

07:36.283 --> 07:39.003
[क़ादरी]: सुनो, अपना काम करो।
ड्राइवर हो, ड्राइवर की तरह रहो।

07:39.243 --> 07:42.043
चलो। सीधे वसीम भाई के पास
लेके चलो। चलो। सीधे।

07:42.403 --> 07:43.483
[ड्राइवर 1]: जी, साहब।

07:45.043 --> 07:47.683
[बाबर]: दरअसल, दिल्ली जा रहा था
एक ज़रूरी काम से।

07:48.163 --> 07:51.003
सोचा तुम से मिल के
हालचाल लेता चलूँ।

07:52.203 --> 07:53.483
[वसीम]: वो क्या है ना, चचा जान,

07:54.043 --> 07:55.963
हम आप की फ़ितरत को
बहुत अच्छे से जानते हैं।

07:56.763 --> 07:58.083
सीधा मुद्दे की बात पर आइए।

08:00.243 --> 08:03.563
[बाबर]: ये जो तुम विजय सिंह के साथ
आँख मिचौली का खेल खेल रहे होना,

08:03.843 --> 08:04.913
उसे बंद कर दो।

08:04.923 --> 08:06.163
[वसीम]: मैंने आप से कहा ना,

08:07.323 --> 08:08.403
मुद्दे पर आइए।

08:08.683 --> 08:10.753
[बाबर]: तकलीफ़ तुम्हारे साथ यही है, वसीम

08:10.763 --> 08:12.563
कि तुम किसी की बात सुनते नहीं हो।

08:12.803 --> 08:15.123
अपने मन की करते हो
और हमेशा धोखा खाते हो।

08:15.363 --> 08:18.403
अरे, मैं तुम्हारा ख़ैरख़्वाह हूँ।
तुम्हारी फ़िक्र करता हूँ।

08:18.963 --> 08:20.403
इसीलिए तुम्हें मशवरा देता हूँ।

08:22.323 --> 08:23.283
[वसीम]: क्या बात है!

08:23.843 --> 08:25.243
चलिए, आप को देर हो रही होगी।

08:25.803 --> 08:26.683
ख़ुदा हाफ़िज़।

08:34.043 --> 08:36.683
देखो, यार, इन का कहीं
हवाई जहाज़ तो ना छूट जाए।

08:36.883 --> 08:40.003
[क़ादरी]: वसीम भाई! कुछ कीजिए, वसीम भाई।
कुछ कीजिए।

08:40.363 --> 08:42.723
बहुत ज़रूरी है। कुछ ना कुछ तो
करना ही पड़ेगा, वसीम भाई।

08:42.883 --> 08:45.163
[वसीम]: क्या हुआ?
[क़ादरी]: रामानंद पीछे पड़ गया है।

08:45.443 --> 08:46.593
[क़ादरी]: खलासी से लेके ड्राइवर तक...

08:46.603 --> 08:48.883
अरे, हमारे लौंडे से
हमें धमकी दिलवा रहा है।

08:49.443 --> 08:50.923
इस का साथ दें।
उस का साथ दें।

08:51.163 --> 08:53.283
हद... मतलब,
ज़िंदगी ह** हो गई है हमारी।

08:55.123 --> 08:56.363
[वसीम]: बिलकुल चिंता मत करो।

08:56.843 --> 08:58.243
वसीम ख़ान तुम्हारे साथ है।

08:59.083 --> 09:00.923
तुम्हारा परिवार और तुम सुरक्षित हो।

09:02.043 --> 09:03.363
देखते हैं सा** को।

09:10.283 --> 09:11.713
[दरोगा 2]: आज भारत जीत के रहेगी।
(क्रिकेट कमेंट्री चलने की आवाज़)

09:11.723 --> 09:13.433
[दरोगा 2]: बस 20 ही रन तो बचा है।
[कॉन्स्टेबल 2]: ये छक्का!

09:13.443 --> 09:15.163
[कॉन्स्टेबल 2]: अरे, गुरु! मज़ा आ गया।

09:15.843 --> 09:17.433
[दरोगा 2]: जीती तो शाम को पार्टी होगी।
[केशव]: जय हिंद, सर।

09:17.443 --> 09:19.193
[कॉन्स्टेबल 2]: बिलकुल, सर।
बिलकुल पार्टी होगी। [दरोगा 2]: हाँ! अरे!

09:19.203 --> 09:20.753
[दरोगा 2]: अरे, बंद करो इस को। बंद करो।

09:20.763 --> 09:23.313
देखो, कौन आया है।
केशव जी आए हैं।

09:23.323 --> 09:24.233
(सभी के हँसने की आवाज़)

09:24.243 --> 09:26.713
[कॉन्स्टेबल 2]: हम कह रहे हैं,
कहाँ से बड़ा पाँव की ख़ुशबू आ रही है।

09:26.723 --> 09:28.043
(सभी के हँसने की आवाज़)

09:29.083 --> 09:31.323
[दरोगा 2]: और केशव जी, क्या हाल है?

09:31.843 --> 09:34.963
बंबई वाले दरोगा के साथ
मज़ा आ रहा है काम करने का? हाँ?

09:35.123 --> 09:37.563
[केशव]: सब अच्छा है, सर।
बहुत मेहनत कर रहे हैं, सर।

09:38.003 --> 09:39.363
[दरोगा 2]: पता है, क्या कर रहे हैं वो?

09:39.683 --> 09:42.753
ख़ुद मदारी बन गए हैं
और तुम को जमूरा बना करके नचा रहे हैं, बस।

09:42.763 --> 09:44.923
(सभी के हँसने की आवाज़)

09:45.043 --> 09:47.323
[केशव]: सर, शौचालय हो करके आते हैं, सर।

09:47.803 --> 09:48.763
[दरोगा 2]: जाओ।

09:48.963 --> 09:52.363
और क्या किए हो
इस नौकरी में सिवाय हगने के? हाँ?

09:52.483 --> 09:54.123
(सभी के हँसने की आवाज़)

09:54.683 --> 09:55.723
[केशव]: आते हैं, सर।

09:56.603 --> 09:58.443
(सभी के हँसने की आवाज़)

09:59.323 --> 10:02.113
[कॉन्स्टेबल 3]: वसीम ख़ान अपने दुश्मन को
ज़िंदा नहीं छोड़ता,

10:02.123 --> 10:03.723
फिर छुन्नू सिंह को क्यों छोड़ेगा?

10:07.603 --> 10:09.873
[केशव]: उस देशद्रोही छुन्नू के बारे में
बात कर रहे हो क्या?

10:09.883 --> 10:11.643
[कॉन्स्टेबल 3]: इस धरती पर और छुन्नू है क्या?

10:12.563 --> 10:16.243
[केशव]: नहीं, पर वसीम ख़ान
थाने में छुन्नू को मारेगा कैसे?

10:16.403 --> 10:17.803
[कॉन्स्टेबल 3]: अरे, थाने में थोड़ी है।

10:18.123 --> 10:20.003
[केशव]: तो?
[कॉन्स्टेबल 3]: ये बात तुम किसी से कहना मत।

10:20.163 --> 10:21.283
[केशव]: अबे, हम क्यों कहेंगे?

10:21.483 --> 10:23.083
नहीं तो हम को कौन सा
इनाम मिल रहा है? बताओ।

10:23.683 --> 10:26.563
[कॉन्स्टेबल 3]: वो भूत वाली कोठरी है ना।
अरे, घाट के किनारे!

10:26.683 --> 10:27.523
[केशव]: हाँ।

10:27.643 --> 10:30.593
[कॉन्स्टेबल 3]: वहाँ पर छुन्नू सिंह की
ऐसी धुलाई हो रही है, ऐसी धुलाई हो रही है

10:30.603 --> 10:32.363
कि लग रहा है
कि वो अब धरती ही छोड़ देगा।

10:33.523 --> 10:35.683
[कॉन्स्टेबल 4]: अच्छा!
[केशव]: ख़ैर, छोड़ो।

10:36.163 --> 10:37.603
[केशव]: हम को क्या लेना-देना, भाई।

10:38.203 --> 10:39.843
हम आते हैं ज़रा पेशाब करके आते हैं।

10:40.403 --> 10:41.523
चाय-वाय पी लिए?

10:41.723 --> 10:42.683
[कॉन्स्टेबल 4]: हाँ, हाँ, पी लिए।

10:53.403 --> 10:55.883
(मोटरसाइकिल स्टार्ट करने की आवाज़)
(मोटरसाइकिल के चलने की आवाज़)

10:57.563 --> 11:01.283
(चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़)
(गाड़ी के रुकने की आवाज़)

11:01.843 --> 11:05.433
(गाड़ी का दरवाज़ा खोलने और बंद करने की आज)
(सनकी के दौड़ने की आवाज़)

11:05.443 --> 11:06.483
[सनकी]: अरे, यार!

11:09.763 --> 11:11.083
इसकी माँ का!

11:14.963 --> 11:16.163
कहाँ चली गई?

11:21.803 --> 11:23.473
[हिमांशु]: समय देख।
पता है, कहीं पहुँचना है।

11:23.483 --> 11:25.323
[केशव]: सर, ऐसी ख़बर लाया हूँ।
आप चौंक जाएंगे।

11:25.523 --> 11:26.593
[हिमांशु]: क्या ख़बर है? बता।

11:26.603 --> 11:29.923
सर, विजय सिंह के भाई छुन्नू को वसीम ख़ान
कहाँ छुपा के रखा है, पता चल गया है।

11:30.163 --> 11:31.683
उस को जान से मारने की योजना है, सर।

11:32.963 --> 11:33.923
[हिमांशु]: चल।

11:34.203 --> 11:35.083
[केशव]: कहाँ?

11:35.443 --> 11:36.603
[हिमांशु]: उस को बचाना पड़ेगा।

11:36.763 --> 11:38.313
[केशव]: सर, मतलब, सही में मरवाएँगे क्या?

11:38.323 --> 11:39.843
सर, ग़लती कर दिए
आप को बता कर।

11:39.963 --> 11:41.363
अपने केस पे ध्यान देते हैं ना, सर।

11:41.523 --> 11:42.793
उस को बचा कर
हमारे केस को क्या फ़ायदा होगा?

11:42.803 --> 11:44.163
[हिमांशु]: मैंने कहा ना,
उसे बचाना पड़ेगा। चल।

11:45.323 --> 11:46.603
चल, चल, चल, चल!

11:53.043 --> 11:55.473
[गुंडा 1]: अरे, विधायक जी। आइए, आइए। उतरिये।
[गुंडा 2]: चलिए, चलिए। चलिए, श्रीमान।

11:55.483 --> 11:57.523
[गुंडा 2]: चलो, विधायक जी। उतरिये सब के सब!
[गुंडा 1: आइए, आइए।

11:58.283 --> 11:59.603
[गुंडा 2]: लाइन में एकदम।

11:59.803 --> 12:01.683
[गुंडा 1]: अब आगे का रास्ता पैदल।

12:01.803 --> 12:03.043
[गुंडा 2]: बढ़ते रहिए।
[गुंडा 1]: चलिए।

12:03.243 --> 12:04.883
[गुंडा 1]: चलिए, बढ़ते रहिए।
[गुंडा 2]: अरे, चलिए, भाई।

12:05.563 --> 12:06.553
[गुंडा 1]: चलते रहिए।

12:06.563 --> 12:08.803
[क़ादरी]: अरे, अब्बास भाई,
कहाँ ले आए? हाँ?

12:08.923 --> 12:10.113
[क़ादरी]: हमारी बेग़म इंतज़ार कर रही होगी।
[अब्बास]: चलिए, चलिए।

12:10.123 --> 12:11.803
[क़ादरी]: सिनेमा दिखाने के लिए कहा था।

12:12.283 --> 12:13.953
सज के तैयार हुई है,
एकदम मीना कुमारी की तरह।

12:13.963 --> 12:16.483
मतलब, समझ रहे हैं आप?
नहीं पहुँचेंगे तो नाराज़ हो जाएगी।

12:17.403 --> 12:18.523
[अब्बास]: क़ादरी भाई, आप...

12:18.763 --> 12:20.963
कब तक बीवी के गले में
घंटी बन के आप बजते रहेंगे?

12:21.243 --> 12:24.763
अरे, कभी किसी के पैरों की घुँघरू
बन कर देखिए कितना मज़ा आता है। हाँ?

12:25.523 --> 12:27.963
और जो...
अपने ये जो विधायक हैं ना आप के,

12:28.123 --> 12:29.673
समझिए ये सब पिकनिक पे जा रहे हैं।

12:29.683 --> 12:32.123
और सब को अपनी-अपनी
मीना कुमारी मिलेगी। समझ में आया?

12:33.003 --> 12:35.363
और आप को अपनी
अनारकली मिलेगी। ठीक है ना?

12:35.843 --> 12:37.633
जब तक जी में आए,
तब तक रहिए। जाइए।

12:37.643 --> 12:39.683
कोई रोकने वाला नहीं है।
जाइए। चलो।

12:51.963 --> 12:53.713
[हिमांशु]: तू यहाँ से जा।
मैं पीछे से आता हूँ। चल।

12:53.723 --> 12:55.083
[केशव]: ठीक है, सर।
[हिमांशु]: जा, जा, जा।

13:16.003 --> 13:17.003
[केशव]: हिलना मत कोई!

13:17.203 --> 13:18.673
[केशव]: यूपी पुलिस से हैं! मार देंगे!
[कॉन्स्टेबल]: ए! ए!

13:18.683 --> 13:20.713
[हिमांशु]: ए! बंदूक नीचे कर! बंदूक नीचे कर!
[दरोगा 2]: ए! हम भी यूपी पुलिस से हैं, सा**!

13:20.723 --> 13:22.193
[केशव]: सा**, यू. पी. पुलिस से होशियारी!
[दरोगा]: नीचे! नीचे कर!

13:22.203 --> 13:24.873
[दरोगा 1]: हाँ? ए! बंदूक नीचे, भोस** के!
[केशव]: अबे, तमीज़ से बात कर सर से।

13:24.883 --> 13:25.993
[केशव]: एसीपी हैं मुंबई के!

13:26.003 --> 13:27.513
इन की सुरक्षा में हम हैं।
समझ गए ना?

13:27.523 --> 13:29.523
उन तक पहुँचने से पहले
इस दीवार से जाना पड़ेगा।

13:29.643 --> 13:31.403
सा** पुलिस की नौकरी करते हैं,
गाइड की नहीं!

13:32.603 --> 13:33.633
[दरोगा 2]: अबे, चुप बे!

13:33.643 --> 13:36.033
सा** खाता यू. पी. का है,
गाता बंबई का है, बे!

13:36.043 --> 13:38.873
[केशव]: अबे यूपी हो या बंबई!
बेटा, हम तो कानून की गा रहे हैं,

13:38.883 --> 13:41.033
लेकिन तुम लोग कानून की
बजा रहे हो! समझ गए ना?

13:41.043 --> 13:42.803
किस धारा के तहत
तूने इस को रखा बे?

13:43.083 --> 13:43.963
इसको छोड़

13:44.083 --> 13:45.913
या फिर थाने लेके जा
और गिरफ़्तारी दर्ज करा!

13:45.923 --> 13:47.723
[दरोगा 1]: सुन, सुन,
ये तू जो ज्ञान चो** रहा है ना,

13:47.883 --> 13:49.393
अब ये ज्ञान तेरे गाँ** में चो** हूँ!

13:49.403 --> 13:50.553
[दरोगा 1]: समझा?
[केशव]: और हम तुम को छोड़ देंगे?

13:50.563 --> 13:52.403
[दरोगा 1]: अबे तुम्हारी हिम्मत...
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

13:56.043 --> 13:58.243
[हिमांशु]: आज तक किसी वर्दी पहनने वाले पे
गोली नहीं चलाई है।

13:58.843 --> 13:59.963
मजबूर मत कर।

14:02.283 --> 14:03.363
दफ़ा होजा।

14:04.123 --> 14:05.403
[दरोगा 1]: चलो रे! चलो!

14:07.923 --> 14:08.833
[दरोगा 2]: हाँ! चलो, चलो।
[हिमांशु]: केशव।

14:08.843 --> 14:09.713
[केशव]: हाँ, साहब।
[दरोगा 2]: निकलो।

14:09.723 --> 14:10.923
[हिमांशु]: खोल इसे।
[केशव]: जी, सर।

14:14.283 --> 14:15.313
[छुन्नू]: छूना नहीं।
[केशव]: बड़बड़ाओ मत।

14:15.323 --> 14:16.233
[छुन्नू]: छूना नहीं, सा**।
(कराहते हुए)

14:16.243 --> 14:18.723
[केशव]: एक तो अपना जान जोखिम में
डाल के तुम को बचाए हैं।

14:19.323 --> 14:21.323
[छुन्नू]: तुम सब मिले हुए हो।
[हिमांशु]: छुन्नू, मेरी बात सुन।

14:23.403 --> 14:25.523
[हिमांशु]: विजय सिंह के साथ
मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है।

14:26.163 --> 14:28.203
मैं जो कुछ कर रहा हूँ,
कानून के दायरे में रहकर कर रहा हूँ।

14:28.683 --> 14:30.553
अगर विजय गुनहगार है,
तो उसे कानून के हवाले करूँगा।

14:30.563 --> 14:31.883
और अगर नहीं है,

14:32.443 --> 14:34.603
तो उसे बाइज़्ज़त बरी करवाऊँगा।
भरोसा रख।

14:35.163 --> 14:36.763
[छुन्नू]: तुम तो वही अफ़सर होना,

14:38.043 --> 14:40.563
जो विजय भैया को
गिरफ़्तार करने के लिए आए थे?

14:41.243 --> 14:42.243
[हिमांशु]: नहीं।

14:42.843 --> 14:46.363
सिर्फ़ मैं वो अफ़सर हूँ,
जो तेरे विजय भैया को बचा सकता हूँ,

14:48.363 --> 14:50.443
अगर तू मुझे पूरी कहानी बताए तो।

14:53.643 --> 14:56.483
(गाड़ी के रुकने की आवाज़)

14:56.683 --> 15:00.483
(गाड़ी का दरवाज़ा खोलने और बंद करने की आवाज़)
(क़दमों की आवाज़)

15:19.363 --> 15:23.563
(सीमा के रोने की आवाज़)

15:29.643 --> 15:30.763
[वसीम]: हूँ!

15:30.883 --> 15:32.363
ये है हमारी होनहार पुलिस!

15:33.723 --> 15:36.963
एक चू** टटपुंजिये को
पकड़ कर रख नहीं पाए! हाँ!

15:37.763 --> 15:41.403
[दरोगा जी]: सर, हमारे सिपाहियों ने
एसीपी हिमांशु को रोकने की कोशिश की,

15:42.443 --> 15:45.483
मगर बंदूक के दम पे
हिमांशु उसे छुड़ा ले गया।

15:46.163 --> 15:47.643
आप कहें तो
हम उसे फिर से उठा लें?

15:47.843 --> 15:50.363
[वसीम]: सही कह रहे हैं आप।
यही चू*** करते रहें।

15:50.963 --> 15:54.163
पहले पकड़िए, फिर छोड़ दें!
फिर पकड़ लें! है ना?

15:55.123 --> 15:57.723
[दरोगा जी]: माफ़ कीजिए, सर।
हम उस को पकड़ के ख़बर करते हैं।

16:01.683 --> 16:03.563
[वसीम]: भोस** के पकड़ेंगे! ब***द!

16:09.363 --> 16:10.323
[हिमांशु]: संभाल के।

16:11.843 --> 16:13.443
शुक्रिया, डॉक्टर।

16:16.323 --> 16:17.673
तुम मुझे ये बताओ
कि उस के बाद से

16:17.683 --> 16:20.283
चार साल तक विजय सिंह था कहाँ?

16:21.683 --> 16:22.923
[छुन्नू]: रामानंद राय के पास।

16:24.723 --> 16:28.403
उन्होंने ही भैया को
इधर-उधर छुपा के रखा था।

16:29.563 --> 16:32.443
[हिमांशु]: और इन चार सालों में विजय सिंह
ज़िंदा है, ये बात आप लोगों को पता भी नहीं थी?

16:33.963 --> 16:34.963
[छुन्नू]: नहीं।
(कराहते हुए)

16:36.003 --> 16:37.563
हम लोग तो मान चुके थे कि
(कराहते हुए)

16:38.443 --> 16:39.683
भैया इस दुनिया में नहीं हैं।
(कराहते हुए)

16:40.723 --> 16:42.723
लेकिन ये कुछ दिन पहले
(कराहते हुए)

16:43.283 --> 16:45.283
एसजे कांड में
भैया का नाम आया तो... (कराहते हुए)

16:46.523 --> 16:48.203
तब हम लोगों को मालूम चला कि
(कराहते हुए)

16:48.843 --> 16:49.803
भैया ज़िंदा हैं।
(कराहते हुए)

16:51.803 --> 16:52.883
[हिमांशु]: आओ।

16:54.163 --> 16:55.523
(मोटरसाइकिल स्टार्ट करने की आवाज़)

16:55.723 --> 16:56.763
[हिमांशु]: संभाल के।

16:57.163 --> 16:59.723
[हिमांशु]: संभाल के।
[छुन्नू]: मदद करने के लिए धन्यवाद।

17:00.083 --> 17:02.403
[हिमांशु]: संभाल के जाना।
केशव, संभाल के ले जाओ।

17:02.523 --> 17:03.363
[केशव]: जी, सर।

17:06.283 --> 17:07.363
[हिमांशु]: आराम से।

17:08.803 --> 17:09.713
चलो।

17:09.723 --> 17:13.603
(मोटरसाइकिल के चलने की आवाज़)

17:20.323 --> 17:22.923
(आनंद भरी कराह की आवाज़)
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

17:34.163 --> 17:36.243
[अब्बास]: सा** आते ही के साथ
सेट हो गए ये लोग।

17:37.283 --> 17:38.803
[अब्बास]: हाँ?
[गुंडा 6]: जी, भैया।

17:39.403 --> 17:40.603
[अब्बास]: अरे, नीच हैं एकदम!

17:41.963 --> 17:43.203
[गुंडा 6]: एकदम नीच हैं सब!

17:44.083 --> 17:45.203
[अब्बास]: हट, मा***द!

17:45.363 --> 17:48.043
लगे रहे। माँ चु** भीतर!
चल! मा***द!

17:51.283 --> 17:52.563
[रामानंद]: अच्छा?
[रामानंद का पीए]: जी, सर।

17:53.443 --> 17:55.603
[रामानंद का पीए]: और, मुद्दे की बात ये है, सर

17:55.803 --> 17:58.403
कि वसीम ख़ान के किसी भी
विधायक से मिला नहीं जा सकता।

17:59.243 --> 18:01.163
क्योंकि उस ने अपने सारे विधायकों को

18:01.363 --> 18:03.283
किसी रिसोर्ट में
नज़रबंद करवा दिया है।

18:10.243 --> 18:11.843
[रामानंद]: अब तो कुछ करना पड़ेगा।

18:24.523 --> 18:25.443
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

18:26.763 --> 18:27.763
[रोली]: छुन्नू भैया!

18:27.883 --> 18:29.433
[कट्टा]: छुन्नू! भैया, छुन्नू!

18:29.443 --> 18:30.523
[विजय]: छुन्नू!

18:33.923 --> 18:35.243
आराम से। आराम से।

18:37.643 --> 18:38.643
आराम से।

18:40.363 --> 18:41.323
छुन्नू!

18:43.163 --> 18:45.523
[सुधा]: छुन्नू! बाबू! क्या... क्या हुआ?

18:47.043 --> 18:48.563
[सुधा]: ये सब क्या हुआ?
[रोली]: हम पानी लेकर आते हैं।

18:50.163 --> 18:52.603
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

18:53.043 --> 18:54.283
[सुधा]: तुम ठीक तो हो, छुन्नू?

19:09.803 --> 19:11.643
[छुन्नू]: वो सा** वसीम ने
उठवाया था हमें। (कराहते हुए)

19:13.803 --> 19:15.603
जान से मारने की तैयारी में था।
(कराहते हुए)

19:17.803 --> 19:20.483
[विजय]: तुम यहाँ तक कैसे पहुँचे?
और ये मरहम-पट्टी?

19:20.603 --> 19:22.083
(छुन्नू के हाँफने और कराहने की आवाज़)

19:22.283 --> 19:24.003
[छुन्नू]: वो जो अफ़सर आया था ना बंबई से,
(कराहते हुए)

19:25.483 --> 19:26.923
उसी ने जान बचाई हमारी।
(कराहते हुए)

19:28.843 --> 19:30.443
यहाँ तक भी उसी ने छोड़ा है।
(कराहते हुए)

19:32.203 --> 19:33.203
[विजय]: वो हिमांशु पटनायक?

19:34.163 --> 19:35.923
[छुन्नू]: हाँ। वही।
(कराहते हुए)

19:36.323 --> 19:38.113
[विजय]: अच्छा तुम अभी आराम करो।
बाद में बात करते हैं। [सुधा]: चलो, हाथ दो।

19:38.123 --> 19:39.443
[विजय]: आराम से।
(छुन्नू के कराहने की आवाज़)

19:39.763 --> 19:41.723
[विजय]: आराम से। आराम से।
[कट्टा]: माँ... माता जी।

19:41.843 --> 19:43.603
[विजय]: ये वाला पैर दो।
[सुधा]: आराम से।

19:43.723 --> 19:44.843
[विजय]: हाँ।

19:45.283 --> 19:47.283
ये... आराम से।

19:50.323 --> 19:53.523
[रोली]: हमें लगता है आप को
हिमांशु से मिल लेना चाहिए।

19:55.243 --> 19:57.403
वो हमारी सच में
मदद करना चाहता है शायद।

20:01.323 --> 20:04.123
(क़दमों की आवाज़)

20:04.643 --> 20:06.283
[अनारकली]: सर, नाश्ते में कुछ लेंगे?

20:07.603 --> 20:10.603
[क़ादरी]: इतना नाश्ता कर-करके ना
हमारी सेहत ख़राब हो गई है।

20:10.923 --> 20:12.563
संतरा से नींबू हो गए हैं।

20:13.043 --> 20:14.203
कुछ नहीं लेंगे। जाओ।

20:17.083 --> 20:18.563
[विधायक 2]: ज़फ़र भाई, एक बात बताएँ?

20:19.243 --> 20:22.763
एकांत में जो लेने का मज़ा है,
उस का आनंद ही कुछ और है।

20:37.683 --> 20:38.763
(लैंडलाइन फ़ोन पर नंबर घुमाने की आवाज़)

20:38.963 --> 20:42.923
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

20:44.603 --> 20:45.473
[क़ादरी की बेग़म]: हेलो?

20:45.483 --> 20:49.323
[क़ादरी]: अरे, यार, तुम्हारी आवाज़ सुनने
और डाँट खाने के लिए एकदम तरस गए हैं।

20:49.643 --> 20:51.683
[क़ादरी की बेग़म]: अरे,
कहाँ हैं आप इतने दिनों से?

20:51.803 --> 20:52.953
किस जगह पे हैं?

20:52.963 --> 20:55.803
[क़ादरी]: ये सब नहीं बता सकते हैं।
पार्टी की ओर से मना किया गया है।

20:56.443 --> 20:58.283
ये बताओ।
पार्टी की ओर से कोई आया था?

20:58.403 --> 21:00.243
पैसे-वैसे की कोई बात कर रहा था?

21:00.363 --> 21:02.963
[क़ादरी की बेग़म]: नहीं। कोई नहीं आया था।
[क़ादरी]: अच्छा।

21:03.403 --> 21:05.353
[क़ादरी]: नहीं आया था, तो आएगा। हाँ।

21:05.363 --> 21:08.643
आएगा तो कह देना,
कम से कम एक करोड़ रुपया लेंगे।

21:09.483 --> 21:11.843
[क़ादरी की बेग़म]: ठीक है।
[क़ादरी]: ठीक है, बेग़म। रखते हैं।

21:12.043 --> 21:13.923
[क़ादरी की बेग़म]: ख़ुदा हाफ़िज़।
[क़ादरी]: अल्लाह हाफ़िज़।

21:22.483 --> 21:24.883
[केशव]: सर, हम लोग जा कहाँ रहे हैं, सर?
[हिमांशु]: अस्पताल।

21:25.043 --> 21:27.523
[केशव]: क्या हुआ? तबियत तो एकदम
टनाटन लग रहा है, सर, आप का।

21:27.643 --> 21:30.723
[हिमांशु]: हम उस अस्पताल जा रहे हैं,
जहाँ रामानंद राय ने विजय को रखा था।

21:31.083 --> 21:33.283
[केशव]: सर, आप को गड़े मुर्दे
उखाड़ना ख़ूब आता है, सर।

21:33.403 --> 21:34.803
वहाँ जाके क्या फ़ायदा?

21:35.283 --> 21:37.273
[हिमांशु]: केशव, जब तक अतीत को
साथ में लेके नहीं चलोगे ना,

21:37.283 --> 21:38.843
भविष्य का रास्ता भटक जाओगे।

21:39.723 --> 21:42.033
रामानंद के ख़िलाफ़ जितने सबूत मिलें,
उतना हमारे लिए अच्छा है।

21:42.043 --> 21:44.753
और उस अस्पताल में
रामानंद राय के कई ऐसे राज़ दफ़न हैं,

21:44.763 --> 21:46.243
जिन्हें सामने आना बहुत ज़रूरी है।

21:46.523 --> 21:48.163
अब चुप बैठ और अस्पताल चल।

21:53.203 --> 21:57.963
(गाड़ी के रुकने की आवाज़)

21:59.363 --> 22:00.563
[केशव]: हम बोले थे, सर।

22:01.003 --> 22:01.963
फँस गए, सर।

22:13.363 --> 22:14.443
[कट्टा]: हिमांशु पटनायक?

22:15.043 --> 22:17.163
[हिमांशु]: हाँ।
[कट्टा]: विजय सिंह से मिलना है ना आप को?

22:18.243 --> 22:19.283
[हिमांशु]: हाँ।

22:19.563 --> 22:20.563
आइए।

22:23.763 --> 22:24.963
[कट्टा]: जाने दो बाक़ी लोगों को।

22:25.563 --> 22:26.843
[हिमांशु]: केशव, तू रुक।
[केशव]: सर।

22:36.883 --> 22:37.883
[कट्टा]: गाड़ी में बैठिए।

22:47.963 --> 22:49.083
[हिमांशु]: तो कहाँ है विजय सिंह?

22:52.123 --> 22:53.163
[कट्टा]: आप के सामने।

22:56.243 --> 22:57.603
[हिमांशु]: तुम विजय सिंह नहीं हो।

22:58.523 --> 22:59.483
[कट्टा]: क्यों?

23:00.003 --> 23:01.683
आप ने विजय सिंह को देखा है क्या?

23:02.603 --> 23:04.363
[हिमांशु]: देखो, मैं जानता हूँ
कि तुम विजय सिंह के आदमी हो,

23:04.763 --> 23:06.483
लेकिन मैं तुम से
विजय सिंह समझ के बात करूँगा,

23:06.603 --> 23:09.363
ताकि जो मैं कह रहा हूँ,
तुम जब विजय सिंह को बताओ,

23:09.723 --> 23:11.883
तो उसे मेरी बातों की
गंभीरता समझ में आए।

23:12.723 --> 23:15.043
[कट्टा]: बोलिए।
क्यों मिलना चाहते हैं उस से?

23:16.763 --> 23:18.873
[हिमांशु]: रोली के माँ-बाप को
मरवाने वाला और कोई नहीं,

23:18.883 --> 23:23.473
बल्कि वही आदमी है, जिसे विजय सिंह
यानि तुम अपना अन्न दाता मानते हो।

23:23.483 --> 23:24.643
रामानंद राय!

23:26.443 --> 23:28.793
[कट्टा]: बकवास बात!
क्या सबूत है?

23:28.803 --> 23:31.763
[हिमांशु]: सबूत तो तुम्हारे ज़िंदा होने
का भी नहीं है, लेकिन तुम ज़िंदा होना।

23:32.923 --> 23:34.603
चाहो तो अपने लड़कों से
पता लगवा सकते हो।

23:35.323 --> 23:36.803
और अगर पता नहीं लगा सकते,

23:36.923 --> 23:39.243
तो सदानंद का मुँह खुलवाना
तुम्हारे लिए कोई बड़ी बात तो है नहीं।

23:40.003 --> 23:41.403
ज़रा ठंडे दिमाग़ से सोचो

23:41.843 --> 23:43.323
कि एसजे कांड के बाद

23:43.443 --> 23:44.963
विजय सिंह का नाम
बाहर कैसे आया?

23:47.003 --> 23:48.683
[कट्टा]: हमारा नाम बाहर निकलवा के

23:49.283 --> 23:50.953
रामानंद का क्या फ़ायदा हो सकता है?

23:50.963 --> 23:52.363
[हिमांशु]: उस का तो फ़ायदा ही फ़ायदा है।

23:53.043 --> 23:56.123
रामानंद राय विजय सिंह को
वसीम ख़ान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रहा है।

23:56.443 --> 23:57.993
ताकि वसीम ख़ान
विजय सिंह में उलझा रहे

23:58.003 --> 24:00.243
और मुख्यमंत्री बनने का
उसका रास्ता साफ़ हो जाए।

24:00.363 --> 24:02.673
और जिस दिन रामानंद राय
मुख्यमंत्री बन गया,

24:02.683 --> 24:04.643
उस दिन से विजय सिंह की
उलटी गिनती शुरू।

24:08.403 --> 24:10.843
ये पूरी पटकथा रामानंद राय
चार साल से लिख रहा है।

24:11.443 --> 24:13.393
[कट्टा]: लेकिन आप कौन सी
पटकथा लिखना चाहते हैं?

24:13.403 --> 24:15.203
[हिमांशु]: मैं कोई पटकथा नहीं लिख रहा हूँ।

24:15.523 --> 24:17.323
मैं सिर्फ़ विजय सिंह की
मदद करना चाहता हूँ।

24:18.043 --> 24:21.363
क्योंकि अगर ज़्यादा देर हो गई,
तो विजय सिंह का एनकाउंटर पक्का।

24:22.523 --> 24:25.633
फिर चाहे गोली किसी और प्रदेश की पुलिस चलाए
या इस प्रदेश की, क्या फ़र्क पड़ता है?

24:25.643 --> 24:27.043
मौत तो विजय सिंह की होगी।

24:29.803 --> 24:33.683
देखो, तुम जब भी विजय सिंह से मिलो,
उसे एक बात समझा देना

24:34.723 --> 24:36.523
कि हिमांशु पटनायक
उस का दुश्मन नहीं है।

24:37.403 --> 24:40.323
मैं कानूनी तौर से उस की मदद
करना चाहता हूँ और मदद करूँगा,

24:40.883 --> 24:42.003
चाहे जो हो जाए।

24:45.643 --> 24:50.843
(गाड़ियों के चलने की आवाज़)

24:56.563 --> 24:57.523
[हिमांशु]: ओ, केशव।

24:58.123 --> 25:00.243
चाय ठंडी हो रही है तुम्हारी।
ध्यान कहाँ है?

25:01.043 --> 25:03.883
[केशव]: अरे, सर, क्या बताएँ आप को?
गर्म तो हम उसी दिन हो गए थे।

25:04.283 --> 25:06.083
थाने में सब आप का
मज़ाक बना रहे थे।

25:06.363 --> 25:07.763
हमें बिलकुल पसंद नहीं आया, सर।

25:08.443 --> 25:10.443
[हिमांशु]: चलो, आओ। आओ, आओ।

25:10.843 --> 25:11.953
बताओ। क्यों पसंद नहीं आया?

25:11.963 --> 25:14.163
[केशव]: अरे, सर, आप इतनी ईमानदारी से
अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।

25:14.483 --> 25:16.003
मतलब,
कितना कुछ सीखे हैं हम आप से।

25:16.563 --> 25:18.593
सही कहें ना, सर,
तो ड्यूटी किस चिड़िया का नाम है,

25:18.603 --> 25:20.083
आप के साथ रह के ही हम ने जाना है।

25:20.883 --> 25:24.003
इस से पहले, सर, हम ख़ाली फाँकी मारते थे।
मतलब, ईमानदारी से बताएँ तो।

25:24.563 --> 25:27.643
[हिमांशु]: केशव, हमारे देश में वर्दी पहनने का
मौक़ा बहुत कम लोगों को मिलता है।

25:28.243 --> 25:30.883
लेकिन अफ़सोस की बात है
कि इस वर्दी के साथ जो ईमानदारी आती है ना,

25:31.443 --> 25:33.043
कुछ लोगों में
बहुत जल्दी ख़त्म हो जाती है।

25:33.843 --> 25:35.723
इसलिए तो हमारे देश में
दो किस्म की पुलिस है।

25:36.123 --> 25:39.123
एक वो,
जिन्हें सिर्फ़ अपनी जेब दिखती है।

25:39.363 --> 25:41.403
और दूसरी वो,
जिन्हें सिर्फ़ जनता की सुरक्षा।

25:41.883 --> 25:44.643
तो फ़ैसला तुम्हें करना है
कि तुम्हें किस किस्म का पुलिस वाला बनना है।

25:45.243 --> 25:47.753
[केशव]: सर, हम ईमानदारी से
ड्यूटी करना चाहते हैं। बस।

25:47.763 --> 25:50.203
[हिमांशु]: बस, तो फिर वही करो।
[केशव]: जी।

25:50.683 --> 25:52.363
[केशव]: सर, आगे का क्या प्लान है?
आदेश दीजिए, सर।

25:52.483 --> 25:53.803
[हिमांशु]: आओ, बताता हूँ।

26:04.683 --> 26:09.923
(लैंडलाइन फ़ोन पर नंबर घुमाने की आवाज़)

26:12.843 --> 26:13.683
[हिमांशु]: सर।

26:14.003 --> 26:16.083
मुझे विजय सिंह का एनकाउंटर करने का
आधिकारिक आदेश चाहिए।

26:17.363 --> 26:19.043
[अशोक]: हिमांशु,
तुम्हें मुझे कुछ समय देना होगा।

26:21.043 --> 26:22.123
मैं वापस कॉल करता हूँ।

26:22.523 --> 26:25.003
[हिमांशु]: ठीक है, सर।
मैं इंतज़ार करूँगा। शुक्रिया।

26:27.003 --> 26:30.043
[केशव]: सर, ये क्या बात कर रहे थे,
विजय सिंह का एनकाउंटर?

26:30.883 --> 26:34.523
सर, हम को तो लगा था कि विजय सिंह के प्रति
आप के मन में थोड़ी सी सहानुभूति आ गई है।

26:35.083 --> 26:37.483
इसलिए आप ने छुन्नू की जान बचाई,
अब उस की जान बचाएंगे।

26:37.683 --> 26:39.193
लेकिन सर,
आप ने तो हमें दहला दिया।

26:39.203 --> 26:40.723
[हिमांशु]: मुझ से बहुत कुछ सीखे हो ना, केशव?

26:41.283 --> 26:43.123
तो ये भी सीख लो
कि पुलिस ऐसे ही काम करती है।

26:44.123 --> 26:45.033
और वक़्त...

26:45.043 --> 26:48.403
वक़्त हर सवाल का जवाब दे देता है,
लेकिन सही वक़्त आने पर।

26:52.483 --> 26:54.043
[सदानंद]: आजा! आराम से, भैया।

26:54.243 --> 26:55.563
ए! हट!

26:56.683 --> 26:57.723
ए!

26:58.083 --> 26:59.043
[कट्टा]: चाचा जी।

27:00.883 --> 27:01.883
प्रणाम।

27:18.363 --> 27:19.323
चल, सा**!
(थप्पड़ मारने की आवाज़)

27:20.403 --> 27:22.243
[कट्टा]: क्या? क्या? हूँ?
[सदानंद]: नहीं, भैया!

27:22.723 --> 27:24.363
[कट्टा]: हट भो** के!

27:25.603 --> 27:26.883
[कट्टा]: हट!
[सदानंद]: अरे, बाप!

27:29.003 --> 27:31.283
[सदानंद]: नहीं! भाई, क्यों मार रहे हो?
[विजय]: कैसे हो, चाचा?

27:31.723 --> 27:33.123
[सदानंद]: अरे!

27:33.683 --> 27:35.043
तुम कौन भतीजे हो, भाई?

27:36.803 --> 27:37.963
[विजय]: भतीजे नहीं हैं हम।

27:40.763 --> 27:41.963
दामाद हैं।

27:50.363 --> 27:51.963
[सदानंद]: विजय... विजय सिंह?

27:53.723 --> 27:54.763
कैसे हो, बेटा?

27:56.563 --> 27:57.923
[विजय]: सवाल आप नहीं पूछेंगे।

27:58.523 --> 27:59.603
हम पूछेंगे।

28:00.443 --> 28:01.803
और जवाब आप देंगे।

28:02.683 --> 28:03.763
बताइए फिर।

28:05.603 --> 28:07.083
रोली के माँ-बाप को

28:08.603 --> 28:09.843
किस ने मारा?

28:17.123 --> 28:19.003
[सदानंद]: रामानंद भैया ने ही
(रोते हुए)

28:20.003 --> 28:21.603
ब्रह्मानंद भैया
(रोते हुए)

28:22.083 --> 28:23.993
और भाभी को मरवाया है!
(रोते हुए)

28:24.003 --> 28:25.283
(सदानंद के रोने की आवाज़)

28:26.683 --> 28:28.483
[सदानंद]: हम बहुत कोशिश किए।
(रोते हुए)

28:30.443 --> 28:32.603
ये राजनीती क्या-क्या नहीं करवाती है।
(रोते हुए)

28:34.483 --> 28:36.723
ये भाई से भाई की हत्या करवाती है
(रोते हुए)

28:36.843 --> 28:38.963
और एक भाई को गोबर फिंकवाती है!
(रोते हुए)

28:39.963 --> 28:41.923
[विजय]: ब्रह्मानंद जी रामानंद जी के भाई थे,

28:43.003 --> 28:44.203
फिर आप के भी हुए ना।

28:49.923 --> 28:51.443
फिर आप ने क्यों नहीं बताया रोली को?

28:52.283 --> 28:53.723
[सदानंद]: मरने के डर से।
(रोते हुए)

28:55.603 --> 28:57.643
रामानंद भैया ने हम को कहा था
(रोते हुए)

28:57.923 --> 29:00.003
कि ज़िंदा रहना है,
तो मुँह पे ताला लगा दो, (रोते हुए)

29:00.123 --> 29:02.203
तो हम मुँह पे ताला लगा लिए।
चुप हो गए। (रोते हुए)

29:02.843 --> 29:03.713
क्या करते?
(रोते हुए)

29:03.723 --> 29:05.163
(रोली के रोने की आवाज़)

29:07.123 --> 29:08.643
[सदानंद]: और एक बात बोलें?

29:11.323 --> 29:14.603
बेचन चाचा को भी
रामानंद भैया ही ने मरवाया है।

29:15.523 --> 29:17.243
वसीम ख़ान से मिल के।

29:24.043 --> 29:24.963
[विजय]: क्या!

29:26.483 --> 29:27.643
क्या बोला आप ने?

29:28.243 --> 29:29.923
[सदानंद]: हम सच कह रहे हैं।

29:30.163 --> 29:32.963
दोनों के बीच में
बहुत गहरी साँठ-गाँठ है।

29:34.763 --> 29:37.803
बहुत गहरी साँठ है,
गाँठ है इन दोनों के बीच में।

29:41.443 --> 29:45.963
रामानंद भैया के लिए
तुम एक शतरंज के प्यादे हो, बस।

29:48.083 --> 29:51.483
जब तक उन का काम ख़त्म नहीं हुआ,
तब तक तुम ज़िंदा हो।

29:52.483 --> 29:54.563
वो अपनी गद्दी के लिए

29:55.603 --> 29:57.443
किसी का भी ख़ून बहा सकते हैं।

29:58.123 --> 29:59.763
एक बार वो सीएम बन जाएँ, बस।

30:00.443 --> 30:01.443
देख लेना।

30:06.003 --> 30:14.003
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
