WEBVTT

00:18.883 --> 00:21.323
(बादलों के गरजने और बारिश की आवाज़)
(चाकू पर धार लगाने वाली मशीन की आवाज़)

00:26.403 --> 00:27.963
[छुन्नू]: भैया, ये तो तार की फैक्ट्री है।

00:31.763 --> 00:34.163
[विजय]: असली खेल अंदर है।
[कट्टा]: हूँ।

00:35.443 --> 00:37.643
(बादलों के गरजने और बारिश की आवाज़)
(चाकू पर धार लगाने वाली मशीन की आवाज़)

01:01.603 --> 01:02.883
(मुक्का मारने की आवाज़)
(गुंडे के कराहने की आवाज़)

01:19.323 --> 01:21.603
[वसीम का भाई]: ये पचास तेरा, ये पचास मेरा।

01:21.843 --> 01:22.963
हिसाब बराबर!

01:23.523 --> 01:26.963
[बिलाल]: तू मेरी चिंता मत कर,
ख़ानदान के चिराग़!

01:27.083 --> 01:28.473
[वसीम का भाई]: अपने काम से मतलब रख। समझा?

01:28.483 --> 01:30.963
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)
[छुन्नू]: अरे, मा****!

01:31.403 --> 01:33.123
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गुंडे के कराहने की आवाज़)

01:33.923 --> 01:36.643
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गुंडे के कराहने की आवाज़)

01:37.963 --> 01:39.363
[बिलाल]: मा****!

01:39.803 --> 01:40.643
[कट्टा]: सा**!

01:40.923 --> 01:42.123
[छुन्नू]: अबे तेरी!
[बिलाल]: ब****!

01:57.843 --> 01:59.803
[छुन्नू]: खोपड़ी खोल देंगे, ब****!
[कट्टा]: हट!

01:59.923 --> 02:01.073
[बिलासल]: अरे, तेरी...
[छुन्नू]: हट!

02:01.083 --> 02:02.163
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गुंडे के कराहने की आवाज़)

02:02.283 --> 02:03.683
[बिलाल]: ह**!
[छुन्नू]: हट!

02:06.283 --> 02:07.363
[बिलाल]: आ, तेरी माँ...

02:12.363 --> 02:13.923
[विजय]: हट!
(खाली बंदूक का ट्रिगर दबाने की आवाज़)

02:14.603 --> 02:15.443
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

02:15.923 --> 02:16.833
[बिल्ला]: हट!

02:16.843 --> 02:23.763
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

02:42.003 --> 02:43.003
[विजय]: कट्टा,

02:44.603 --> 02:45.563
माचिस।

02:48.363 --> 02:49.523
(माचिस की तिली जलाने की आवाज़)

03:00.483 --> 03:08.443
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(नोटों के जलने की आवाज़)

03:21.683 --> 03:24.843
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

03:49.403 --> 03:51.283
[वसीम]: पीछे से घुसा था, गाँ**।

03:51.723 --> 03:53.483
आदत रही है जैसे उसकी हमेशा से।

03:53.643 --> 03:55.363
[वसीम]: ह**!
[कॉन्स्टेबल]: सर! जय हिंद, सर। जय हिंद, सर।

03:55.483 --> 03:57.123
[बिलाल]: हमने भी बहुत पेला, भाई।

03:57.283 --> 03:58.123
[कॉन्स्टेबल 2]: सर!

04:09.003 --> 04:11.643
सर, जले हुए कागज़
नए नोट जैसे लग रहे हैं।

04:12.523 --> 04:13.843
और सर, आप चिंता मत करें।

04:14.523 --> 04:17.003
बस, बोल दीजिएगा
कि कुछ पुरानी फ़ाइलें थी

04:17.163 --> 04:19.323
और कुछ कॉपी-किताब।

04:22.403 --> 04:24.803
[वसीम]: रिपोर्ट दर्ज नहीं होनी चाहिए।
[कॉन्स्टेबल 2]: जी, सर।

04:28.323 --> 04:32.123
[उद्घोषक 1]: सम्मान गार्ड, सावधान!

04:33.363 --> 04:38.403
सम्मान गार्ड, राष्ट्रीय सलामी!

04:38.523 --> 04:40.403
सलामी शस्त्र!

04:46.723 --> 04:50.603
(महंतों के प्रार्थना करने की आवाज़)

04:56.963 --> 04:58.163
[महंत जी]: अग्नि कौन देगा?

04:59.043 --> 05:02.803
[सरस्वती]: महंत जी, इनकी कोई
अपनी संतान तो थी नहीं।

05:04.243 --> 05:07.243
लेकिन ये मानते थे
कि पूरी जनता इनकी अपनी है

05:09.003 --> 05:10.843
और जनता के प्रतिनिधि बनकर

05:12.403 --> 05:13.723
हम इन्हें अग्नि देंगे।

05:14.163 --> 05:15.283
[रामानंद]: नहीं।

05:18.243 --> 05:21.043
बंसीराम जी हमारे लिए पिता समान थे,

05:22.123 --> 05:23.483
अग्नि हम देंगे।

05:29.723 --> 05:31.043
[सरस्वती]: रामानंद जी, रुकिए।

05:35.603 --> 05:37.883
यहाँ जनता, मीडिया, सब उपस्थित हैं।

05:39.643 --> 05:41.363
अगर यहाँ कोई विवाद हुआ,

05:41.963 --> 05:44.283
तो पार्टी की अंदरूनी लड़ाई
सामने आ जाएगी।

05:45.083 --> 05:46.763
विपक्ष को मौक़ा मिल जाएगा।

05:48.883 --> 05:50.163
ये विरोध का नहीं,

05:50.963 --> 05:52.643
संगठित रहने का समय है।

05:53.603 --> 05:54.603
दीजिए।

06:04.203 --> 06:07.683
[उद्घोषक 1]: सम्मान गार्ड,

06:08.243 --> 06:10.363
कंधे शस्त्र!
(बंदूकें लोड करने की आवाज़)

06:13.563 --> 06:15.683
(बंदूकों से हवा में गोलियाँ चलाने की आवाज़)

06:20.123 --> 06:23.643
[न्यूज़ एंकर]: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
बंसीराम जी की मृत्यु के बाद

06:23.843 --> 06:26.603
मुख्यमंत्री का पद अब ख़ाली हो चुका है।

06:27.003 --> 06:28.923
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार

06:29.043 --> 06:32.243
मुख्यमंत्री बनने की रेस में
तीन नाम सामने आए हैं।

06:32.403 --> 06:35.723
रामानंद राय, सरस्वती देवी
और वसीम ख़ान।

06:35.923 --> 06:37.203
इनमें रामानंद राय का नाम

06:37.323 --> 06:40.563
मुख्यमंत्री बनने की रेस में
सब से आगे चल रहा है।

06:40.803 --> 06:43.163
फ़िलहाल राज्य में
राज्यपाल शासन लागू हो चुका है।

06:43.283 --> 06:44.563
[हिमांशु]: केशव।
[केशव]: जी, सर।

06:44.683 --> 06:47.923
[हिमांशु]: पता है, क्रिकेट और राजनीति में
एक चीज़ बहुत समान है।

06:48.523 --> 06:50.803
जैसे क्रिकेट में आख़िरी गेंद में
मैच पलट जाता है,

06:51.283 --> 06:54.683
वैसे ही राजनीति में आख़िरी मिनट में
राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

06:56.363 --> 06:58.843
ख़ैर, वो सब छोड़। ये बता
कि वसीम ख़ान की जिस फैक्ट्री में आग लगी थी,

06:58.963 --> 07:00.523
वो फैक्ट्री थी किस चीज़ की?

07:00.883 --> 07:02.563
[केशव]: सर, वहाँ नकली नोट छापते थे।

07:02.723 --> 07:04.843
मगर गृहमंत्री के ख़िलाफ़ कौन जाएगा?

07:05.563 --> 07:07.203
पुलिस वाले ने मामले की
लीपा-पोती कर दी,

07:07.323 --> 07:09.083
ये बोल कर
कि कॉपी-किताब की फैक्ट्री थी।

07:09.203 --> 07:11.523
और सर, जो रिकॉर्ड में होता है,
वही सच माना जाता है।

07:12.083 --> 07:14.443
[हिमांशु]: क्योंकि केशव, रिकॉर्ड
आम आदमी के लिए होते हैं,

07:14.563 --> 07:15.763
पुलिस वालों के लिए नहीं।

07:16.643 --> 07:18.523
और इस वक़्त मेरे दिमाग़ में
कुछ और चल रहा है।

07:19.483 --> 07:22.083
ये बड़े बाबू अपने पेट में
बहुत बड़ा राज़ दबाए बैठे हैं।

07:22.843 --> 07:24.243
और अगर ये राज़ उगल दें ना,

07:24.723 --> 07:27.923
तो रामानंद राय की सच्चाई
और रोली के माता-पिता की मौत,

07:28.243 --> 07:29.803
इन दोनों पर से
पर्दाफ़ाश हो जाएगा।

07:29.923 --> 07:32.603
[केशव]: तो फिर चलते हैं ना, सर।
कोशिश करने में क्या कंजूसी?

07:36.003 --> 07:37.353
[हिमांशु]: बड़े बाबू!

07:37.363 --> 07:40.163
(रेलगाड़ी के हॉर्न बजने की आवाज़)

07:44.203 --> 07:45.323
[केशव]: सर, सर, सर।

07:46.203 --> 07:48.003
[केशव]: वही है, सर। वही है। सर, वही है।
[हिमांशु]: श!

07:48.683 --> 07:49.803
[हिमांशु]: मैंने कहा था ना।

07:50.523 --> 07:52.163
ये बड़े बाबू को जानता है।

07:54.083 --> 07:55.643
चल। आजा।

08:00.843 --> 08:02.723
[छोटे बाबू]: एक पुलिस वाला आया है बंबई से।

08:02.923 --> 08:07.003
विजय सिंह और रामानंद, सब के फ़ाइलों की
जाँच-पड़ताल कर रहा है ठेके की।

08:07.523 --> 08:09.883
और ब्रह्मानंद की
मौत के बारे में भी पूछ रहा है।

08:10.283 --> 08:12.043
हम से आप के बारे में पूछ रहा था।

08:12.163 --> 08:14.003
हम बोल दिए,
अब इस दुनिए में हैं नहीं।

08:14.643 --> 08:16.203
थोड़ा सावधान रहिएगा।

08:16.443 --> 08:18.403
[हिमांशु]: और तुम भी
सावधानी से झूठ बोला करो।

08:20.123 --> 08:21.683
दो दिन लगा दिए
इन तक पहुँचने के लिए।

08:22.963 --> 08:24.283
बड़े बाबू, नमस्कार!

08:25.483 --> 08:27.403
एसीपी हिमांशु पटनायक,
बॉम्बे पुलिस।

08:28.643 --> 08:30.043
घर में और भी लोग होंगे ना?

08:31.683 --> 08:33.843
आइए बाहर।
विस्तार से बात करनी है।

08:36.443 --> 08:38.923
[दीनानाथ]: रामानंद और बंसीराम
एक पुल बनवाए रहे।

08:39.243 --> 08:40.323
वो पुल गिर गया

08:41.323 --> 08:45.523
और उसकी जाँच की ज़िम्मेदारी
रामानंद के भाई ब्रह्मानंद को दी गई।

08:45.763 --> 08:48.523
वो पूरी ईमानदारी से जो है,
जाँच में लग गए।

08:48.763 --> 08:51.043
जाँच इन लोगों के ख़िलाफ़ जा रहा था।

08:51.283 --> 08:53.003
इसी बीच घर में डकैती पड़ी

08:53.123 --> 08:55.963
और ब्रह्मानंद और उनकी पत्नी की
हत्या हो गई।

08:56.723 --> 08:58.283
अब आप ख़ुद ही सोचिए, साहब।

08:58.403 --> 09:00.443
इस सब के पीछे
किस का हाथ हो सकता है?

09:02.283 --> 09:04.363
[हिमांशु]: और रामानंद
और बंसीराम के ख़िलाफ़

09:04.683 --> 09:06.283
सबूत और ख़बरें कहाँ से आ रही थी?

09:06.683 --> 09:08.323
[दीनानाथ]: वसीम ख़ान के ज़रिए, साहब।

09:09.083 --> 09:13.163
वो चाहता रहा कि रामानंद और बंसीराम,
दोनों इस मामले में पकड़े जाएँ।

09:13.563 --> 09:15.923
लेकिन इसी बीच
ब्रह्मानंद की हत्या हो गई

09:16.083 --> 09:17.963
और सारा मामला फ़ाइलों में दब गया।

09:18.523 --> 09:21.083
जान का जोख़िम लेकर
आप को सब कुछ बता दिए हम।

09:22.163 --> 09:23.203
[हिमांशु]: फ़िक्र मत करो।

09:24.723 --> 09:26.083
तुम्हें कुछ नहीं होगा।

10:22.243 --> 10:24.163
[रामानंद]: जैसे आप को ज्ञात होगा कि आज...
(रोते हुए)

10:25.243 --> 10:27.883
आज हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री,
(रोते हुए)

10:28.843 --> 10:33.403
इस प्रदेश की जनता के
अभिभावक स्वरूप श्री बंसीराम जी (रोते हुए)

10:34.563 --> 10:35.843
(कैमरों के क्लिक की आवाज़)

10:36.003 --> 10:37.043
[रामानंद]: नहीं...
(रोते हुए)

10:45.483 --> 10:47.523
भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
(रोते हुए)

10:48.163 --> 10:49.563
उनके जाने से हम...
(रोते हुए)

10:50.083 --> 10:53.443
हमारी ज़िंदगी में दुख भर गया है।
(रोते हुए)

10:54.523 --> 10:59.763
और हमारे राज्य में
राज्यपाल शासन घोषित हुआ है। (रोते हुए)

11:02.003 --> 11:04.803
अब कुछ ही दिनों में जनशक्ति समाज
पार्टी के विधायक दल की (रोते हुए)

11:05.163 --> 11:06.243
बैठक होगी
(रोते हुए)

11:06.723 --> 11:09.603
और विधायक नए नेतृत्व का चयन करेंगे।
(रोते हुए)

11:09.723 --> 11:12.323
[रिपोर्टर]: लेकिन रामानंद जी,
एक सवाल है आप से।

11:12.483 --> 11:16.043
हमने सुना है कि पूर्वांचल के
ख़तरनाक गुंडे विजय सिंह,

11:17.003 --> 11:19.763
जिस ने बॉम्बे में
एसजे हॉस्पिटल में कांड कराया,

11:20.123 --> 11:21.803
उसे आप का संरक्षण प्राप्त है?

11:22.083 --> 11:24.683
[रामानंद]: संरक्षण उसे दिया जा सकता है,
जो जीवित हो।

11:26.003 --> 11:27.883
ये तो आप ही लोगों ने छापा है ना कि

11:28.003 --> 11:30.083
विजय सिंह मारा जा चुका है।

11:30.523 --> 11:33.083
तो ऐसे शख़्स का हम संरक्षण क्या करेंगे?

11:33.283 --> 11:36.883
[रिपोर्टर 2]: रामानंद जी, मान लीजिए।
अगर विजय सिंह ज़िंदा हुआ,

11:37.003 --> 11:39.763
तो क्या आप प्रशासन की
मदद करेंगे उसे पकड़वाने में?

11:39.883 --> 11:41.923
[रामानंद]: देखिए, हम लोग बिलकुल साफ़ हैं।

11:42.483 --> 11:45.163
और अगर विजय सिंह जीवित है,
जैसे आप ने कहा,

11:45.923 --> 11:48.403
तो उन्हें न्याय का मान रखकर

11:48.923 --> 11:50.763
आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।

11:51.003 --> 11:52.803
[रिपोर्टर 3]: रामानंद जी,
कहा तो ऐसा भी जा रहा है

11:52.923 --> 11:55.963
[रिपोर्टर 3]: कि आप की भतीजी रोली की शादी
विजय सिंह के साथ हुई है। [रामानंद]: अरे!

11:56.083 --> 11:57.553
[रामानंद]: अरे, क्या बात बोल रहे हो, भाई?
[रिपोर्टर 3]: और उन्हें लोगों ने

11:57.563 --> 11:59.243
[रिपोर्टर 3]: विजय सिंह के घर के पास देखा है।

11:59.363 --> 12:01.243
सर, इस के बारे में
आप का क्या कहना है?

12:01.443 --> 12:05.083
[रामानंद]: देखिए, रोली और विजय सिंह
एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।

12:05.523 --> 12:06.603
मित्र थे।

12:06.723 --> 12:09.283
पर ये शादी-वादी की
ऊलजलूल बातें ना करें आप।

12:09.603 --> 12:12.923
[रामानंद]: और आप अब मुझे इजाज़त देंगे।
[रिपोर्टर 3]: सर, सर!

12:13.043 --> 12:14.683
[ठाकुर]: चलिए, फिर कभी बात कीजिएगा।
[रिपोर्टर 3]: सर।

12:14.843 --> 12:16.323
[ठाकुर]: हमारी बात...
[रिपोर्टर 2]: सर, सुनिए तो।

12:18.443 --> 12:19.803
[सदानंद]: सलाम, चाचा।
[चाचा]: सलाम।

12:20.243 --> 12:22.723
[सदानंद]: कोई ऐसा इत्र दिखाइए
कि लगाया और मोहल्ला महक उठे।

12:22.963 --> 12:24.123
[चाचा]: बिलकुल दिखाते हैं।

12:24.683 --> 12:27.083
ये देखिए।
जन्नत-उल-वकी, जन्नत-उल-फिरदौस,

12:27.203 --> 12:29.603
रूह गुलाब, रूह खस, मीठी इत्र।

12:29.803 --> 12:30.723
कौन सा दूँ?

12:31.403 --> 12:34.003
[सदानंद]: आप से इत्र पूछा था,
आप तो कलमा पढ़ने लग गए।

12:34.363 --> 12:36.723
[चाचा]: लगता है,
पहली बार इत्र लगाने आए हो।

12:36.963 --> 12:39.043
ये अब इत्र के ही नाम हैं,
बाबू साहब।

12:39.643 --> 12:44.043
[सदानंद]: अरे! हमें कोई ऐसा इत्र बताइए,
जिस से ये गोबर का दुर्गंध हट सके।

12:44.163 --> 12:45.403
[चाचा]: पगला गए हो क्या?

12:45.523 --> 12:48.243
ये इत्र की दुकान है,
फ़िनाइल की नहीं।

12:49.283 --> 12:50.763
[सदानंद]: अच्छा! ठीक है, कोई भी
एक दे दीजिए। चलिए।

12:50.883 --> 12:52.843
[चाचा]: अच्छा! तो फिर फिरदौस दूँ?

12:53.003 --> 12:54.523
[सदानंद]: हाँ, जी।
[चाचा]: हाँ, लीजिए।

12:56.243 --> 12:57.403
[चाचा]: ढाई रुपए! ढाई रुपए!

12:57.923 --> 12:59.163
[सदानंद]: तीन रुपए हैं, रख लीजिए।

12:59.363 --> 13:00.603
[चाचा]: अच्छा!

13:05.643 --> 13:07.003
[सरस्वती]: अरे! आइए, आइए, सदानंद जी।

13:08.843 --> 13:10.083
बैठिए।

13:12.963 --> 13:14.043
क्या बात है?

13:14.603 --> 13:16.403
बदबू की जगह
ख़ुशबू आ रही है आज तो।

13:16.523 --> 13:17.603
(सदानंद और सरस्वती के हँसने की आवाज़)

13:19.883 --> 13:22.363
[सरस्वती]: कपड़ों की तरह
कभी ज़िंदगी महकाने की भी सोचो।

13:22.803 --> 13:26.763
[सदानंद]: जी, अब आपकी कृपा हो जाएगी,
तो ज़िंदगी भी महक जाएगी।

13:27.123 --> 13:29.163
[सरस्वती]: हम तो कृपा करने के लिए तैयार हैं।

13:30.883 --> 13:32.723
मगर काम ज़िम्मेदारी से करो तो ना।

13:33.083 --> 13:34.443
[सदानंद]: अरे! हम करेंगे, मैडम।

13:34.563 --> 13:37.283
आप बस ज़िम्मेदारी वाला काम तो दीजिए।

13:38.243 --> 13:39.283
[सरस्वती]: दिए तो थे।

13:40.563 --> 13:41.803
[सदानंद]: वो अ...

13:42.003 --> 13:43.243
कोशिश कर रहे हैं, मैडम।

13:43.363 --> 13:45.083
बहुत जल्द ही आप की
मुलाक़ात हम करवा देंगे।

13:45.203 --> 13:46.843
[सदानंद]: विजय सिंह से।
[सरस्वती]: अब विजय सिंह को छोड़ो।

13:47.643 --> 13:48.923
[सरस्वती]: दुनिया इस से आगे भी है।

13:51.323 --> 13:52.723
आप को बड़ा काम करना है।

13:54.243 --> 13:56.563
पार्टी में एक बड़ी ज़िम्मेदारी देने की
सोच रहे हैं आप को।

13:57.963 --> 13:59.443
आप के भीतर जो ऊर्जा है,

14:00.603 --> 14:01.723
वो आप के भाई को नहीं दिखती,

14:02.323 --> 14:03.403
लेकिन हमें दिखती है।

14:04.843 --> 14:06.763
हम उस का सही इस्तेमाल
करना चाहते हैं।

14:07.243 --> 14:08.963
[सदानंद]: सही में, मैडम?

14:10.203 --> 14:11.403
[सरस्वती]: हम गंभीर हैं।

14:13.643 --> 14:16.003
लेकिन मेवा ख़ाने से पहले
सेवा करनी पड़ती है।

14:17.323 --> 14:19.323
आप ही ने कही थी ना
ये लेन-देन की बात।

14:19.523 --> 14:21.123
[सदानंद]: जी। ज... ज...

14:21.243 --> 14:24.363
जी, जी, ज़रूर करेंगे, मैडम।
बस आदेश हो।

14:25.243 --> 14:27.723
[सरस्वती]: क्या है कि पार्टी में
बड़ा पद तभी मिलेगा,

14:28.563 --> 14:29.803
जब जगह ख़ाली होगी।

14:30.203 --> 14:31.203
[सदानंद]: जी।

14:33.123 --> 14:36.803
[सरस्वती]: आप को वो जगह ख़ाली करनी
या करवानी होगी।

14:39.123 --> 14:41.963
[सदानंद]: जी, मैं मतलब समझा नहीं, मैडम।

14:43.643 --> 14:44.723
[सरस्वती]: हत्या!

14:45.363 --> 14:47.723
[सदानंद]: हत्या! किस की?

14:49.963 --> 14:51.243
[सरस्वती]: रामानंद राय की!

14:54.083 --> 14:57.883
राजनीति के इतिहास का
पन्ना-पन्ना अपनों के ख़ून से रंगा है।

14:59.123 --> 15:00.483
हर कुर्सी एक बलि चाहती है।

15:02.203 --> 15:03.323
सोच लो।

15:05.723 --> 15:07.563
ज़िंदगी भर गोबर चुनना है या...

15:09.043 --> 15:10.443
निर्णय आप का।

15:11.443 --> 15:12.483
सोच लो।

15:26.603 --> 15:29.483
[रामानंद]: 48 घंटे लिए हैं गवर्नर साहब से

15:30.323 --> 15:32.563
विधायक दल के नेता को चुनने के लिए।

15:34.683 --> 15:35.763
कुछ पता चला,

15:36.283 --> 15:37.843
कितने लोग हमारे समर्थन में हैं?

15:38.163 --> 15:40.323
[ठाकुर]: राय साहब,
80 विधायक तो अपनी पार्टी के ही हैं।

15:41.723 --> 15:44.203
हाँ, 14-15 विधायकों का
बंदोबस्त करना पड़ेगा।

15:45.003 --> 15:47.363
बाक़ी वसीम के साथ
जो 12 विधायक हैं ना,

15:48.083 --> 15:49.723
उन की आवाश्यकता तो
पड़ेगी ही, राय साहब।

15:49.963 --> 15:52.323
[श्रीवास्तव]: मत भूलिए कि 80 जो गिने हैं,

15:52.563 --> 15:54.723
उन में सरस्वती देवी के
समर्थक भी हैं।

15:56.123 --> 15:57.523
मुश्किल लग रहा है, राय साहब।

15:58.563 --> 16:00.283
ऐसे तो हम बहुमत नहीं जुटा पाएँगे।

16:01.483 --> 16:04.323
[रामानंद]: सरस्वती देवी के समर्थकों को तो
हम निपटा लेंगे,

16:05.163 --> 16:06.243
दिक़्क़त...

16:07.923 --> 16:10.283
वसीम ख़ान के समर्थकों की है।

16:12.243 --> 16:13.883
उसे संभालना होगा।

16:17.723 --> 16:18.763
[केशव]: सर,

16:19.323 --> 16:21.643
यहाँ एक जगह से
दूसरी जगह पहुँचना हो,

16:21.763 --> 16:23.243
रोड से अच्छा बोट है!

16:24.683 --> 16:25.843
क्या सोच रहे हैं, सर?

16:26.403 --> 16:28.163
[हिमांशु]: हाँ?
[केशव]: कुछ सोच रहे हैं आप?

16:29.243 --> 16:30.403
[हिमांशु]: तू क्या कर रहा है?

16:30.923 --> 16:33.523
[केशव]: मछलियों का ख़ुराक!
पुण्य का काम है, सर।

16:35.163 --> 16:37.003
[हिमांशु]: मैं भी मछलियों के
बारे में ही सोच रहा हूँ।

16:37.923 --> 16:41.523
कि मछली अगर पानी से बाहर आ जाती है,
तो तुरंत मर नहीं जाती,

16:42.083 --> 16:44.883
वो तड़प कर, रेंग कर,
पानी में दुबारा जाने की कोशिश करती है।

16:45.483 --> 16:47.683
और अगर उस मछली को
कोई बचाने वाला हाथ मिल जाए,

16:48.363 --> 16:50.363
तो वो मछली ज़िंदगी भर
जाल में नहीं फँसती।

16:51.283 --> 16:53.883
[केशव]: सर, पर हर मछली
वापस पानी में जा नहीं पाती।

16:54.163 --> 16:57.723
जो मछलियाँ ताक़तवर होती है,
बड़ी होती है, वही कोशिश करती हैं ना।

16:57.843 --> 16:59.043
[हिमांशु]: जैसे कि विजय सिंह!

17:00.283 --> 17:03.083
और विजय सिंह जैसी मछली को
जाल से बचाने वाला हाथ...

17:03.283 --> 17:04.483
रामानंद राय!

17:05.003 --> 17:06.603
[केशव]: सर, हम समझे नहीं कुछ।

17:07.803 --> 17:09.403
[हिमांशु]: शुरुआत से समझाता हूँ। समझ।

17:10.443 --> 17:14.483
पाँच साल पहले दो आदमियों को
एक आदमी ने फँसाने की कोशिश की।

17:15.483 --> 17:18.403
रामानंद राय और बंसीराम को वसीम! हूँ?

17:18.563 --> 17:19.603
[केशव]: सही कहा ना?
[हिमांशु]: एकदम सही!

17:19.723 --> 17:22.963
[हिमांशु]: और फिर रामानंद के भाई
ब्रह्मानंद का ख़ून हो जाता है।

17:24.003 --> 17:25.363
जाँच अधूरी रह जाती है।

17:25.843 --> 17:28.443
लेकिन रामानंद राय
विजय सिंह का नाम हटा देता है।

17:28.603 --> 17:29.963
क्यों?

17:32.523 --> 17:35.283
[केशव]: ताकि वसीम ख़ान क्रोधित होकर
कुछ चू*** करे।

17:35.403 --> 17:37.883
[हिमांशु]: और रामानंद राय क्यों चाहेगा
कि वसीम ख़ान चू*** करे?

17:40.163 --> 17:41.523
रामानंद राय क्या बनने जा रहा है?

17:42.603 --> 17:43.763
[केशव]: मुख्यमंत्री।

17:44.083 --> 17:45.043
[हिमांशु]: तो फिर?

17:45.723 --> 17:47.003
सीधी सी बात है ना?

17:47.363 --> 17:50.883
रामानंद राय ने एक बड़ी मछली का
इस्तेमाल करके दूसरी बड़ी मछली को फँसाया,

17:51.003 --> 17:52.763
ताकि वो पूरे समंदर में राज कर सकें।

17:54.203 --> 17:55.163
सही कहा ना?

17:55.603 --> 17:58.123
[केशव]: बड़ी बढ़िया पंच वर्षीय
योजना बनाई राय साहब ने, सर।

17:58.243 --> 17:59.513
[हिमांशु]: और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ

17:59.523 --> 18:02.043
कि अपने भाई ब्रह्मानंद को भी
रामानंद राय ने ही मरवाया है।

18:03.123 --> 18:07.563
[केशव]: इस का मतलब विजय सिंह और वसीम ख़ान,
दोनों मठाधीश जी के हाथ की कठपुतली हैं, बस।

18:07.683 --> 18:08.723
[हिमांशु]: हाँ।

18:08.963 --> 18:11.123
और विजय सिंह तो
बेचारा फिर भी अंधेरे में है।

18:11.403 --> 18:13.003
और जिस दिन उसे पता चला ना

18:13.323 --> 18:15.603
कि रोली के माता-पिता को
रामानंद राय ने मरवाया है,

18:16.603 --> 18:19.723
वो दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के
इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा।

18:22.723 --> 18:23.923
[केशव]: सर,

18:24.523 --> 18:26.483
मुझे अब सब कहानी
समझ में आ गई।

18:26.843 --> 18:28.003
[हिमांशु]: हूँ।

18:28.163 --> 18:29.923
[हिमांशु]: मुझे भी।
[केशव]: ग़ज़ब।

18:34.563 --> 18:39.163
[वसीम]: उस मा***द विजय सिंह और उस के चू** भाई
छुन्नू को गिरफ़्तार कीजिए। अभी के अभी!

18:39.603 --> 18:42.163
[दरोगा]: किस जुर्म में, सर?
[वसीम]: आतंकवादी होने के जुर्म में।

18:42.923 --> 18:45.243
[वसीम]: और वॉरंट की चिंता मत कीजिए।
वो मैं आप को दूँगा।

18:46.163 --> 18:48.083
सब से पहले उस छुन्नू को दबोचिए।

18:48.803 --> 18:51.803
विजय सिंह जहाँ भी होगा,
अपने आप अपने बिल से बाहर आ जाएगा।

18:52.323 --> 18:53.203
और हाँ,

18:53.723 --> 18:55.683
छुन्नू की गिरफ़्तारी दर्ज नहीं होनी चाहिए।

18:56.003 --> 18:57.003
[दरोगा]: ठीक है, सर।

19:03.283 --> 19:05.883
[कट्टा]: देखो, यार।
समय बर्बाद मत करो।

19:07.043 --> 19:10.403
हम को उस सनकी के बारे में बताओ।

19:11.203 --> 19:12.483
कोई लड़की-वड़की देखे उस के घर में?

19:12.603 --> 19:15.283
[राहुल]: अरे, हम जान रहे हैं,
जिस लड़की के बारे में तुम बात कर रहे हो।

19:16.483 --> 19:18.563
उस दिन उस के घर में
तुम लड़की ही ढूँढ रहे थे ना?

19:20.243 --> 19:21.523
[कट्टा]: हाँ।

19:22.203 --> 19:23.723
लेकिन वहाँ सिर्फ़ तुम्हारी बहन थी।

19:24.243 --> 19:26.283
[राहुल]: हम बोले थे
कि उस घर में हमारी बहन रहती है।

19:26.723 --> 19:28.683
बेमतलब की गोली-वोली चल जाती।
पेला जाते!

19:29.363 --> 19:30.483
[कट्टा]: देखो, यार राहुल,

19:31.283 --> 19:33.443
कोई और घर वगैरह या...

19:34.203 --> 19:35.523
ख़ुफ़िया अड्डा है सनकी का,

19:36.083 --> 19:36.923
जहाँ वो आता-जाता हो?

19:37.043 --> 19:38.363
[राहुल]: अरे, बहुत ख़ुफ़िया अड्डा है।

19:38.483 --> 19:39.963
और बहुत जगह आता-जाता है।

19:41.363 --> 19:44.363
कह रहे हैं कि पता कर रहे हैं।
हम को भी बदला लेना है उस मा***द से।

19:45.723 --> 19:46.843
[कट्टा]: पता करो।

19:48.483 --> 19:50.643
[राहुल]: पता कर रहे हैं, भाई।
थोड़ा समय दो हम को।

20:10.363 --> 20:11.313
(दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़)

20:11.323 --> 20:12.323
[सदानंद]: सनकी।

20:13.803 --> 20:14.923
सनकी।
(ज़मीन पर थूकने की आवाज़)

20:16.003 --> 20:16.883
अरे!

20:18.123 --> 20:21.003
अरे, ये क्या ऊपर बेताल बनके
बैठे हुए हो? नीचे आओ।

20:21.683 --> 20:22.963
[सनकी]: चुनाव लड़ रहे हैं ना,

20:23.603 --> 20:25.483
तो नेता बनने का
अभ्यास कर रहे हैं हम।

20:25.843 --> 20:28.163
तो ऊपर राजा, नीचे प्रजा।

20:29.603 --> 20:31.483
तुम कहो, प्रजा।
कैसे आना हुआ?

20:35.203 --> 20:37.243
[सदानंद]: वो सरस्वती जी का संदेशा लाये हैं।

20:37.523 --> 20:39.083
अब नीचे आओ, तो बताएँ।

20:39.883 --> 20:42.043
आते हैं। खोलते हैं दरवाज़ा।

20:43.563 --> 20:44.563
बोलिए।

20:45.483 --> 20:47.923
गाँजा पीके बताएँगे
या बिना गाँजा पिये बोलेंगे?

20:48.923 --> 20:50.163
[सदानंद]: गंजेड़ी नहीं हैं हम।

20:50.603 --> 20:51.843
[सदानंद]: गौ सेवक हैं।
[सनकी]: हूँ।

20:51.963 --> 20:54.043
[सनकी]: गाँजा मार के भी तो
होश में जोश ही रहता है।

20:54.803 --> 20:57.163
ख़ैर छोड़ो,
तुम क्या समझोगे, गौ पालक जी।

20:58.083 --> 20:59.043
काम बताओ।

20:59.523 --> 21:01.283
[सदानंद]: अच्छा, आप को याद है ना
मैडम जी ने कहा था

21:01.403 --> 21:04.003
कि समय आने पे बताएंगी
कि उन को आप से क्या चाहिए?

21:04.363 --> 21:05.843
तो अब वो समय आ गया है।

21:06.163 --> 21:08.123
[सदानंद]: तो बात ऐसी...
[सनकी]: एक बात बताइए। अगर ये काम कर देंगे,

21:08.243 --> 21:10.003
[सनकी]: तो वो क्या हमें विधायक बना देंगी?

21:10.763 --> 21:11.883
[सदानंद]: बिलकुल बना देंगी।

21:12.603 --> 21:15.363
पहले आप काम सुन लीजिए
कि आप से हो पायेगा कि नहीं।

21:16.923 --> 21:19.003
[सनकी]: बेइज़्ज़ती कर रहे हो क्या हमारी? हाँ?

21:19.963 --> 21:22.083
ऐसा कोई काम नहीं है,
जो सनकी भाई ना कर पाए।

21:22.323 --> 21:24.283
तुम जाके हमारी उन को
एक बात कह देना।

21:24.643 --> 21:27.683
कि हमारे लिए पार्टी में कुर्सी
और वो सुंदर सा हेलिकॉप्टर तैयार रखें।

21:27.803 --> 21:30.443
आँख मूँद के उन का
काम कर देंगे। समझे?

21:30.643 --> 21:32.643
[सदानंद]: हाँ,
लेकिन पहले काम की गंभीरता तो...

21:32.763 --> 21:34.763
[सनकी]: आप हमारी गंभीरता को समझिए!

21:35.443 --> 21:38.043
ऐलानिया कह रहे हैं,
कर देंगे!

21:38.163 --> 21:39.523
अब ये बैठक समाप्त हुई!

21:39.643 --> 21:41.643
[सदानंद]: एक, एक...
[सनकी]: बस! नहीं सुनना है, यार, हमें!

21:42.203 --> 21:44.003
[सदानंद]: सुन तो लो।
एक बार सुन लेने...

21:44.123 --> 21:46.683
[सनकी]: हमारा काम हो जाना चाहिए,
पहले ही बता रहे हैं आप को। समझे?

21:47.923 --> 21:49.673
[सदानंद]: एक बार काम सुन लीजिए।
[सनकी]: अरे, नहीं सुनना है, यार।

21:49.683 --> 21:51.003
[सनकी]: दिमाग़ मत ख़राब करो हमारा!

21:53.603 --> 21:54.763
[सदानंद]: मैडम को...

22:01.243 --> 22:03.243
[रोली]: इस का नाम लिखो
और इसका पर्ची बनवा लो।

22:03.683 --> 22:07.603
और इस बच्चे का, इस के अगले महीने का
टीका ज़रूर करवाना। ठीक है?

22:12.523 --> 22:14.003
एक मिनट।

22:18.683 --> 22:20.523
कहिए। क्या चाहिए आप को?

22:21.843 --> 22:22.883
[हिमांशु]: देखिए,
मैं विजय सिंह के बारे में...

22:23.003 --> 22:25.323
[रोली]: अगर आप विजय के बारे में
वही सवाल पूछेंगे,

22:25.883 --> 22:27.483
तो हमारा फिर से
वही जवाब होगा।

22:27.683 --> 22:29.003
विजय ज़िंदा नहीं है।

22:29.123 --> 22:31.843
[हिमांशु]: मैं आप को कैसे समझाऊँ
कि मेरा विजय सिंह से मिलना कितना ज़रूरी है।

22:32.883 --> 22:35.003
[रोली]: आप ने फिर से वही राग
आलापना शुरू कर दिया।

22:36.483 --> 22:38.443
हमें इस तरह की बातों में
कोई दिलचस्पी नहीं है।

22:38.603 --> 22:39.723
[हिमांशु]: और विजय सिंह में?

22:39.963 --> 22:41.123
विजय सिंह में तो है ना?

22:42.523 --> 22:44.603
तो उस से प्लीज़, कहिएगा
कि उस की जान को ख़तरा है।

22:45.243 --> 22:49.883
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

22:57.003 --> 23:04.803
(गाड़ी के रुकने की आवाज़)
(झींगुर और क़दमों की आवाज़)

23:22.803 --> 23:29.243
(दरवाज़े की कूंडी खोलने की आवाज़)
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

23:50.803 --> 23:51.963
[सनकी]: सो गई क्या?

23:54.963 --> 23:58.883
जवाब नहीं दोगी, तो क्या मुझे
पता नहीं लगेगा तुम जाग रही हो?

24:03.483 --> 24:06.123
आँखें खुली हैं तुम्हारी।

24:06.243 --> 24:07.563
(सनकी के हँसने की आवाज़)

24:11.043 --> 24:12.043
(सनकी के हँसने की आवाज़)

24:20.483 --> 24:24.803
[सनकी]: तुम्हारा चेहरा ना हमारी आँखों के
सामने बिलकुल ऐसे धुंधला सा हो गया है।

24:25.963 --> 24:27.243
वो क्या है ना,

24:27.843 --> 24:31.763
अब हमें हमारा बहुत बड़ा वाला
सपना मिल गया है।

24:35.923 --> 24:40.643
तो अब तुम्हारे जीने का तो
कोई मतलब ही नहीं रहा अब... मेरे लिए।

24:54.403 --> 24:55.523
तेज़ाब।

25:04.643 --> 25:05.883
तेज़ाब।

25:08.843 --> 25:11.603
बहुत ख़तरनाक चीज़ होती है।

25:13.763 --> 25:16.683
[सनकी]: इंसान पे...
[सीमा]: सनकी।

25:17.123 --> 25:19.243
[सनकी]: हल्का सा भी पड़ जाए ना...

25:20.523 --> 25:21.723
[सीमा]: सनकी, नहीं।
[सनकी]: तो...

25:26.803 --> 25:30.563
(चेहरे पे पानी फेंकने की आवाज़)
(सीमा के चीखने की आवाज़)

25:43.883 --> 25:45.163
[सनकी]: पानी है।

25:53.603 --> 25:56.803
♪सनम, तेरी क़सम।♪

26:00.483 --> 26:02.883
♪कर ले जितने सितम।♪
(दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)

26:15.523 --> 26:16.963
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)

26:27.523 --> 26:28.603
[राहुल]: कोई है अंदर?

26:30.123 --> 26:31.003
[सीमा]: हाँ।

26:31.123 --> 26:32.123
[राहुल]: कौन?

26:33.323 --> 26:34.283
[सीमा]: सीमा।

26:34.563 --> 26:36.283
[राहुल]: कौन सीमा?
सनकी पांडे वाली?

26:38.523 --> 26:39.443
[सीमा]: हाँ।

26:43.123 --> 26:44.243
(पत्थर से दरवाज़े का ताला तोड़ने की आवाज़)

26:51.443 --> 26:52.443
[सीमा]: कौन हो तुम?

26:52.643 --> 26:54.683
[राहुल]: हम विजय भैया
और कट्टा के दोस्त हैं।

26:55.843 --> 26:57.763
[राहुल]: कट्टा ने भेजा?
[सीमा]: हाँ, कट्टा ने भेजा।

26:57.883 --> 27:00.003
[राहुल]: तेरी माँ की चो**
यहाँ बाँध के रखा हुआ है।

27:00.163 --> 27:01.323
मा***द!

27:03.803 --> 27:06.123
जानते हैं सा** बहुत घटिया इंसान है।

27:07.763 --> 27:08.803
आराम से।

27:09.563 --> 27:11.203
चलिए, चलिए, चलिए।
जल्दी चलिए।

27:18.283 --> 27:21.003
मा***द गाँजा छुपा-छुपा के रखा है,
इस की माँ को चो**!

27:36.203 --> 27:39.443
[चायवाला]: ए चाय गरम है, चाय गरम है,
चाय गरम है! (गाड़ी के रुकने की आवाज़)

27:47.923 --> 27:48.723
[ऑफिसर 1]: तुम उधर।

27:48.843 --> 27:49.963
तुम दोनों उधर जाओ।

27:51.123 --> 27:52.403
[छुन्नू]: ताज़ा है?
[सब्ज़ीवाला]: हाँ, एकदम ताज़ा।

27:52.523 --> 27:54.003
[सब्ज़ीवाला]: अभी खेत से ला रहे हैं।
[छुन्नू]: तौल के रखो। आते हैं अभी।

27:54.123 --> 27:55.163
[सब्ज़ीवाला]: हाँ, ठीक है।

27:58.723 --> 28:00.043
[छुन्नू]: आलू कैसे दे रहे हो?

28:00.723 --> 28:01.963
[आलू वाला]: ढाई रूपया किलो, भैया।

28:06.083 --> 28:07.083
कितना तौलें?

28:09.523 --> 28:10.683
अरे, बोलिए।

28:11.923 --> 28:12.963
एक किलो?

28:16.123 --> 28:18.163
[ऑफिसर 1]: छुन्नू सिंह चू**!
अब पकड़ में आया है!

28:18.283 --> 28:19.683
[छुन्नू]: तमीज़ से, ए! कहाँ लेकर जा रहे हो?
[ऑफिसर 1]: चल!

28:19.803 --> 28:21.123
[ऑफिसर 1]: चुप! चल, चल, चल!
[छुन्नू]: ए! तमीज़ से!

28:21.243 --> 28:22.643
[ऑफिसर 1]: बैठ यहाँ! बैठ! चल! सा**!
[छुन्नू]: ए!

28:22.763 --> 28:24.083
[ऑफिसर 2]: चल अंदर! चल!

28:24.283 --> 28:25.603
[ऑफिसर 1]: चल! बढ़ा गाड़ी!

28:25.723 --> 28:27.403
[ऑफिसर 1]: चल, चल, चल!
[ऑफिसर 2]: चल, चल, चल!

28:35.323 --> 28:36.403
[कट्टा]: विजय भैया!

28:37.363 --> 28:38.843
[कट्टा]: भैया!
[विजय]: क्या हुआ, कट्टा?

28:40.243 --> 28:41.803
[कट्टा]: छुन्नू को पुलिस उठा के ले गई है।

28:42.803 --> 28:44.083
[विजय]: हम अभी आ रहे हैं।
अभी आते हैं।

28:44.203 --> 28:45.923
[रोली]: नहीं, विजय।
आप कहीं नहीं जाओगे।

28:46.243 --> 28:47.803
इस समय बाहर जाना सही नहीं है।

28:52.283 --> 28:54.203
[विजय]: कट्टा,
सब को लेकर थाने जाओ।

28:55.043 --> 28:56.443
[विजय]: जाओ!
[कट्टा]: जी, भैया!

28:56.563 --> 28:57.683
[कट्टा]: चलो!

28:58.243 --> 28:59.323
बैठो!

28:59.763 --> 29:01.363
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)

29:01.923 --> 29:06.043
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
