WEBVTT

00:08.483 --> 00:11.843
'पार्टी कार्यालय (जेएसपी)'
(मंत्रियों के गाड़ी के साइरन की आवाज़)

00:15.203 --> 00:16.963
[ठाकुर]: ये बंसी राम जी

00:17.603 --> 00:19.723
[ठाकुर]: अब-तब पे हैं, राय साहब।
[रामानंद]: हूँ।

00:20.843 --> 00:24.123
[ठाकुर]: उन के परलोक सिधारने की ख़बर
कभी भी आ सकती है।

00:24.683 --> 00:27.363
हमें लगता है आप को
उन के आसपास होना चाहिए।

00:27.843 --> 00:31.683
कहीं वो चतुर नार वसीयत ना लिखवा ले
कि सीएम वही बनेगी?

00:32.163 --> 00:34.403
[रामानंद]: क्या बेवकूफ़ की तरह बात कर रहे हो!

00:35.083 --> 00:37.483
ये सीएम का पद कोई ज़मीन-जायदाद है,

00:37.603 --> 00:39.243
जो वसीयत बनेगा?

00:39.683 --> 00:41.243
ज्ञान पेले जा रहे हो!

00:42.363 --> 00:43.803
आप लोग जाके पता करिए

00:43.923 --> 00:46.483
कितने विधायक हमारे समर्थन में हैं,

00:46.843 --> 00:48.643
कितने सरस्वती के।

00:50.003 --> 00:51.603
सीएम की कुर्सी उसी को मिलेगी,

00:51.723 --> 00:54.843
जिस के पास संख्या बल हो।

00:55.843 --> 00:58.123
और उस के लिए
किस की बलि चढ़ानी है

00:58.243 --> 01:02.123
और कहाँ पर बल का प्रयोग करना है,
हम अच्छी तरह जानते हैं।

01:02.883 --> 01:05.003
माने, समझ रहे हैं ना?

01:05.203 --> 01:07.283
[ठाकुर]: जी, अच्छी बात है। जी।
[श्रीवास्तव]: जी, अच्छी बात है, राय साहब।

01:07.563 --> 01:09.603
[रामानंद]: आप के भविष्य का सवाल है।

01:10.603 --> 01:11.883
अपने माता-पिता के नाम पर

01:12.003 --> 01:14.163
इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज
खोलना है कि नहीं?

01:14.683 --> 01:17.403
(मंत्रियों के हँसने की आवाज़)

01:21.123 --> 01:23.283
(मेडिकल उपकरण की आवाज़)

01:23.443 --> 01:25.443
[सरस्वती]: बड़ा मिस करेंगे आप को,
मुख्यमंत्री जी।

01:26.563 --> 01:27.763
[डॉक्टर]: गुड मॉर्निंग, मैम।

01:30.283 --> 01:32.083
[सरस्वती]: सुधार के
कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं?

01:32.203 --> 01:33.203
[डॉक्टर]: नहीं, मैडम।

01:33.323 --> 01:34.323
[सरस्वती]: कुछ कीजिए।

01:35.243 --> 01:36.803
प्रदेश को इन की बहुत ज़रूरत है।

01:37.563 --> 01:38.563
[डॉक्टर]: सॉरी, मैडम।

01:39.163 --> 01:41.243
इनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।

01:42.723 --> 01:44.443
मैडम,
ज़्यादा समय है नहीं इन के पास।

01:54.483 --> 01:57.723
[वसीम]: मुख्यमंत्री जी की तबियत
इतनी ख़राब हो जाएगी, सोचा नहीं था हम ने।

01:58.523 --> 02:00.883
[सरस्वती]: एक उम्र के बाद
किसी का भरोसा नहीं रहता।

02:01.123 --> 02:03.083
ना ज़िंदगी का,
ना स्वास्थ्य का।

02:04.923 --> 02:07.923
वसीम ख़ान जी,
मुख्यमंत्री जी की स्थिति देखते हुए

02:08.043 --> 02:10.403
हम ने पार्टी को अपने हाथ में
लेने का फ़ैसला किया है।

02:11.603 --> 02:14.083
[वसीम]: कमाल है! बहुत जल्दी में हैं आप।

02:15.003 --> 02:17.243
उनका राम नाम सत्य होने का भी
इंतज़ार नहीं करेंगी?

02:17.443 --> 02:20.123
[सरस्वती]: क्या है ना
कि प्रदेश के भविष्य को

02:20.603 --> 02:22.723
एक पल के लिए भी
अंधकार में नहीं रखा जा सकता।

02:23.843 --> 02:24.923
[वसीम]: सही कह रही हैं आप।

02:25.643 --> 02:27.763
मतलब, पार्टी की कमान
अब आप के हाथ में है?

02:28.963 --> 02:30.963
इसका ये मतलब है
कि आप ये आशा कर रही होंगी

02:31.083 --> 02:32.603
कि अगला मुख्यमंत्री आप बनें?

02:33.163 --> 02:34.443
[वसीम]: आप को क्या आपत्ति?

02:35.283 --> 02:37.643
जैसे आप का समर्थन
बंसी राम जी को मिला,

02:37.763 --> 02:39.603
उम्मीद करते हैं
कि हमें भी मिलेगा।

02:40.963 --> 02:42.523
[वसीम]: इतना कुछ सोच लिया आप ने।

02:42.963 --> 02:44.523
हमारे बारे में कुछ नहीं सोचा?

02:45.203 --> 02:46.483
[सरस्वती]: ज़्यादा मत सोचिए।

02:47.283 --> 02:49.363
आप के पास
गृह मंत्री की कुर्सी तो है ही,

02:49.963 --> 02:53.403
[वसीम]: वो क्या है ना,
वसीम ख़ान का पूर्वांचल में जो क़द है,

02:54.163 --> 02:56.683
उसके लिए गृह मंत्री की कुर्सी
कभी-कभी छोटी पड़ जाती है।

02:57.123 --> 02:59.043
[सरस्वती]: शायद आप भूल रहे हैं

02:59.203 --> 03:01.723
कि ये छोटी कुर्सी
आप को दिलाने के लिए

03:02.403 --> 03:04.283
हमने कितना बड़ा तिकड़म किया है।

03:04.923 --> 03:06.003
[वसीम]: तो क्या करें?

03:06.523 --> 03:08.683
जीवन भर आप का एहसान मानें?

03:09.323 --> 03:12.283
देखिए, पार्टी की कमान तो
आप ने अपने हाथ में ले ली।

03:13.043 --> 03:15.163
लेकिन अगला मुख्यमंत्री कौन होगा,

03:15.363 --> 03:16.923
इस का फ़ैसला विधायक करेंगे।

03:17.443 --> 03:19.843
[सरस्वती]: दो बिल्लियों की लड़ाई में
बंदर का फ़ायदा।

03:20.363 --> 03:22.243
ये कहावत तो सुनी होगी आप ने?

03:24.083 --> 03:26.163
रामानंद को कमज़ोर मत समझिए।

03:27.083 --> 03:28.763
[वसीम]: शतरंज और राजनीति में

03:29.163 --> 03:32.003
जीत उसी की होती है,
जिस के मोहरे क़ाबू में हो।

03:33.123 --> 03:34.643
[सरस्वती]: लेकिन ये राजनीति है,

03:35.363 --> 03:37.323
मोहरा कभी भी पाला बदल सकता है।

03:38.363 --> 03:39.923
[वसीम]: आप शायद भूल रही हैं।

03:40.603 --> 03:42.243
कि इस खेल में वसीम ख़ान भी है।

03:43.843 --> 03:45.043
कोई नहीं बदलेगा।

03:50.763 --> 03:52.603
अगला मुख्यमंत्री वही होगा,

03:53.643 --> 03:55.963
जिस के पास विधायकों का समर्थन हो।

03:57.043 --> 03:58.363
आगे आप समझदार हैं।

04:10.283 --> 04:11.403
[सरस्वती]: मा***द!

04:12.203 --> 04:13.683
हमें चुनौती देता है।

04:15.603 --> 04:18.403
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

04:51.763 --> 04:53.843
[कट्टा]: राहुल मिश्रा?
[राहुल]: हाँ, हम ही हैं। बोलो।

04:55.043 --> 04:55.963
[कट्टा]: हम कट्टा हैं।

04:57.203 --> 04:58.323
[राहुल]: क्या काम है, बताओ।

04:59.203 --> 05:00.203
[कट्टा]: ये छुन्नू है।

05:01.603 --> 05:02.803
विजय सिंह के भाई।

05:09.643 --> 05:11.283
[कट्टा]: आओ बैठो।
[छुन्नू]: देख, बे राहुल।

05:12.123 --> 05:13.563
[छुन्नू]: बात ऐसी है।
[राहुल]: हूँ।

05:14.283 --> 05:16.083
[छुन्नू]: जब दुश्मन एक हो ना...
[राहुल]: हूँ, हूँ।

05:16.403 --> 05:19.563
[छुन्नू]: तो हाथ मिलाने से ताक़त
दुगनी हो जाती है। [राहुल]: हूँ।

05:20.883 --> 05:22.203
[राहुल]: कौन है तुम्हारा दुश्मन?

05:25.483 --> 05:26.443
[छुन्नू]: सनकी।

05:27.603 --> 05:29.163
हम भी पेलना चाहते हैं उसे

05:29.843 --> 05:31.073
और तुम भी।

05:31.083 --> 05:33.963
[राहुल]: अरे, तो भैया, पेलो ना।
कौन रोक रहा है?

05:34.483 --> 05:35.843
[कट्टा]: एक बात बताओ बे।

05:36.603 --> 05:38.123
वो तो तुम्हारा बहनोई है,

05:39.043 --> 05:40.723
फिर तुम क्यों मारना चाहते हो उसे?

05:40.883 --> 05:44.483
[राहुल]: गुरु, बहुत हिसाब-किताब
उस से बराबर करना है।

05:45.723 --> 05:48.003
बहुत। सा** कहीं का!

05:49.563 --> 05:51.763
हमारा उंगली काटे थे ना, मा***द!

05:52.883 --> 05:53.923
[छुन्नू]: ठीक है।

05:54.883 --> 05:56.203
ये समझो कि

05:56.603 --> 05:58.163
आज से हम और तुम

05:58.963 --> 05:59.843
एक ही हैं।

06:04.203 --> 06:05.283
चलो।

06:10.003 --> 06:11.523
चू** लगता है सा**।

06:12.523 --> 06:14.003
[छुन्नू]: हाथ तो मिला लिया है।
[कट्टा]: हूँ।

06:14.123 --> 06:16.083
[छुन्नू]: लेकिन पता नहीं
कितने काम आ पायेगा हमारे।

06:16.723 --> 06:19.953
[विजय]: वसीम ख़ान की गैंग में सेंध
मारने के लिए और सीमा को ढूँढने के लिए

06:19.963 --> 06:22.403
कोई चू** ही हमारी मदद कर सकता है।

06:22.723 --> 06:27.683
(मंत्रियों के आपस में बातचीत करने की आवाज़)

06:40.563 --> 06:42.323
[सरस्वती]: जैसे की आप सब को ज्ञात है

06:42.723 --> 06:44.843
कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री

06:44.963 --> 06:48.163
बंसी राम जी का स्वास्थ्य
लगातार बिगड़ता जा रहा है।

06:48.923 --> 06:52.443
और उस के साथ ही
पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी।

06:54.123 --> 06:56.763
इसलिए बहुत ज़रूरी है
कि इस कठिन समय में

06:57.283 --> 07:00.883
पार्टी नेतृत्व की ज़िम्मेदारी किसी सक्षम

07:01.123 --> 07:03.163
और सर्वमान्य नेता को सौंप दी जाए।

07:07.803 --> 07:09.483
[सरस्वती]: हमें लगता है...
[ठाकुर]: मैडम।

07:12.003 --> 07:13.603
[ठाकुर]: आप को क्या लगता है,
आप जाने।

07:15.003 --> 07:18.483
मेरा मत तो ये है कि नेतृत्व की ज़िम्मेदारी
रामानंद राय जी को सौंपनी चाहिए।

07:18.723 --> 07:19.763
[श्रीवास्तव]: बिलकुल।

07:20.363 --> 07:21.923
[रामानंद]: वो व्यक्ति सक्षम हैं।
[श्रीवास्तव]: हूँ।

07:22.283 --> 07:23.683
[रामानंद]: और सर्वमान्य भी हैं।

07:24.203 --> 07:26.563
और यहाँ सब से ज़्यादा
वही अनुभवी भी हैं।

07:27.323 --> 07:28.433
क्यों, श्रीवास्तव जी?
मैं ग़लत कह रहा हूँ?

07:28.443 --> 07:29.883
[श्रीवास्तव]: नहीं,
बिलकुल सही कह रहे हैं आप।

07:30.203 --> 07:33.993
माननीय के बाद इस पार्टी को
रामानंद जी ही मज़बूत बना सकते हैं।

07:34.003 --> 07:36.883
[रामानंद]: हूँ।
[श्रीवास्तव]: और फिर मान्यवर भी यही चाहेंगे।

07:37.083 --> 07:39.763
[गुप्ता]: हमारी राय भी यही है।
[मिश्रा]: सही बोल रहे हैं आप।

07:40.403 --> 07:42.843
[मिश्रा]: रामानंद साहब सही विकल्प हैं।

07:43.123 --> 07:44.523
[युवा नेता]: एकदम नहीं।

07:46.003 --> 07:47.883
इतना जल्दी भूल गए आप लोग?

07:48.403 --> 07:52.163
रामानंद राय पे एक ग़रीब युवक की
हत्या का आरोप लगा था।

07:52.563 --> 07:55.803
और इसी कारण उन को
मंत्री पद से इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था।

07:56.203 --> 07:58.243
उनकी वजह से पार्टी की
छवि कितनी धूमिल हुई थी।

07:58.603 --> 07:59.713
ये हम सब जानते हैं।

07:59.723 --> 08:01.443
[रामानंद]: जानने को तो
पूरा पूर्वांचल जानता है।

08:02.483 --> 08:04.203
पूर्वांचल क्या,
पूरा प्रदेश जानता है!

08:04.643 --> 08:06.163
वो कांड किस ने करवाया था

08:06.443 --> 08:07.883
और किस के साथ मिल के कराया था।

08:08.603 --> 08:10.523
राय साहब का मंत्री पद छीनने के लिए।

08:11.563 --> 08:14.123
उस कांड में राय साहब की
कोई भूमिका ही नहीं थी।

08:14.323 --> 08:16.403
[रामानंद]: क्यों, श्रीवास्तव जी?
[श्रीवास्तव]: बिलकुल।

08:17.043 --> 08:18.553
[गुप्ता]: हाँ, हाँ, बिलकुल सही कह रहे हैं।
[मिश्रा]: सही कह रहे हैं।

08:18.563 --> 08:20.163
[नेता जी]: भाई, हम तो समर्थन करते हैं।

08:22.603 --> 08:24.003
[केशव]: सर, आ गया ननोरा।

08:24.523 --> 08:27.323
ये वही गाँव है, सर,
जहाँ विजय सिंह ने नरसंहार किया था।

08:28.363 --> 08:29.793
सर, इतना भयानक कांड था ना, सर

08:29.803 --> 08:32.123
कि हम जब सुने थे,
तो पैंट में ही मूत छूट गया था।

08:32.723 --> 08:34.923
वैसे, इस गाँव से
क्या मिलने वाला है, सर, आप को?

08:35.243 --> 08:37.643
[हिमांशु]: केशव, कभी-कभी एक पत्थर
आगे की राह लगा देता है।

08:38.443 --> 08:40.563
हो सकता है इस गाँव में
ऐसा ही कोई पत्थर मिल जाए?

08:41.843 --> 08:44.123
[हिमांशु]: थोड़ा तेज़ चलोगे
या उतर के धक्का मारूँ मैं? [केशव]: जी, सर।

08:50.843 --> 08:51.883
[केशव]: सर।

08:52.323 --> 08:53.723
रास्ता बहुत ख़राब है, सर।

08:54.243 --> 08:56.633
सर, जगह भी बहुत, सर,
ख़तरनाक है, सर।

08:56.643 --> 08:58.243
हम को थोड़ा डर लग रहा है, सर।

08:59.283 --> 09:00.923
[हिमांशु]: तुम गाइड हो या पुलिस वाले? हाँ?

09:01.803 --> 09:02.963
डर लग रहा है!

09:04.003 --> 09:05.443
वो नरसंहार वाला घर कौन सा है?

09:05.923 --> 09:08.803
[केशव]: सर, वो जो सामने वाला घर है ना, सर।
वो... वो वाला।

09:08.923 --> 09:09.913
[हिमांशु]: वो वाला?
[केशव]: जी।

09:09.923 --> 09:12.203
[हिमांशु]: ठीक है। सब को इकट्ठा करो,
उस घर में ले आओ।

09:13.243 --> 09:14.643
[हिमांशु]: अरे, जाओ!
[केशव]: जी, सर।

09:25.043 --> 09:29.083
(बंदूकों से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(लोगों के कराहने की आवाज़)

09:30.043 --> 09:33.483
(बच्चे के ज़ोरों से रोने की आवाज़)

09:37.003 --> 09:38.793
[केशव]: घर में कोई है?
भेजो उसको! अरे!

09:38.803 --> 09:41.433
दिन में क्या सोया है? चल, उठ।
चल, चल, चल। जल्दी चल। साहब बुला रहे हैं।

09:41.443 --> 09:44.243
अरे, कपड़ा बाद में पहन लेना।
चलो पहले। चल रे!

09:44.563 --> 09:46.643
सफ़ेद, चल! अरे, दौड़ना।

09:47.483 --> 09:48.923
[चाची जी]: ए, बबुआ! क्या हुआ?

09:49.683 --> 09:52.043
[केशव]: अरे, पूछताछ करके छोड़ देंगे।
चिंता मत कीजिए।

09:52.603 --> 09:54.723
खाना नहीं खाए हो क्या?
फुर्ती दिखाओ थोड़ा।

10:02.843 --> 10:05.003
[हिमांशु]: देखिए, आप लोगों को
डरने की बिलकुल ज़रूरत नहीं है।

10:05.523 --> 10:07.923
हम लोग यहाँ सिर्फ़ आप लोगों से
सवाल-जवाब करने आए हैं।

10:08.403 --> 10:09.803
बिना डरे जवाब दीजिए।

10:09.963 --> 10:11.403
आप लोगों में से किसी ने भी

10:11.723 --> 10:13.723
विजय सिंह को देखा क्या
गोली चलाते हुए?

10:14.483 --> 10:15.963
[चाचा जी]: चेहरा तो
किसी ने नहीं देखा, साहब,

10:16.083 --> 10:17.243
पर वो था विजय सिंह ही।

10:17.843 --> 10:20.403
क्या बताऊँ, साहब?
शादी का माहौल था।

10:21.203 --> 10:23.043
डोली की जगह अर्थियाँ निकली।

10:23.603 --> 10:25.243
बूढ़े, बच्चे

10:25.363 --> 10:28.003
और औरतों को भी
वो राक्षस विजय सिंह ने नहीं छोड़ा।

10:28.163 --> 10:29.273
[हिमांशु]: लेकिन जब आप ने चेहरा नहीं देखा,

10:29.283 --> 10:31.763
तो आप लोग यक़ीन के साथ
कैसे कह सकते हैं कि वो विजय सिंह था?

10:31.963 --> 10:33.883
[चाचा जी]: अरे!
सब के सामने ऐलान किया था।

10:35.723 --> 10:38.633
[हिमांशु]: तो फिर क्या उसने आप लोगों को
कोर्ट में गवाही देने से रोका

10:38.643 --> 10:39.963
या कोर्ट जाने से रोका?

10:40.083 --> 10:41.723
[चाचा 2]: ऐसा कुछ भी नहीं किया, सरकार।

10:42.043 --> 10:43.153
[हिमांशु]: किसी को धमकाया उस ने?

10:43.163 --> 10:45.083
[चाचा 1]: नहीं। नहीं, साहब।
[चाचा 2]: नहीं, नहीं। नहीं।

10:45.643 --> 10:46.923
[हिमांशु]: कोर्ट में कोई भी,

10:47.363 --> 10:49.043
एक इंसान भी अपने बयान से मुकरा?

10:49.283 --> 10:50.723
[चाचा 1]: नहीं, साहब।
[चाचा 2]: नहीं।

10:53.723 --> 10:55.563
[हिमांशु]: ठीक है।
आप लोग जा सकते हैं। धन्यवाद।

10:59.643 --> 11:02.363
केशव, कोई माने ना माने,
मैं मानता हूँ विजय सिंह ज़िंदा है।

11:02.483 --> 11:03.803
100 प्रतिशत ज़िंदा है वो।

11:04.643 --> 11:06.403
लेकिन फिर भी उस का कुछ ना करना,

11:07.003 --> 11:08.283
इसके सिर्फ़ दो मतलब हैं।

11:08.883 --> 11:10.723
या तो इस विजय सिंह में बात अलग है।

11:11.723 --> 11:13.563
या तो फिर ये कुछ अलग ही बात है।

11:14.243 --> 11:15.353
[केशव]: ये पूर्वांचल है, सर।

11:15.363 --> 11:17.683
यहाँ सभी गुंडों के ना
अपने अलग-अलग तरीक़े होते हैं।

11:17.883 --> 11:20.283
कौन किस को मारने के लिए
कब खड़ा हो जाए, कह नहीं सकते।

11:20.483 --> 11:22.313
यहाँ तो सर,
बीच अदालत में जज के सामने

11:22.323 --> 11:23.713
गोली और बम तक चल जाता है।

11:23.723 --> 11:25.883
[हिमांशु]: सुन। हमारा कोई पीछा कर रहा है।
[केशव]: हाँ, सर?

11:26.243 --> 11:27.793
[केशव]: क्या बात कर रहे हैं, सर?
[हिमांशु]: हूँ!

11:27.803 --> 11:28.913
[हिमांशु]: मुड़ के मत देख। इधर आ।

11:28.923 --> 11:30.843
[केशव]: सर, मतलब, हमारे पीछे पड़ गए, सर?
[हिमांशु]: हूँ!

11:39.483 --> 11:40.483
[हिमांशु]: आजा।
[केशव]: हाँ।

11:49.243 --> 11:50.803
[गुंडा 1]: ढूँढ, ढूँढ, ढूँढ, ढूँढ!
[मुन्ना]: हाँ।

11:52.603 --> 11:54.883
[गुंडा 1]: अरे, भाग, मुन्ना। भो** वाला, भाग!
[केशव]: सर!

11:55.283 --> 11:57.323
[गुंडा 1]: भाग!
[केशव]: सर, सर, सर, देखिए। सर, सर, सर।

11:57.643 --> 12:00.323
[केशव]: सर, क्या कर रहे हैं, सर?
सर, सर, सर! ये जगह ठीक नहीं है, सर।

12:01.203 --> 12:02.353
[केशव]: सर...
[हिमांशु]: मज़ा आया, केशव?

12:02.363 --> 12:03.923
[केशव]: सर, डर लग रहा है, सर।

12:04.483 --> 12:05.563
[हिमांशु]: डर?

12:05.803 --> 12:08.403
[हिमांशु]: तू पुलिस वाला है ना? [केशव]: सर,
पुलिस वाला हूँ, शक्तिमान नहीं, सर।

12:08.563 --> 12:10.113
[केशव]: सर, उन लोगों के पास
एके 47 होता है, सर।

12:10.123 --> 12:12.123
47 में से एक भी गोली लग गया ना, सर,
कहानी ख़त्म, सर।

12:12.243 --> 12:13.763
[हिमांशु]: एके 47 होती ना,

12:14.123 --> 12:15.603
तो ये देख के उस की फटती नहीं।

12:15.803 --> 12:17.163
[हिमांशु]: चल।
[केशव]: सर।

12:18.963 --> 12:20.953
[हिमांशु]: तू एक बात बता।
अगर बेरोज़गारी ही दूर करनी थी,

12:20.963 --> 12:23.403
तो वाक़ई गाइड बन जाता।
पुलिस वाला क्यों बना?

12:24.163 --> 12:25.993
[केशव]: हमारे पूज्यवर पिता जी दरोगा थे,

12:26.003 --> 12:28.883
जो 40 साल तक
अथक सेवा प्रदान कर स्वर्ग सिधार गए।

12:29.643 --> 12:32.123
घर में सात बहनें हैं
और उन के इकलौते भाई... हम!

12:32.523 --> 12:34.193
फिर ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई,

12:34.203 --> 12:37.003
अनुकंपा के आधार पर
नौकरी मिली पिता जी के विभाग में।

12:37.723 --> 12:39.683
तब से ये सात हज़ार का वेतन उठाते हैं

12:39.843 --> 12:42.203
और जैसे निभा सकते हैं, सर,
वैसा निभाते हैं।

12:43.763 --> 12:45.323
[हिमांशु]: ये तो तुझे देख के ही
समझ गया था मैं।

12:45.723 --> 12:47.033
ऐसी ही कोई कहानी होगी तेरी।

12:47.043 --> 12:47.963
(केशव के हँसने की आवाज़)

12:48.083 --> 12:49.553
[केशव]: सर, एक निवेदन है।

12:49.563 --> 12:51.313
[हिमांशु]: हूँ। [केशव]: विभाग से बोल के
पेट्रोल का पैसा दिलवा देते।

12:51.323 --> 12:52.923
[हिमांशु]: पेट्रोल पंप दिलवा देंगे तुझे।

12:59.763 --> 13:01.203
(गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़)
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

13:02.443 --> 13:03.563
(गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़)

13:03.683 --> 13:05.643
[सनकी]: गेट खोलो।
सरस्वती जी से मिलना है।

13:05.923 --> 13:07.203
[गार्ड]: अपॉइंटमेंट है?

13:07.523 --> 13:08.603
[सनकी]: अरे, यार।

13:10.883 --> 13:14.243
इतना बड़ा बमभो** लिए हैं हम,
ये तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है क्या? हाँ?

13:14.403 --> 13:16.203
[गार्ड]: समय लिए हो मिलने का?

13:16.403 --> 13:17.843
[सनकी]: हम मिलेंगे तब ना लेंगे समय।

13:18.403 --> 13:19.603
ऐसे बिना मिले कैसे लेंगे?

13:19.723 --> 13:20.843
[गार्ड]: भाग यहाँ से!

13:21.523 --> 13:22.913
[सनकी]: उनसे बोलो पांडे आया है।

13:22.923 --> 13:24.673
[गार्ड]: भो** के भाग जा यहाँ से,

13:24.683 --> 13:27.043
नहीं तो गाँ** में गोली मारूँगा।
समझा कि नहीं?

13:30.083 --> 13:31.203
(सनकी के हँसने की आवाज़)

13:32.083 --> 13:35.323
[सनकी]: गाँ** में छेद तो हम भी कहीं
कर सकते हैं तुम्हारे, यहीं खड़े-खड़े।

13:36.163 --> 13:39.443
लेकिन क्या है ना, वो जो अंदर हैं ना,
उन की बहुत इज़्ज़त करते हैं हम।

13:40.283 --> 13:42.363
यहीं खड़े हैं,
कहीं जा नहीं रहे हैं।

13:44.923 --> 13:47.203
सरस्वती जी से मिलेंगे नहीं,

13:47.483 --> 13:49.203
तब तक यहाँ से हिलेंगे नहीं।

13:55.963 --> 13:57.753
[अशोक]: इस की रिपोर्ट कल सुबह तक
आ जानी चाहिए। [इंस्पेक्टर 2]: ठीक है, सर।

13:57.763 --> 13:59.443
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

14:00.283 --> 14:02.083
[अशोक]: हेलो?
[हिमांशु]: सर। हिमांशु।

14:03.083 --> 14:04.203
[अशोक]: हिमांशु।

14:04.883 --> 14:06.243
विजय सिंह का कुछ पता चला?

14:07.323 --> 14:10.003
[हिमांशु]: मैं हैरान हूँ, सर कि आप मुझ से
विजय सिंह के बारे में पूछ रहे हैं।

14:11.123 --> 14:13.763
[अशोक]: जिस काम के लिए
हमारा सब से क़ाबिल अफ़सर

14:13.923 --> 14:15.643
बॉम्बे से बनारस गया हो,

14:15.763 --> 14:17.323
उसकी अपडेट तो लेनी पड़ेगी।

14:18.003 --> 14:19.243
बताओ।

14:20.003 --> 14:21.843
घोस्ट के असली होने का
कोई सबूत मिला?

14:22.523 --> 14:24.763
[हिमांशु]: सर, अब तो
विजय सिंह को लेकर ही आप के सामने आऊँगा मैं।

14:25.763 --> 14:28.083
[अशोक]: उम्मीद है, जल्द ही आओगे।
शुभकामनायें।

14:28.603 --> 14:29.723
[हिमांशु]: शुक्रिया, सर।

14:36.763 --> 14:38.163
[रामानंद]: भाई विजय,

14:39.403 --> 14:42.313
वसीम ख़ान के विधायकों ने
अगर साथ नहीं दिया,

14:42.323 --> 14:44.723
माने, समझ लो हमारी नैया डूब गई।

14:45.803 --> 14:47.083
[विजय]: चाचा जी,

14:48.083 --> 14:52.233
पहली बात कि आप अपने आप को
और हम को कम आँकना बंद कीजिए।

14:52.243 --> 14:53.643
[रामानंद]: अरे, भाई।

14:54.123 --> 14:55.363
[विजय]: और दूसरी बात,

14:55.883 --> 14:58.043
कि अपनी हर समस्या में
हम को शामिल कीजिए।

14:58.923 --> 15:01.323
तभी आप की समस्या का
समाधान संभव कर पाएंगे।

15:01.603 --> 15:02.803
[रामानंद]: हूँ।

15:03.003 --> 15:03.883
समझे।

15:04.643 --> 15:06.203
माने, आगे से याद रखेंगे।

15:06.603 --> 15:07.723
[विजय]: देखिए, चाचा जी।

15:08.923 --> 15:13.483
वैसे भी, इस प्रदेश की राजनीति
कई सालों से धनबल और बाहुबल से चलती रही है,

15:14.243 --> 15:16.483
और दोनों आप के पास हैं,
आप के साथ हैं,

15:17.603 --> 15:20.603
तो आप ये समझिए
कि वसीम ख़ान के सारे विधायक

15:21.763 --> 15:22.683
बिक चुके हैं।

15:28.283 --> 15:30.603
[रामानंद]: राजनीति की
बहुत समझ हो गई है तुम्हें।

15:31.323 --> 15:34.283
माने, परिपक्व हो गए हो तुम, विजय।

15:35.443 --> 15:38.643
पता नहीं, क्यों लगता है
कि मुख्यमंत्री बनने के बाद

15:39.843 --> 15:42.443
गृह मंत्रालय तुम्हें उपहार में
देना ही पड़ेगा।

15:43.483 --> 15:44.523
(विजय के मुस्कुराने की आवाज़)

15:45.323 --> 15:46.563
[विजय]: धन्यवाद, चाचा जी।

15:48.083 --> 15:50.283
पर हम जो भी कर रहे हैं,
अपनी गद्दी के लिए नहीं,

15:51.563 --> 15:53.123
आप की गद्दी के लिए कर रहे हैं।

15:55.483 --> 15:56.923
हमें कोई विभाग नहीं,

15:58.043 --> 15:59.323
वर्चस्व चाहिए।

16:00.723 --> 16:01.763
वसीम ख़ान पर।

16:02.923 --> 16:04.043
[रामानंद]: होगा।

16:06.283 --> 16:08.483
माने, सब होगा।

16:21.603 --> 16:22.843
[विधायक]: राजू!
[राजू]: जी, साहब?

16:22.963 --> 16:24.643
[विधायक]: ये गेट पे बैग कैसे लटका है?

16:25.003 --> 16:25.883
जाओ, लेके आओ।

16:35.403 --> 16:36.403
रख।

16:38.723 --> 16:39.803
जाओ।

16:59.843 --> 17:02.123
[भाई]: एक ज़रूरी बात करनी थी।
[वसीम]: बोलो।

17:02.603 --> 17:05.083
[भाई]: भाई जान, कोई हमारे विधायक
ख़रीदने की कोशिश कर रहा है।

17:05.563 --> 17:08.483
सब के घर पे अटैची भिजवा रहा है,
धमकी भरे ख़त के साथ।

17:09.843 --> 17:11.123
[वसीम]: कितने की माँग किए हैं?

17:12.243 --> 17:13.723
[भाई]: हर एक का पचास लाख।

17:14.803 --> 17:16.403
[वसीम]: मा***द।

17:17.083 --> 17:18.883
पहले विधायक बनाने के लिए ख़र्चा करो,

17:19.443 --> 17:21.243
फिर हम से जुड़े रहने के लिए ख़र्चा करो।

17:23.203 --> 17:24.363
[वसीम]: बिलाल।
[बिलाल]: जी?

17:25.043 --> 17:26.403
[वसीम]: छह-सात करोड़ का बंदोबस्त करो

17:27.283 --> 17:28.483
और अड्डे पर पहुँचाओ।

17:28.763 --> 17:31.123
[बिलाल]: ठीक है।
[वसीम]: और उन विधायकों से कहना

17:31.523 --> 17:35.123
[वसीम]: कि अगर हम से दग़ा किया ना,
एक-एक की गाँ** काटी जाएगी।

17:35.563 --> 17:37.443
[भाई]: जी, भाई जान।
[वसीम]: बहन के लौ**!

17:42.563 --> 17:44.283
[बिलाल]: पचास लाख!

17:46.363 --> 17:48.923
सा** गोजर से अजगर होते जा रहे हो।

17:51.563 --> 17:53.803
ये जो हर विधायक का
दस लाख का कट मारे हो ना,

17:54.243 --> 17:56.163
इस में पाँच प्रतिशत हमारा होगा।

17:57.563 --> 17:59.083
[भाई]: और अगर नहीं दिए तो?

18:01.763 --> 18:03.443
[बिलाल]: भाई जान को बता देंगे।

18:03.643 --> 18:07.003
वो तुम्हारा क्या हाल करेंगे,
कभी सोचे हो?

18:08.123 --> 18:10.123
[भाई]: अरे, हम तो मज़ाक कर रहे थे।

18:11.403 --> 18:14.123
पहले भाई जान जो काम दिए हैं ना,
वो कीजिए।

18:27.563 --> 18:29.003
[सहायिका 1]: नमस्ते, मैडम।

19:08.523 --> 19:09.683
[सरस्वती की पीए]: आप जानती हैं इसे?

19:10.363 --> 19:11.243
[सरस्वती]: हाँ।

19:11.883 --> 19:14.723
सनकी -
वसीम का ख़ास था कभी।

19:15.683 --> 19:17.803
[सरस्वती की पीए]: आप से मिलने के लिए
बवाल काटे पड़ा है।

19:18.083 --> 19:19.243
[सरस्वती]: जानते हैं।

19:20.323 --> 19:21.883
सचमुच का सनकी है।

19:22.283 --> 19:24.643
[सरस्वती की पीए]: तो मिलेंगी आप उस से?
[सरस्वती]: मिलेंगे।

19:25.763 --> 19:29.083
[सरस्वती]: इसकी आतुरता
उत्तेजना में बदलने दो पहले।

19:29.883 --> 19:31.043
[सरस्वती की पीए]: जी, मैम।

19:42.123 --> 19:45.003
[सोनम]: क्या हुआ? क्या सोच रहे हो?

19:46.203 --> 19:50.403
[भाई]: हम सोच रहे हैं, सोनम कि तुम
60 लाख रुपयों के साथ कैसी लगोगी?

19:52.323 --> 19:53.483
[सोनम]: 60 लाख रुपये?

19:53.603 --> 19:56.363
[भाई]: हाँ। हमें बहुत जल्द
मिलने वाला है 60 लाख।

19:57.683 --> 19:58.763
[सोनम]: अच्छा!

19:59.923 --> 20:02.923
हमें क्या ख़ुश रहने के लिए
पैसे की ज़रूरत है?

20:03.083 --> 20:04.683
[भाई]: तुम पागल हो क्या?

20:05.043 --> 20:06.683
अरे, मेरा वो मतलब नहीं है।

20:07.803 --> 20:08.963
तुम कहती हो ना

20:09.243 --> 20:11.563
कि हम ग़रीब हैं,
तुम अमीर हो।

20:12.243 --> 20:14.803
हमारी शादी नहीं हो सकती है।
कहती हो ना?

20:16.443 --> 20:20.083
जब 60 लाख रुपये का बड़ा सा
मकान ख़रीदेंगे ना, बड़ा सा मकान लेंगे,

20:20.723 --> 20:22.723
तब लोग समझेंगे
कि तुम भी अमीर हो।

20:23.163 --> 20:24.923
तब हमारी शादी कौन रोकेगा? बताओ।

20:25.883 --> 20:27.913
[सोनम]: ना, बाबा। हम ऐसे ही ठीक हैं।

20:27.923 --> 20:29.923
हमको तुम्हारे पैसे नहीं चाहिए।

20:37.043 --> 20:39.963
(झींगुर की आवाज़)
(क़दमों की आवाज़)

21:04.763 --> 21:05.803
[सरस्वती]: अच्छा!

21:10.003 --> 21:12.483
तुम यहाँ इतनी रात को,
वो भी ऐसे?

21:13.403 --> 21:14.363
किस ने भेजा?

21:14.963 --> 21:16.323
[सनकी]: किसी ने नहीं भेजा।

21:16.723 --> 21:18.163
दीवार फाँद के आया हूँ।

21:18.683 --> 21:21.443
[सरस्वती]: इतनी रात को
हमारे घर में घुसने का दुस्साहस किए हो,

21:22.003 --> 21:23.603
जान का डर-वर नहीं है तुम्हें?

21:23.963 --> 21:27.443
[सनकी]: अपमान की आग ने हमारे जान के डर को
कब का जला के राख कर दिया है, मैडम जी।

21:28.243 --> 21:29.563
[सरस्वती]: किस ने अपमान किया है तुम्हारा?

21:30.003 --> 21:31.723
[सनकी]: आप के गृह मंत्री -

21:32.363 --> 21:33.723
वसीम ख़ान जी ने।

21:34.363 --> 21:35.243
[सरस्वती]: तो?

21:36.043 --> 21:37.123
[सनकी]: बदला लेना है हमें।

21:37.563 --> 21:40.153
उस के घमंड को चूर करना है,
बर्बाद करना है हमें उसे

21:40.163 --> 21:42.923
और हमें मालूम है कि इस काम में
आप हमारी मदद कर सकती हैं।

21:44.723 --> 21:47.323
एक बार अपना हाथ रख दीजिए
हमारे सर पर, फिर देखिए,

21:47.683 --> 21:50.683
कैसे उस वसीम ख़ान का सर
आप के क़दमों में लाके झुकाते हैं।

21:52.563 --> 21:53.603
[सरस्वती]: सोचेंगे।

21:54.123 --> 21:55.443
अभी तुम यहाँ से निकलो।

21:55.923 --> 21:57.763
और दोबारा ऐसी हिमाक़त मत करना।

22:01.323 --> 22:02.203
ए!

22:03.363 --> 22:05.323
जहाँ से आए थे, वहाँ से।

22:28.683 --> 22:31.323
[विजय]: क्या बात है?
परेशान लग रहे हैं।

22:33.163 --> 22:34.723
[रामानंद]: अब क्या बताएँ?

22:36.763 --> 22:39.883
एक नयी संकट
सर पर मंडराती दिख रही है।

22:41.443 --> 22:43.843
उस के मोचक
तुम ही हो सकते हो, विजय।

22:45.963 --> 22:48.763
[विजय]: आप के एक आदेश पर
पूरे प्रदेश का मैप बदल सकते हैं।

22:50.283 --> 22:51.443
बताइए तो सही।

22:53.883 --> 22:57.443
[रामानंद]: अब बंसी राम जी किसी भी समय
आख़िरी साँस ले सकते हैं।

22:58.603 --> 23:00.323
और माने, उन के जाते ही

23:01.083 --> 23:04.073
उन की कुर्सी पर काबिज़ होना चाहेंगे

23:04.083 --> 23:07.083
तुम्हारे परम... वसीम ख़ान!

23:09.163 --> 23:11.633
और अगर वो सीएम बना गया तो...

23:11.643 --> 23:12.923
[विजय]: ऐसा होगा नहीं।

23:14.043 --> 23:15.643
क्योंकि हम ऐसा होने देंगे नहीं।

23:16.763 --> 23:17.923
निश्चिंत रहिए आप।

23:18.963 --> 23:21.083
अगर वो सा** सीएम की कुर्सी पर बैठ गया,

23:22.043 --> 23:24.403
तो विजय सिंह के
ज़िंदा होने का कोई मतलब नहीं है।

23:27.403 --> 23:29.243
उस के अंत की शुरुआत जल्दी होगी।

23:30.403 --> 23:33.163
और वो शुरुआत होगी
उस के ठिकानों पर कब्ज़ा करने से।

23:38.323 --> 23:39.523
[रामानंद]: अच्छा है।

23:40.323 --> 23:42.963
[विजय]: कट्टा, और असला इकट्ठा करो।

23:43.283 --> 23:45.523
जितने हथियार जहाँ-जहाँ से मिलते हैं,
वो सब को लेकर आओ।

23:46.163 --> 23:48.763
अपने भरोसेमंद लोगों से कहो
कि विजय सिंह उन्हें बुला रहा है।

23:49.883 --> 23:50.883
[कट्टा]: हो जाएगा, भैया।

23:52.563 --> 23:53.683
(बंदूक लोड करने की आवाज़)

23:56.563 --> 24:03.643
(पानी के कलकलाने की आवाज़)
(शंख के बजने की आवाज़)

24:14.763 --> 24:24.083
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

24:29.643 --> 24:30.723
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

24:40.843 --> 24:45.283
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

24:45.403 --> 24:50.283
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

24:50.643 --> 24:52.843
(बंदूकों से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

25:06.963 --> 25:11.203
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

25:11.443 --> 25:20.123
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

25:20.243 --> 25:28.883
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

25:29.003 --> 25:38.083
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त,
रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

25:43.963 --> 25:45.683
[बाबर]: अरे, ड्राइवर,
ये गाड़ी किधर लेजा रहे हो?

25:45.963 --> 25:47.403
पायलट गाड़ी तो उधर गई।

25:47.563 --> 25:49.643
[विजय]: चुपचाप बैठे रहिए, बाबर साहब।

25:50.283 --> 25:51.563
सही जगह लेके जा रहा हूँ।

25:52.843 --> 25:53.833
[बाबर]: तुम हो कौन?

25:53.843 --> 25:55.953
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

25:55.963 --> 25:58.843
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪
(गाड़ी के तेज़ी से चलने की आवाज़)

25:58.963 --> 26:00.643
[कॉन्स्टेबल]: ए!
गाड़ी ग़लत जगह जा रही है!

26:00.763 --> 26:03.323
उधर घुमा! जल्दी, जल्दी, जल्दी! पीछे घुमा!

26:03.523 --> 26:06.803
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

26:07.003 --> 26:08.953
♪रक्त, रक्त, रक्त, रक्त।♪

26:08.963 --> 26:09.963
[छुन्नू]: कट्टा!

26:10.323 --> 26:12.283
[कट्टा]: चल, ए! चल, बेटा, बाहर निकल!
[छुन्नू]: चल, बाहर निकल!

26:13.003 --> 26:14.843
[कट्टा]: अबे ए, टोपीबाज़, उठ!
(गाड़ी का दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)

26:16.083 --> 26:17.083
[कट्टा]: ए!

26:17.883 --> 26:19.003
[छुन्नू]: चल, चल, चल!
[कट्टा]: चल!

26:19.643 --> 26:20.523
[कट्टा]: इधर आ!

26:28.843 --> 26:29.963
[विजय]: भेजा उड़ा दें आप का?

26:30.483 --> 26:32.283
[बाबर]: हमारा जुर्म तो बताओ।

26:32.923 --> 26:36.563
[विजय]: आप के भतीजे वसीम ख़ान ने
हमारे चाचा को तड़पा-तड़पा कर मारा है।

26:38.763 --> 26:42.323
बाबू जी की मौत के बाद
वो हमारे पिता तुल्य थे।

26:45.563 --> 26:46.923
क्या करें आप के साथ?

26:48.443 --> 26:51.243
[बाबर]: तो तुम... विजय सिंह हो।

26:54.763 --> 26:55.763
मार दो मुझे।

26:57.323 --> 26:59.603
चाचा का बदला, चाचा।

27:03.163 --> 27:04.163
[विजय]: छुन्नू।

27:10.483 --> 27:13.283
आप को और आप के परिवार को मारना
हमारे लिए इतना ही आसान है।

27:14.243 --> 27:15.643
मगर मार नहीं सकते हम।

27:16.403 --> 27:19.763
क्योंकि फिर आप के उस नीच भतीजे वसीम ख़ान में
और हम में कोई फ़र्क नहीं रह जाएगा।

27:21.483 --> 27:23.403
आप बुज़ुर्ग हैं,
इसीलिए आप की इज़्ज़त कर रहे हैं।

27:25.683 --> 27:27.323
और रहा सवाल हमारे बदले का,

27:28.443 --> 27:30.883
वो तो एक दिन वसीम ख़ान को
मार कर हम लेंगे ही लेंगे।

27:33.843 --> 27:35.043
और एक बात।

27:36.323 --> 27:40.123
आपसी रंजिश में कभी भी परिवार को
बीच अखाड़े में लेकर नहीं आते हैं, बाबर साहब।

27:42.163 --> 27:50.043
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
