WEBVTT

00:00:07.283 --> 00:00:10.123 align:center
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)

00:00:22.163 --> 00:00:23.473 align:center
[भैया 1]: अबे!
'वर्तमान समय वाराणसी - 1987'

00:00:23.483 --> 00:00:25.603 align:center
[भैया]: अबे! ये अख़बार वाले भी
बेवक़ूफ़ हो गए हैं क्या?

00:00:26.003 --> 00:00:28.443 align:center
वही ख़बर छापते हैं,
जो सबको पहले से ही पता है।

00:00:28.923 --> 00:00:33.403 align:center
सब जानते हैं कि साहेब सिंह की मौत के बाद
फिर से चुनाव होगा, तो इसमें नया क्या है?

00:00:33.643 --> 00:00:35.713 align:center
[भैया 2]: दस दिन बाद क्या होगा?
[भैया 1]: दस दिन बाद?

00:00:35.723 --> 00:00:38.163 align:center
[भैया 1]: पुजारी सिंह भारी मतों से
विजयी होंगे। देख लेना।

00:00:38.323 --> 00:00:40.083 align:center
[भैया 2]: लगाओगे शर्त?
[भैया 1]: पाँच-पाँच रूपया।

00:00:40.203 --> 00:00:42.323 align:center
[भैया 2]: दस-दस का।
[भैया 1]: चल, दस-दस का।

00:00:42.443 --> 00:00:45.483 align:center
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!
(चिल्लाते हुए) (सीटी बजाने की आवाज़)

00:00:45.883 --> 00:00:49.233 align:center
[उद्घोषक]: पुजारी सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:00:49.243 --> 00:00:51.203 align:center
[उद्घोषक]: पुजारी सिंह...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:00:51.483 --> 00:00:53.843 align:center
[वसीम]: भाई साहब,
मैंने आपसे कहा था ना,

00:00:55.123 --> 00:00:57.363 align:center
आपकी कुर्सी आपको वापस दिलाके रहूँगा?

00:01:17.843 --> 00:01:23.843 align:center
♪मेरे जलवे जो अपनी नज़र से
एक बार देखे जो।♪

00:01:24.723 --> 00:01:30.563 align:center
♪फिर लेके फिरे मेरी फ़ोटो,
एक बार देखे जो।♪

00:01:31.523 --> 00:01:35.073 align:center
♪मेरी ब्यूटी सी अदाएँ,
दिल सबका लेके जाएँ।♪

00:01:35.083 --> 00:01:37.913 align:center
♪मेरे ठुमके के लाखों दीवाने।♪

00:01:37.923 --> 00:01:41.523 align:center
♪आग लगे महफ़िल में!♪

00:01:45.283 --> 00:01:48.163 align:center
♪लुट जाएँ कचहरी और थाने।♪

00:01:48.323 --> 00:01:51.603 align:center
♪आग लगे महफ़िल में!
आग लगे महफ़िल में!♪

00:01:51.763 --> 00:01:56.003 align:center
♪ओ, झुमकी! ज़रा पास तो आ!♪

00:01:59.043 --> 00:02:02.523 align:center
♪अरे, ओ झुमकी, तू पास तो आ।♪

00:02:02.723 --> 00:02:05.953 align:center
♪बातें ना बना, ज़रा नाच के दिखा।♪

00:02:05.963 --> 00:02:09.113 align:center
♪तेरे आशिक़ हैं हम,
हमको ना तरसा।♪

00:02:09.123 --> 00:02:10.873 align:center
♪ओ, झुमकी!♪

00:02:10.883 --> 00:02:13.843 align:center
♪छोड़ा तेरे लिए है ज़माना!♪

00:02:14.003 --> 00:02:17.923 align:center
♪आग लगे महफ़िल में!♪
[झुमकी]: अच्छा जी?

00:02:20.003 --> 00:02:22.083 align:center
♪चल, हट। चल, चल, चल।♪

00:02:24.283 --> 00:02:26.473 align:center
[छुन्नू]: जश्न मना रहा है,
इसकी माँ को चो**।

00:02:26.483 --> 00:02:29.483 align:center
♪तूने पकड़ी जो मेरी कलाई,♪

00:02:29.843 --> 00:02:32.843 align:center
♪तो होगी तेरी जग हँसाई।♪

00:02:33.283 --> 00:02:36.563 align:center
♪मारा जाएगा रे, बाँके छोरे,♪

00:02:36.723 --> 00:02:40.163 align:center
♪जो ये गोरी कमर लचकाई।♪

00:02:40.283 --> 00:02:44.833 align:center
♪बन जाएँगे...
बन जाएँगे रे अफ़साने!♪

00:02:44.843 --> 00:02:47.443 align:center
♪आग लगे महफ़िल में!♪

00:02:52.043 --> 00:02:54.963 align:center
♪लुट जाएँ कचहरी और थाने।♪

00:02:55.163 --> 00:02:58.523 align:center
♪आग लगे महफ़िल में!
आग लगे महफ़िल में!♪

00:03:00.803 --> 00:03:02.643 align:center
♪ऐसे!♪

00:03:04.723 --> 00:03:06.763 align:center
♪संभल के!♪

00:03:13.123 --> 00:03:16.083 align:center
[झुमकी]: क्या कर रहे हैं?
[इरशाद]: दोगी नहीं?

00:03:17.123 --> 00:03:18.523 align:center
[झुमकी]: क्या?

00:03:18.763 --> 00:03:20.123 align:center
[इरशाद]: प्यार!

00:03:22.443 --> 00:03:24.163 align:center
[झुमकी]: कपड़ा बदलकर आते हैं।

00:03:25.643 --> 00:03:27.203 align:center
[इरशाद]: क्या पहनोगी?

00:03:29.163 --> 00:03:30.443 align:center
[झुमकी]: क्या पहनें?

00:03:33.123 --> 00:03:34.723 align:center
[इरशाद]: साड़ी पहनो।

00:03:37.243 --> 00:03:38.443 align:center
[झुमकी]: साड़ी क्यों?

00:03:39.203 --> 00:03:41.003 align:center
[इरशाद]: उतारेंगे हम।
(मुस्कुराते हुए)

00:03:41.803 --> 00:03:42.723 align:center
[झुमकी]: हट!

00:03:42.963 --> 00:03:45.563 align:center
[इरशाद]: ऊपर के कमरे में मिलेंगे!

00:03:54.763 --> 00:03:57.523 align:center
[झुमकी]: एक बार देखे जो।
(गाते हुए)

00:03:58.043 --> 00:04:03.323 align:center
मेरे जलवे जो अपनी नज़र से एक बार देखे जो।
(गाते हुए)

00:04:15.083 --> 00:04:17.003 align:center
[इरशाद]: पास तो आ।

00:04:18.363 --> 00:04:20.763 align:center
और ना तड़पा।
(दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)

00:04:21.483 --> 00:04:25.203 align:center
झुमकी, ज़रा पास आ।

00:04:30.003 --> 00:04:31.923 align:center
झुमकी!

00:04:47.843 --> 00:04:49.283 align:center
आ गई?

00:04:49.843 --> 00:04:54.843 align:center
आओ, झुमकी। आ!
नाच तुम रही थी नीचे, थक हम गए।

00:04:55.763 --> 00:04:58.323 align:center
क्या नाचती हो तुम, झुमकी!

00:05:02.243 --> 00:05:04.723 align:center
बस ठीक है, आ जाओ।

00:05:05.603 --> 00:05:07.283 align:center
आओ। आ जाओ।

00:05:08.163 --> 00:05:09.723 align:center
अरे!
(हँसते हुए)

00:05:09.843 --> 00:05:14.563 align:center
तुम करोगी? ठीक है, आ जाओ।
वैसे भी, हम थक गए हैं। आ जाओ।

00:05:15.883 --> 00:05:16.683 align:center
आ जाओ।

00:05:21.803 --> 00:05:25.243 align:center
अरे, घूँघट तो उठाओ।
तुम घूँघट में ही बैठ गई।

00:05:26.923 --> 00:05:28.363 align:center
[इरशाद]: विजय सिंह...
[विजय]: मा****!

00:05:28.483 --> 00:05:29.723 align:center
[इरशाद]: ए!
[विजय]: ब****!

00:05:30.083 --> 00:05:32.043 align:center
(मुक्के मारने की आवाज़)
(इरशाद के कराहने की आवाज़)

00:05:33.763 --> 00:05:35.003 align:center
[इरशाद]: हट!

00:05:35.283 --> 00:05:37.643 align:center
[छुन्नू]: भैया, मार दें क्या?
[विजय]: पगला गया है क्या, छुन्नू?

00:05:38.403 --> 00:05:40.763 align:center
[विजय]: भैया के पास लेके जाना है इसको।
उठा सा** को।

00:05:41.523 --> 00:05:43.643 align:center
(गाड़ी के चलने की आवाज़)

00:05:50.323 --> 00:05:51.393 align:center
[विजय]: ले आओ।

00:05:51.403 --> 00:05:53.483 align:center
[इरशाद]: ब****! खोल, खोल!

00:05:54.563 --> 00:05:55.683 align:center
खोल!
(चिल्लाते हुए)

00:05:56.603 --> 00:05:58.883 align:center
ए, मा****, किधर लाया रे?

00:06:03.763 --> 00:06:05.363 align:center
[छुन्नू]: बैठ, मा****!

00:06:06.683 --> 00:06:08.473 align:center
[विजय]: अब बुला अपने बाप वसीम ख़ान को।

00:06:08.483 --> 00:06:10.483 align:center
[इरशाद]: क्यों? सा**!

00:06:10.643 --> 00:06:14.323 align:center
जैसे दूसरों को छुप के मारता है,
वैसे वसीम भाई को मारेगा क्या?

00:06:14.523 --> 00:06:18.643 align:center
चू** सा**!
फटती है तुम्हारी वसीम भाई से, सा**!

00:06:19.083 --> 00:06:22.113 align:center
इसलिए तो मुँह छुपाके
घूमता रहता है, सा** मा****!

00:06:22.123 --> 00:06:24.243 align:center
[विजय]: चेहरा छुपाकर वार करते हैं,

00:06:25.243 --> 00:06:28.363 align:center
लेकिन दंगों की आड़ में
किसी मासूम की हत्या नहीं करते।

00:06:28.603 --> 00:06:30.553 align:center
और तुम्हारा सा** ये वसीम ख़ान,

00:06:30.563 --> 00:06:34.123 align:center
अपने स्वार्थ के लिए धर्म का सहारा लेकर
अपने दुश्मनों को मारता है।

00:06:34.843 --> 00:06:39.483 align:center
और तुम जैसे चू** उसके साथ हैं,
जो उसे भगवान का दर्जा देते हैं, मा****।

00:06:39.723 --> 00:06:41.963 align:center
[इरशाद]: हट, मा****! हट! हट!
[छुन्नू]: बैठ!

00:06:42.163 --> 00:06:44.843 align:center
[विजय]: पहले क्या चाहिए इसका?
[इरशाद]: ए!

00:06:47.043 --> 00:06:48.873 align:center
[इरशाद]: ए, त्रिपुरारी!
[छुन्नू]: चुप!

00:06:48.883 --> 00:06:50.803 align:center
[छुन्नू]: मारिए, भैया!
[इरशाद]: ए, त्रिपुरारी! ब****!

00:06:50.923 --> 00:06:53.203 align:center
[त्रिपुरारी]: सीधा रखो। सीधा करो, सीधा करो।
[इरशाद]: ब****! नहीं!

00:06:53.403 --> 00:06:54.433 align:center
[छुन्नू]: मारिए, भैया!
[इरशाद]: नहीं, ब****!

00:06:54.443 --> 00:06:55.673 align:center
[त्रिपुरारी]: हाथ काटे थे ना?

00:06:55.683 --> 00:06:57.243 align:center
[इरशाद]: ए! नहीं!
(चिल्लाते हुए)

00:06:57.363 --> 00:06:58.923 align:center
[त्रिपुरारी]: हम सब काटेंगे।
[इरशाद]: नहीं! (चिल्लाते हुए)

00:06:59.043 --> 00:07:02.513 align:center
(तलवार से वार करने की आवाज़)
(इरशाद के कराहने की आवाज़)

00:07:02.523 --> 00:07:04.243 align:center
[छुन्नू]: हट, मा****!

00:07:06.523 --> 00:07:07.323 align:center
हट!
(चिल्लाते हुए)

00:07:08.883 --> 00:07:11.483 align:center
[सुशील]: ए, तुम कैसे कर रहे हो?
ज़रा इसको इधर उठाओ।

00:07:11.683 --> 00:07:14.763 align:center
वहाँ लगाओ। हाँ, डालो।
यहाँ गिराओ, यहाँ पे।

00:07:22.963 --> 00:07:24.393 align:center
[वसीम]: बुलाओ इसे। नाम क्या है?

00:07:24.403 --> 00:07:26.883 align:center
[बिलाल]: ए, सुशील! इधर आओ।

00:07:27.683 --> 00:07:28.963 align:center
[सुशील]: हाँ। जी, सर?

00:07:29.083 --> 00:07:31.283 align:center
[वसीम]: ये सड़क कितने साल चलेगी?
[सुशील]: दस साल भर चल जाएगा, सर।

00:07:31.883 --> 00:07:33.043 align:center
[वसीम]: चू**!

00:07:34.483 --> 00:07:35.963 align:center
[वसीम]: एक बात समझो।
[सुशील]: जी।

00:07:36.083 --> 00:07:38.923 align:center
[वसीम]: ये सरकार जो है,
वो दुधारू गाय होती है।

00:07:39.643 --> 00:07:42.443 align:center
तुम क्या सारा दूध
एक ही बार में दुह लोगे? हाँ?

00:07:44.003 --> 00:07:47.243 align:center
[वसीम]: डामर पतला करो, गिट्टी थोड़ी कम डालो।
[सुशील]: जी, सर।

00:07:47.643 --> 00:07:49.803 align:center
[वसीम]: अगले साल ये सड़क
फिर ख़राब होनी चाहिए।

00:07:50.203 --> 00:07:53.283 align:center
फिर इसका टेंडर निकलेगा
और वो टेंडर किसे मिलेगा?

00:07:53.803 --> 00:07:55.403 align:center
[बिलाल]: हमको। हूँ?

00:07:55.683 --> 00:07:56.633 align:center
[वसीम]: समझे?
[सुशील]: जी, सर जी।

00:07:56.643 --> 00:07:57.523 align:center
[वसीम]: चलो।

00:07:57.923 --> 00:08:01.083 align:center
[सुशील]: चल रे! डामर पतला कर!
डामर पतला कर, सोनू!

00:08:02.643 --> 00:08:05.883 align:center
(डंपर के चलने की आवाज़)

00:08:14.643 --> 00:08:15.803 align:center
[बिलाल]: भाई!

00:08:17.283 --> 00:08:18.603 align:center
भाई!
(चिल्लाते हुए)

00:08:23.603 --> 00:08:30.203 align:center
(डंपर से ज़मीन पर मिट्टी गिरने की आवाज़)
(शंख के बजने की आवाज़)

00:09:04.963 --> 00:09:06.683 align:center
[इरशाद के अब्बू]: वसीम भाई,
(रोते हुए)

00:09:06.923 --> 00:09:11.843 align:center
हमें तो लगता था,
मेरे इरशाद को कोई छू नहीं सकता, (रोते हुए)

00:09:12.843 --> 00:09:16.243 align:center
क्योंकि आपके हाथ उसके सर पर थे।
(रोते हुए)

00:09:16.403 --> 00:09:19.793 align:center
लेकिन... लेकिन ये क्या हो गया, वसीम भाई?
(रोते हुए)

00:09:19.803 --> 00:09:21.483 align:center
ये क्या हो गया?
(रोते हुए)

00:09:21.843 --> 00:09:23.843 align:center
(इरशाद के अब्बू के रोने की आवाज़)

00:09:36.203 --> 00:09:37.883 align:center
[गार्ड]: ए, ए, ए, भैया!
[विजय]: ए!

00:09:38.603 --> 00:09:40.113 align:center
[गार्ड]: कहाँ? कहाँ?
[विजय]: दो घंटे से बिठाया हुआ है।

00:09:40.123 --> 00:09:42.603 align:center
[विजय]: मुजरा चल रहा है अंदर, हाँ?
हट, मा****! (दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

00:09:43.963 --> 00:09:45.283 align:center
ए, छुन्नू, देख कहाँ है।

00:09:46.403 --> 00:09:47.523 align:center
देख।

00:09:51.883 --> 00:09:53.363 align:center
[छुन्नू]: ये तो हग रहा है, चू**।

00:09:54.803 --> 00:09:56.203 align:center
[विजय]: खोल, सा**!
(दरवाज़े पर लात मारने की आवाज़)

00:10:00.563 --> 00:10:02.923 align:center
[कर्मचारी 1]: भाई,
क्या किसी को हगने नहीं दोगे क्या?

00:10:03.243 --> 00:10:06.483 align:center
[कर्मचारी 1]: कौन हो तुम लोग?
[विजय]: विजय सिंह के आदमी हैं हम।

00:10:08.603 --> 00:10:10.923 align:center
[विजय]: चलिए,
सिंचाई विभाग के बड़े बाबू लोग!

00:10:11.203 --> 00:10:12.833 align:center
काम बंद।
थोड़ा सा मध्यांतर लो।

00:10:12.843 --> 00:10:14.873 align:center
[कर्मचारी 2]: आप लोग कौन हैं?
[विजय]: अरे, बैठिए।

00:10:14.883 --> 00:10:15.803 align:center
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

00:10:16.083 --> 00:10:17.363 align:center
[विजय]: बैठिए!

00:10:17.683 --> 00:10:20.003 align:center
[त्रिपुरारी]: अरे, ढूँढ़, ढूँढ़, ढूँढ़।
[विजय]: कहाँ है फ़ाइल?

00:10:20.323 --> 00:10:22.883 align:center
[विजय]: ए, छुन्नू! इसमें देखो।
देखो इसमें।

00:10:39.443 --> 00:10:40.563 align:center
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

00:10:56.403 --> 00:11:00.283 align:center
[विजय]: ए, भाई, जल्दी-जल्दी हाथ चलाइए।
सामान पहुँचवाना है रात तक। हाँ!

00:11:00.963 --> 00:11:02.483 align:center
ठीक से कीजिए इसको।
इधर डालिए।

00:11:02.723 --> 00:11:06.603 align:center
[आदमी 1]: तीन दिन पहले गोरखपुर में
नक़ली शराब से बीस लोग मर गए थे।

00:11:07.003 --> 00:11:09.163 align:center
तब से शासन बड़ा चौकन्ना हो गया है।

00:11:09.403 --> 00:11:11.043 align:center
[विजय]: क्या बात कर रहे हो?

00:11:11.643 --> 00:11:14.603 align:center
[विजय]: कहाँ का शासन चौकन्ना हो गया है?
[आदमी 1]: गोरखपुर, भैया।

00:11:16.723 --> 00:11:18.803 align:center
[विजय]: नक़ली शराब पीने से?
[आदमी 1]: हाँ, हाँ।

00:11:18.923 --> 00:11:19.643 align:center
[विजय]: तो?

00:11:19.763 --> 00:11:21.353 align:center
[आदमी 1]: नहीं, भैया,
हम तो बस कह रहे थे...

00:11:21.363 --> 00:11:22.713 align:center
[विजय]: हाँ?
[आदमी 1]: सावधानी बरतने के लिए।

00:11:22.723 --> 00:11:25.033 align:center
[विजय]: यहाँ सब काम सावधानी से होता है।
तुमको विश्वास नहीं होता?

00:11:25.043 --> 00:11:26.193 align:center
[विजय]: ए, किशोर!
[किशोर]: जी, भैया?

00:11:26.203 --> 00:11:27.083 align:center
[विजय]: दो ज़रा।

00:11:27.723 --> 00:11:29.683 align:center
[आदमी 1]: भैया... भैया, हम तो ऐसे ही...
[विजय]: तुम्हारे सामने ये ताज़ा-ताज़ा बनाया है।

00:11:29.803 --> 00:11:31.483 align:center
[विजय]: पीके तुम को बताते हैं। देखो।

00:11:34.923 --> 00:11:36.603 align:center
[विजय]: कुछ हुआ हमको?
[आदमी 1]: नहीं, भैया।

00:11:53.003 --> 00:11:54.833 align:center
[छुन्नू]: अरे, क्या कर रहे हो?
आग थोड़ा ठीक से जलाओ।

00:11:54.843 --> 00:11:56.883 align:center
ये देखो, सब ठंडा पड़ा है।
ठीक से जलाओ।

00:11:58.203 --> 00:11:59.683 align:center
अरे, ऐसे नहीं!

00:12:05.443 --> 00:12:06.513 align:center
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

00:12:06.523 --> 00:12:09.043 align:center
[पुजारी]: बाक़ी का तुम देख लो। ठीक है?
[पीए]: ठीक है।

00:12:10.283 --> 00:12:11.723 align:center
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

00:12:12.723 --> 00:12:14.523 align:center
[पुजारी]: हेलो?
[ठेकेदार]: प्रणाम, पुजारी जी।

00:12:14.643 --> 00:12:15.923 align:center
[ठेकेदार]: ट्रकें पहुँची नहीं अब तक।

00:12:16.243 --> 00:12:19.033 align:center
अगर ट्रकें नहीं पहुँची,
तो कोयला आएगा कैसे?

00:12:19.043 --> 00:12:21.443 align:center
[पुजारी]: ठीक है,
मैं वसीम से बात करता हूँ।

00:12:29.123 --> 00:12:33.043 align:center
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

00:12:34.763 --> 00:12:36.763 align:center
[पुजारी]: वसीम।
[वसीम]: जी, भाई साहब।

00:12:37.243 --> 00:12:39.403 align:center
[पुजारी]: ये कोयला कब तक पहुँचेगा?

00:12:40.563 --> 00:12:42.483 align:center
[वसीम]: मैं जानता हूँ
इस बार थोड़ी देर हो गई है।

00:12:43.043 --> 00:12:44.683 align:center
लेकिन मैंने बिलाल से कह दिया है।

00:12:45.043 --> 00:12:47.643 align:center
अस्सी ट्रक भरकर कोयला
परसों तक मंडी में होगा।

00:12:48.083 --> 00:12:49.313 align:center
[पुजारी]: अ...

00:12:49.323 --> 00:12:54.323 align:center
वसीम, मैं जानता हूँ
इस वक़्त तुम्हारे दिमाग़ में क्या चल रहा है।

00:12:56.163 --> 00:12:58.353 align:center
लेकिन धंधा ज़रूरी है।

00:12:58.363 --> 00:13:00.323 align:center
बदला लेने के लिए भी वक़्त मिल जाएगा।

00:13:01.083 --> 00:13:02.403 align:center
थोड़ा इंतज़ार कर लो।

00:13:03.643 --> 00:13:06.083 align:center
[वसीम]: इंतज़ार सिर्फ़ मौत का किया जाता है,
भाई साहब,

00:13:07.043 --> 00:13:08.683 align:center
सही वक़्त का नहीं।

00:13:09.683 --> 00:13:12.683 align:center
और सच कहूँ तो,
अब आपकी ये जो खोखली राजनीती है ना,

00:13:13.443 --> 00:13:15.683 align:center
मेरे सम्मान को चोट पहुँचाने लगी है।

00:13:18.203 --> 00:13:19.283 align:center
रखता हूँ।

00:13:32.843 --> 00:13:35.083 align:center
[ठाकुर]: शेर अगर बूढ़ा भी हो जाए,

00:13:37.003 --> 00:13:39.163 align:center
तो कोई दिक्क़त नहीं है, पुजारी बाबू।

00:13:40.963 --> 00:13:44.683 align:center
दिक्क़त तो तब होती है,
जब शेर शेरों वाली हरकत ही करना छोड़ दे।

00:13:45.483 --> 00:13:49.473 align:center
[पुजारी]: ठाकुर साहब, यहाँ हम आपके पास
अपनी समस्या का समाधान करवाने आए हैं

00:13:49.483 --> 00:13:51.203 align:center
और आप ज्ञान दे रहे हैं।

00:13:51.603 --> 00:13:54.003 align:center
अरे, ज्ञान लेने के लिए तो
इलाहाबाद में कुंभ में

00:13:54.123 --> 00:13:56.483 align:center
हम बाबा जी के पास
हर छह साल में जाते हैं।

00:13:56.723 --> 00:13:59.043 align:center
[ठाकुर]: हम कह रहे हैं
वसीम का हाथ क्यों नहीं छोड़ रहे हैं आप?

00:14:01.243 --> 00:14:05.043 align:center
पुजारी जी, जहाँ बात पैसे और ताक़त की है ना,
वहाँ विजय को पकड़िए आप।

00:14:06.643 --> 00:14:10.243 align:center
विजय सिंह आपके वसीम के सर पे चढ़ के
मूतना शुरू कर चुका है।

00:14:11.963 --> 00:14:15.243 align:center
मेरी बात मान लीजिए।
विजय सिंह का हाथ पकड़ लीजिए।

00:14:17.203 --> 00:14:19.033 align:center
(पुजारी के हँसने की आवाज़)

00:14:19.043 --> 00:14:20.443 align:center
[ठाकुर]: ये हँसी क्यों आ रही है?

00:14:22.443 --> 00:14:25.083 align:center
[ठाकुर]: मज़ाक हो रहा है यहाँ पे?
[पुजारी]: आपको क्या लगता है

00:14:26.523 --> 00:14:29.003 align:center
[पुजारी]: कि पार्टी वसीम को किनारे लगाकर

00:14:29.363 --> 00:14:31.713 align:center
अगर विजय का हाथ थाम लेगी,
तो सब कुछ ठीक हो जाएगा?

00:14:31.723 --> 00:14:34.883 align:center
[ठाकुर]: भई, मुझे क्या लगता है,
क्या नहीं लगता है, ये मायने नहीं रखता है।

00:14:36.763 --> 00:14:38.243 align:center
पार्टी को तो ऐसा लगता है।

00:14:39.963 --> 00:14:42.803 align:center
और मुख्यमंत्री जी भी कुछ ऐसा ही चाहते हैं।

00:14:45.403 --> 00:14:48.643 align:center
ब्रिजशंकर तिवारी को
विजय सिंह चुनौती दे सकता है।

00:14:50.963 --> 00:14:52.683 align:center
लड़के में दम है बहुत।

00:14:53.003 --> 00:14:55.523 align:center
[पुजारी]: ठाकुर साहब,
एक सलाह देता हूँ मैं आपको।

00:14:56.803 --> 00:14:59.803 align:center
अब ग़लती से
ये बात आपके दिमाग़ में तो आ गई है।

00:15:00.283 --> 00:15:04.163 align:center
लेकिन भूलकर भी आप ये बात
अपने दिमाग़ से बाहर मत निकालिएगा।

00:15:04.763 --> 00:15:08.393 align:center
अगर वसीम को भनक तक लग गई ना
कि आपके दिमाग़ में ऐसा कुछ चल रहा है,

00:15:08.403 --> 00:15:10.923 align:center
तो आप सोच भी नहीं सकते
कि आपके साथ क्या हो सकता है।

00:15:12.283 --> 00:15:14.963 align:center
और हाँ!
जाते-जाते मैं एक बात और बता दूँ आपको।

00:15:15.923 --> 00:15:19.043 align:center
आप मुख्यमंत्री जी को
मेरा ये संदेश दे दीजिएगा

00:15:19.283 --> 00:15:22.323 align:center
कि मेरे बाग़ीचे में बीस फूल हैं।

00:15:23.923 --> 00:15:26.203 align:center
उनका क्या करना है,
वो मुझे बता दें।

00:15:35.603 --> 00:15:38.003 align:center
[ठेकेदार 2]: कच्चा कोयला कोई ले नहीं रहा है।

00:15:38.523 --> 00:15:40.043 align:center
सबको पक्का कोयला चाहिए।

00:15:40.723 --> 00:15:45.203 align:center
अगर आपसे कोयला ख़रीदकर हम उसे बेच भी ना पाएँ,
तो फिर फ़ायदा क्या हुआ, वसीम साहब?

00:15:45.523 --> 00:15:47.283 align:center
[आदमी 2]: हार्ड कोक कहते हैं उसे सब।

00:15:47.483 --> 00:15:50.283 align:center
बनाना आसान है, लेकिन...

00:15:50.803 --> 00:15:51.873 align:center
[वसीम]: लेकिन क्या?

00:15:51.883 --> 00:15:54.883 align:center
[आदमी 2]: हार्ड कोक बनाने के लिए
सरकारी लाइसेंस की ज़रूरत पड़ती है।

00:15:55.123 --> 00:15:58.323 align:center
पर्यावरण विभाग और ना जाने क्या-क्या।

00:16:00.923 --> 00:16:02.723 align:center
[वसीम]: अगली बार हम भी
आपको पक्का कोयला देंगे।

00:16:03.763 --> 00:16:06.123 align:center
और रही सरकार की बात,
तो उसकी चिंता आप मत कीजिए।

00:16:07.243 --> 00:16:11.083 align:center
आप बस इस बात का ध्यान रखिएगा
कि कोयला आप हम ही से लेंगे।

00:16:11.603 --> 00:16:12.883 align:center
समझे?

00:16:13.803 --> 00:16:15.923 align:center
[वसीम]: चलिए।
[ठेकदार]: जी, वसीम साहब।

00:16:19.683 --> 00:16:21.683 align:center
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)

00:16:23.203 --> 00:16:25.923 align:center
[विजय]: भैया, वो बिहार का
सारा ट्रक का इंतज़ाम हो गया ना?

00:16:26.563 --> 00:16:29.763 align:center
[त्रिपुरारी]: हाँ, हो गया।
सीमा पे सब इंतज़ाम है।

00:16:30.323 --> 00:16:32.163 align:center
सब अपने लोग हैं। हो जाएगा।

00:16:33.003 --> 00:16:34.523 align:center
[छुन्नू]: भैया।
[विजय]: हूँ?

00:16:36.323 --> 00:16:38.883 align:center
[छुन्नू]: वो... आज माल बहुत कम बना।

00:16:39.123 --> 00:16:41.283 align:center
[विजय]: कम बना? क्यों?

00:16:41.763 --> 00:16:45.083 align:center
[छुन्नू]: पता नहीं, भट्टी को गर्म होने में
बहुत ज़्यादा समय लग रहा है।

00:16:45.923 --> 00:16:49.203 align:center
सा**, कोयले में से धुआँ ही धुआँ निकल रहा है,
आग तो दिख ही नहीं रहा है।

00:16:50.243 --> 00:16:54.203 align:center
हमें तो लग रहा है कि शराब की तरह
कोयला भी नक़ली आने लगा है शायद?

00:16:55.683 --> 00:16:56.923 align:center
[त्रिपुरारी]: एक आदमी है।

00:16:57.763 --> 00:16:58.843 align:center
पता करते हैं।

00:17:06.123 --> 00:17:08.763 align:center
[रतन]: क्या है ये झोल?
इतना लोडिंग होता है?

00:17:09.363 --> 00:17:10.683 align:center
इतना कम-कम क्यों है, बे?

00:17:11.043 --> 00:17:12.443 align:center
जा, लेके जा।
ठीक से करा।

00:17:13.363 --> 00:17:15.003 align:center
[बिलाल]: क्यों, रतन सिंह?

00:17:16.283 --> 00:17:17.563 align:center
क्या, बे? क्या सोचे?

00:17:18.043 --> 00:17:21.843 align:center
[रतन]: सोचेंगे क्या?
हार्ड कोक का दाम हम तय करेंगे।

00:17:22.763 --> 00:17:24.243 align:center
समझ में आए तो बोलो।

00:17:24.443 --> 00:17:28.363 align:center
कच्चा कोयला वसीम का
और पक्का करके हम देंगे। समझे?

00:17:28.483 --> 00:17:31.403 align:center
[बिलाल]: अरे, शाबाश! जियो, राजा।

00:17:31.963 --> 00:17:34.883 align:center
भो** के!
तू किससे बात कर रहा है तुझे मालूम है?

00:17:35.403 --> 00:17:37.763 align:center
रेट तू तय करेगा, मा****!

00:17:38.283 --> 00:17:39.443 align:center
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)
(बिलाल के कराहने की आवाज़)

00:17:42.683 --> 00:17:43.843 align:center
[सनकी]: ए!

00:17:54.803 --> 00:17:57.443 align:center
अबे ए,
फटे निरोध के नतीजे!

00:18:00.163 --> 00:18:02.403 align:center
हार्ड कोक का रेट हम तय करेंगे।

00:18:03.403 --> 00:18:05.363 align:center
जाके बोल देना अपने बाप को।

00:18:10.123 --> 00:18:12.643 align:center
और जो ये चू** की फ़ौज इकट्ठी की है ना,

00:18:13.723 --> 00:18:15.923 align:center
पहले इनको लं** खड़ा करना सिखा।

00:18:17.923 --> 00:18:19.283 align:center
चल भाग, भो** के!

00:18:19.883 --> 00:18:22.443 align:center
भाग! उधर क्या देख रहा है?

00:18:27.283 --> 00:18:30.443 align:center
(सनकी के हँसने की आवाज़)

00:18:33.043 --> 00:18:34.713 align:center
[त्रिपुरारी]: ये कोयला नक़ली भी होता है क्या?

00:18:34.723 --> 00:18:36.403 align:center
[करिया]: नहीं। नक़ली नहीं होता।

00:18:36.723 --> 00:18:40.203 align:center
[विजय]: चाचा, जब नक़ली नहीं होता,
तो आपका वाला कोयला जलता क्यों नहीं है?

00:18:40.763 --> 00:18:42.283 align:center
इतना धुआँ क्यों देता है, सा**?

00:18:42.443 --> 00:18:45.603 align:center
[करिया]: धुआँ इसलिए देता है...
कि ये कोयला कच्चा है।

00:18:51.883 --> 00:18:53.803 align:center
[विजय]: कच्चा कोयला?
[चाचा]: हूँ।

00:18:54.163 --> 00:18:57.803 align:center
[विजय]: ये कच्चा कोयला क्या होता है,
करिया चाचा? ज़रा विस्तार में बताइए हमको।

00:18:58.163 --> 00:19:01.163 align:center
[करिया]: जो कोयला खदानों से निकलता है,
वो कच्चा होता है।

00:19:01.843 --> 00:19:03.563 align:center
देखो,
कोयला कई किस्म का होता है।

00:19:03.963 --> 00:19:05.723 align:center
हर किस्म की अपनी ख़ासियत होती है।

00:19:06.123 --> 00:19:09.643 align:center
और उसकी ख़ासियत के हिसाब से
उस कोयले का दाम होता है।

00:19:09.883 --> 00:19:13.643 align:center
कच्चे कोयले को भट्टी में पकाकर
पक्का कोयला बनाया जाता है।

00:19:15.003 --> 00:19:17.003 align:center
और इसका भी दाम अलग से होता है।

00:19:17.723 --> 00:19:19.593 align:center
कोयला लाने के लिए ट्रक लगती है।

00:19:19.603 --> 00:19:22.513 align:center
एक नहीं, दो नहीं, कई सौ ट्रक।

00:19:22.523 --> 00:19:24.163 align:center
इन ट्रकों का भी ठेका होता है।

00:19:25.083 --> 00:19:26.953 align:center
इन ट्रकों से कोयले की चोरी होती है।

00:19:26.963 --> 00:19:28.513 align:center
वज़न कम-ज़यादा करके।

00:19:28.523 --> 00:19:30.883 align:center
और ये सब धर्मकाँटा पर होता है।

00:19:31.003 --> 00:19:33.723 align:center
(लोगों के बड़बड़ाने की आवाज़)

00:19:33.883 --> 00:19:35.163 align:center
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

00:19:36.883 --> 00:19:39.043 align:center
[बिलाल]: आज का भाव सात सौ रूपया।

00:19:39.243 --> 00:19:41.083 align:center
[बिलाल]: कितना? सात सौ।
[आदमी 3]: सात सौ रूपया।

00:19:41.203 --> 00:19:44.603 align:center
[बिलाल]: आज का भाव सात सौ रूपया! फाइनल!

00:19:45.803 --> 00:19:48.243 align:center
[करिया]: और ये सारा काम
नकद पैसों में होता है।

00:19:48.683 --> 00:19:51.843 align:center
और पैसे... पैसे बोरों में आते हैं।

00:19:56.563 --> 00:19:58.563 align:center
[विजय]: चाचा,
इस धंधे का बाप कौन है?

00:20:01.803 --> 00:20:04.723 align:center
[करिया]: इस धंधे का बाप वसीम ख़ान

00:20:05.043 --> 00:20:06.643 align:center
और पुजारी सिंह है।

00:20:14.483 --> 00:20:16.043 align:center
[वसीम]: क्यों, भो** के?

00:20:16.523 --> 00:20:19.323 align:center
आजकल वसीम ख़ान से गाँ** फटना
बंद हो गया क्या?

00:20:19.803 --> 00:20:21.683 align:center
ज़बान कुछ ज़्यादा ही चल रही है तेरी!

00:20:22.203 --> 00:20:24.043 align:center
[वसीम]: हाँ?
[ठेकदार 3]: ऐसी बात नहीं है, भाई जान।

00:20:24.283 --> 00:20:25.753 align:center
[ठेकेदार 3]: कोई भीगा कोयला
ख़रीद ही नहीं रहा है।

00:20:25.763 --> 00:20:27.603 align:center
[वसीम]: भीगा कोयला नहीं ख़रीद रहा है?

00:20:28.203 --> 00:20:30.523 align:center
तो, उसे कहो कि अपनी पतलून उतारकर

00:20:31.003 --> 00:20:33.043 align:center
अपनी गाँ** कोयले पर टिका दे।

00:20:33.403 --> 00:20:35.203 align:center
कोयला अपने आप सूख जाएगा।

00:20:36.083 --> 00:20:38.403 align:center
[वसीम]: और एक बात बता देना, भो** वाले को।
[ठेकदार 3]: जी।

00:20:39.043 --> 00:20:42.683 align:center
[वसीम]: कि मेरे अलावा
किसी और से कोयला ले नहीं पाएगा वो।

00:20:43.003 --> 00:20:45.923 align:center
[ठेकेदार 3]: जी, भाई जान।
[वसीम]: मा****!

00:20:54.843 --> 00:20:56.003 align:center
[वसीम]: नाम क्या है?

00:20:57.963 --> 00:20:58.883 align:center
[सनकी]: पांडे।

00:20:59.803 --> 00:21:01.163 align:center
सनकी पांडे!

00:21:20.803 --> 00:21:22.043 align:center
[रतन]: दिमाग़ ख़राब है तेरा!

00:21:22.923 --> 00:21:24.923 align:center
फ़ालतू का काम नहीं करने का।
जाओ, जाओ!

00:21:25.243 --> 00:21:28.043 align:center
चलो, काम करो अपना!
फ़ालतू वाला काम करते हो!

00:21:28.163 --> 00:21:32.203 align:center
(डंपर के चलने की आवाज़)

00:21:32.483 --> 00:21:34.763 align:center
(कोयले को ज़मीन पर गिराने की आवाज़)
(रतन के कराहने की आवाज़)

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[सनकी]: ए!

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कोयला सारा भट्टी में डालो! चलो।

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'15 साल पहले'

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[ठेकदार 5]: ए! कहाँ जा रहा है, बे?
[सनकी]: मूतना है!

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[ठेकदार 5]: भाग, सा**! बैठ चुपचाप!

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सा**, गाँ** एक जगह टिकती ही नहीं है!
हगना, मूतना सब यहीं कर!

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कामचोर, साला!

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अरे, अरे! क्या कर रहा है, मा****?

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[सनकी]: तुमने ही तो कहा मूतने के लिए,
इसलिए मूत रहे हैं।

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[ठेकदार 5]: भाग! भाग, सा**!
(चिल्लाते हुए)

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[सनकी]: ये कारीगरी अपनी गाँ** में डाल ले!
[ठेकदार 9]: भाग, सा**! भो** के!

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[ठेकदार 5]: सनकी सा**!

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[भाभी 5]: साहब, हम तो ख़ुद ही परेशान हैं।
दो दिन से हमारा आदमी घर नहीं आया है।

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अब आप ही बताइए ना,
क्या करें हम?

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हमारे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।
अरे...

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अरे, हमारा आदमी किधर गया,
हमें कुछ भी ख़ुद ही नहीं मालूम।

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(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

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'वर्तमान समय वाराणसी - 1987'

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[विजय]: बंद कराओ रे सारा काम यहाँ पे।
सबको इकट्ठा करो एक-एक करके।

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बीच में लेके आओ।

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[छुन्नू]: ए, भो** के! काम बंद करो, बे!

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[छुनू]: बंद करो!
[बेचैन]: चलो!

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[छुन्नू]: नीचे, नीचे, नीचे, नीचे।
[बेचैन]: आज से इस कोयला मंडी में

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[बेचैन]: कोयले का दाम विजय सिंह तय करेगा।

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आज से धंधा सिर्फ़ और सिर्फ़
विजय सिंह के साथ होगा।

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और अगर आज के बाद तुम लोगों में से
किसी ने वसीम के साथ धंधा किया ना,

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तो यहीं उसकी हड्डियों को तोड़ूँगा,
उसका चूरा बनाके इसी कोयले मंडी में

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कोयला बनाके बेचूँगा।

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कच्चा हो या पक्का,

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कोयला सिर्फ़ विजय सिंह का होगा!

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[वसीम]: पक्के कोयले का देखो क्या करना है।

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ये कोयले का मुझे सुनना नहीं है आगे से।

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[गुंडा 1]: भैया, वो विजय का आदमी
कोयला मंडी में कब्ज़ा जमाने पहुँच गया है।

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[वसीम]: मा****!
उसका जनाज़ा निकालूँगा आज मैं!

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चल!

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(गाड़ियों के चलने की आवाज़)

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[पुजारी]: अब वो विजय सिंह
कोयले पर भी अपनी आँख लगा रहा है!

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एक बात याद रखना, वसीम!

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ये ठेके मैंने तुम्हें इसलिए दिलवाए थे,

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क्योंकि जो दहशत आज विजय पैदा कर रहा है,

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वो कभी तुम पैदा किया करते थे!
(चिल्लाते हुए)

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[वसीम]: तू विजय को मारेगा मेरे लिए।

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(बम धमाके की आवाज़)

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[सनकी]: ओए! भाग, सा**!
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

