WEBVTT

00:07.283 --> 00:10.123
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)

00:22.163 --> 00:23.473
[भैया 1]: अबे!
'वर्तमान समय वाराणसी - 1987'

00:23.483 --> 00:25.603
[भैया]: अबे! ये अख़बार वाले भी
बेवक़ूफ़ हो गए हैं क्या?

00:26.003 --> 00:28.443
वही ख़बर छापते हैं,
जो सबको पहले से ही पता है।

00:28.923 --> 00:33.403
सब जानते हैं कि साहेब सिंह की मौत के बाद
फिर से चुनाव होगा, तो इसमें नया क्या है?

00:33.643 --> 00:35.713
[भैया 2]: दस दिन बाद क्या होगा?
[भैया 1]: दस दिन बाद?

00:35.723 --> 00:38.163
[भैया 1]: पुजारी सिंह भारी मतों से
विजयी होंगे। देख लेना।

00:38.323 --> 00:40.083
[भैया 2]: लगाओगे शर्त?
[भैया 1]: पाँच-पाँच रूपया।

00:40.203 --> 00:42.323
[भैया 2]: दस-दस का।
[भैया 1]: चल, दस-दस का।

00:42.443 --> 00:45.483
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!
(चिल्लाते हुए) (सीटी बजाने की आवाज़)

00:45.883 --> 00:49.233
[उद्घोषक]: पुजारी सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:49.243 --> 00:51.203
[उद्घोषक]: पुजारी सिंह...
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:51.483 --> 00:53.843
[वसीम]: भाई साहब,
मैंने आपसे कहा था ना,

00:55.123 --> 00:57.363
आपकी कुर्सी आपको वापस दिलाके रहूँगा?

01:17.843 --> 01:23.843
♪मेरे जलवे जो अपनी नज़र से
एक बार देखे जो।♪

01:24.723 --> 01:30.563
♪फिर लेके फिरे मेरी फ़ोटो,
एक बार देखे जो।♪

01:31.523 --> 01:35.073
♪मेरी ब्यूटी सी अदाएँ,
दिल सबका लेके जाएँ।♪

01:35.083 --> 01:37.913
♪मेरे ठुमके के लाखों दीवाने।♪

01:37.923 --> 01:41.523
♪आग लगे महफ़िल में!♪

01:45.283 --> 01:48.163
♪लुट जाएँ कचहरी और थाने।♪

01:48.323 --> 01:51.603
♪आग लगे महफ़िल में!
आग लगे महफ़िल में!♪

01:51.763 --> 01:56.003
♪ओ, झुमकी! ज़रा पास तो आ!♪

01:59.043 --> 02:02.523
♪अरे, ओ झुमकी, तू पास तो आ।♪

02:02.723 --> 02:05.953
♪बातें ना बना, ज़रा नाच के दिखा।♪

02:05.963 --> 02:09.113
♪तेरे आशिक़ हैं हम,
हमको ना तरसा।♪

02:09.123 --> 02:10.873
♪ओ, झुमकी!♪

02:10.883 --> 02:13.843
♪छोड़ा तेरे लिए है ज़माना!♪

02:14.003 --> 02:17.923
♪आग लगे महफ़िल में!♪
[झुमकी]: अच्छा जी?

02:20.003 --> 02:22.083
♪चल, हट। चल, चल, चल।♪

02:24.283 --> 02:26.473
[छुन्नू]: जश्न मना रहा है,
इसकी माँ को चो**।

02:26.483 --> 02:29.483
♪तूने पकड़ी जो मेरी कलाई,♪

02:29.843 --> 02:32.843
♪तो होगी तेरी जग हँसाई।♪

02:33.283 --> 02:36.563
♪मारा जाएगा रे, बाँके छोरे,♪

02:36.723 --> 02:40.163
♪जो ये गोरी कमर लचकाई।♪

02:40.283 --> 02:44.833
♪बन जाएँगे...
बन जाएँगे रे अफ़साने!♪

02:44.843 --> 02:47.443
♪आग लगे महफ़िल में!♪

02:52.043 --> 02:54.963
♪लुट जाएँ कचहरी और थाने।♪

02:55.163 --> 02:58.523
♪आग लगे महफ़िल में!
आग लगे महफ़िल में!♪

03:00.803 --> 03:02.643
♪ऐसे!♪

03:04.723 --> 03:06.763
♪संभल के!♪

03:13.123 --> 03:16.083
[झुमकी]: क्या कर रहे हैं?
[इरशाद]: दोगी नहीं?

03:17.123 --> 03:18.523
[झुमकी]: क्या?

03:18.763 --> 03:20.123
[इरशाद]: प्यार!

03:22.443 --> 03:24.163
[झुमकी]: कपड़ा बदलकर आते हैं।

03:25.643 --> 03:27.203
[इरशाद]: क्या पहनोगी?

03:29.163 --> 03:30.443
[झुमकी]: क्या पहनें?

03:33.123 --> 03:34.723
[इरशाद]: साड़ी पहनो।

03:37.243 --> 03:38.443
[झुमकी]: साड़ी क्यों?

03:39.203 --> 03:41.003
[इरशाद]: उतारेंगे हम।
(मुस्कुराते हुए)

03:41.803 --> 03:42.723
[झुमकी]: हट!

03:42.963 --> 03:45.563
[इरशाद]: ऊपर के कमरे में मिलेंगे!

03:54.763 --> 03:57.523
[झुमकी]: एक बार देखे जो।
(गाते हुए)

03:58.043 --> 04:03.323
मेरे जलवे जो अपनी नज़र से एक बार देखे जो।
(गाते हुए)

04:15.083 --> 04:17.003
[इरशाद]: पास तो आ।

04:18.363 --> 04:20.763
और ना तड़पा।
(दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)

04:21.483 --> 04:25.203
झुमकी, ज़रा पास आ।

04:30.003 --> 04:31.923
झुमकी!

04:47.843 --> 04:49.283
आ गई?

04:49.843 --> 04:54.843
आओ, झुमकी। आ!
नाच तुम रही थी नीचे, थक हम गए।

04:55.763 --> 04:58.323
क्या नाचती हो तुम, झुमकी!

05:02.243 --> 05:04.723
बस ठीक है, आ जाओ।

05:05.603 --> 05:07.283
आओ। आ जाओ।

05:08.163 --> 05:09.723
अरे!
(हँसते हुए)

05:09.843 --> 05:14.563
तुम करोगी? ठीक है, आ जाओ।
वैसे भी, हम थक गए हैं। आ जाओ।

05:15.883 --> 05:16.683
आ जाओ।

05:21.803 --> 05:25.243
अरे, घूँघट तो उठाओ।
तुम घूँघट में ही बैठ गई।

05:26.923 --> 05:28.363
[इरशाद]: विजय सिंह...
[विजय]: मा****!

05:28.483 --> 05:29.723
[इरशाद]: ए!
[विजय]: ब****!

05:30.083 --> 05:32.043
(मुक्के मारने की आवाज़)
(इरशाद के कराहने की आवाज़)

05:33.763 --> 05:35.003
[इरशाद]: हट!

05:35.283 --> 05:37.643
[छुन्नू]: भैया, मार दें क्या?
[विजय]: पगला गया है क्या, छुन्नू?

05:38.403 --> 05:40.763
[विजय]: भैया के पास लेके जाना है इसको।
उठा सा** को।

05:41.523 --> 05:43.643
(गाड़ी के चलने की आवाज़)

05:50.323 --> 05:51.393
[विजय]: ले आओ।

05:51.403 --> 05:53.483
[इरशाद]: ब****! खोल, खोल!

05:54.563 --> 05:55.683
खोल!
(चिल्लाते हुए)

05:56.603 --> 05:58.883
ए, मा****, किधर लाया रे?

06:03.763 --> 06:05.363
[छुन्नू]: बैठ, मा****!

06:06.683 --> 06:08.473
[विजय]: अब बुला अपने बाप वसीम ख़ान को।

06:08.483 --> 06:10.483
[इरशाद]: क्यों? सा**!

06:10.643 --> 06:14.323
जैसे दूसरों को छुप के मारता है,
वैसे वसीम भाई को मारेगा क्या?

06:14.523 --> 06:18.643
चू** सा**!
फटती है तुम्हारी वसीम भाई से, सा**!

06:19.083 --> 06:22.113
इसलिए तो मुँह छुपाके
घूमता रहता है, सा** मा****!

06:22.123 --> 06:24.243
[विजय]: चेहरा छुपाकर वार करते हैं,

06:25.243 --> 06:28.363
लेकिन दंगों की आड़ में
किसी मासूम की हत्या नहीं करते।

06:28.603 --> 06:30.553
और तुम्हारा सा** ये वसीम ख़ान,

06:30.563 --> 06:34.123
अपने स्वार्थ के लिए धर्म का सहारा लेकर
अपने दुश्मनों को मारता है।

06:34.843 --> 06:39.483
और तुम जैसे चू** उसके साथ हैं,
जो उसे भगवान का दर्जा देते हैं, मा****।

06:39.723 --> 06:41.963
[इरशाद]: हट, मा****! हट! हट!
[छुन्नू]: बैठ!

06:42.163 --> 06:44.843
[विजय]: पहले क्या चाहिए इसका?
[इरशाद]: ए!

06:47.043 --> 06:48.873
[इरशाद]: ए, त्रिपुरारी!
[छुन्नू]: चुप!

06:48.883 --> 06:50.803
[छुन्नू]: मारिए, भैया!
[इरशाद]: ए, त्रिपुरारी! ब****!

06:50.923 --> 06:53.203
[त्रिपुरारी]: सीधा रखो। सीधा करो, सीधा करो।
[इरशाद]: ब****! नहीं!

06:53.403 --> 06:54.433
[छुन्नू]: मारिए, भैया!
[इरशाद]: नहीं, ब****!

06:54.443 --> 06:55.673
[त्रिपुरारी]: हाथ काटे थे ना?

06:55.683 --> 06:57.243
[इरशाद]: ए! नहीं!
(चिल्लाते हुए)

06:57.363 --> 06:58.923
[त्रिपुरारी]: हम सब काटेंगे।
[इरशाद]: नहीं! (चिल्लाते हुए)

06:59.043 --> 07:02.513
(तलवार से वार करने की आवाज़)
(इरशाद के कराहने की आवाज़)

07:02.523 --> 07:04.243
[छुन्नू]: हट, मा****!

07:06.523 --> 07:07.323
हट!
(चिल्लाते हुए)

07:08.883 --> 07:11.483
[सुशील]: ए, तुम कैसे कर रहे हो?
ज़रा इसको इधर उठाओ।

07:11.683 --> 07:14.763
वहाँ लगाओ। हाँ, डालो।
यहाँ गिराओ, यहाँ पे।

07:22.963 --> 07:24.393
[वसीम]: बुलाओ इसे। नाम क्या है?

07:24.403 --> 07:26.883
[बिलाल]: ए, सुशील! इधर आओ।

07:27.683 --> 07:28.963
[सुशील]: हाँ। जी, सर?

07:29.083 --> 07:31.283
[वसीम]: ये सड़क कितने साल चलेगी?
[सुशील]: दस साल भर चल जाएगा, सर।

07:31.883 --> 07:33.043
[वसीम]: चू**!

07:34.483 --> 07:35.963
[वसीम]: एक बात समझो।
[सुशील]: जी।

07:36.083 --> 07:38.923
[वसीम]: ये सरकार जो है,
वो दुधारू गाय होती है।

07:39.643 --> 07:42.443
तुम क्या सारा दूध
एक ही बार में दुह लोगे? हाँ?

07:44.003 --> 07:47.243
[वसीम]: डामर पतला करो, गिट्टी थोड़ी कम डालो।
[सुशील]: जी, सर।

07:47.643 --> 07:49.803
[वसीम]: अगले साल ये सड़क
फिर ख़राब होनी चाहिए।

07:50.203 --> 07:53.283
फिर इसका टेंडर निकलेगा
और वो टेंडर किसे मिलेगा?

07:53.803 --> 07:55.403
[बिलाल]: हमको। हूँ?

07:55.683 --> 07:56.633
[वसीम]: समझे?
[सुशील]: जी, सर जी।

07:56.643 --> 07:57.523
[वसीम]: चलो।

07:57.923 --> 08:01.083
[सुशील]: चल रे! डामर पतला कर!
डामर पतला कर, सोनू!

08:02.643 --> 08:05.883
(डंपर के चलने की आवाज़)

08:14.643 --> 08:15.803
[बिलाल]: भाई!

08:17.283 --> 08:18.603
भाई!
(चिल्लाते हुए)

08:23.603 --> 08:30.203
(डंपर से ज़मीन पर मिट्टी गिरने की आवाज़)
(शंख के बजने की आवाज़)

09:04.963 --> 09:06.683
[इरशाद के अब्बू]: वसीम भाई,
(रोते हुए)

09:06.923 --> 09:11.843
हमें तो लगता था,
मेरे इरशाद को कोई छू नहीं सकता, (रोते हुए)

09:12.843 --> 09:16.243
क्योंकि आपके हाथ उसके सर पर थे।
(रोते हुए)

09:16.403 --> 09:19.793
लेकिन... लेकिन ये क्या हो गया, वसीम भाई?
(रोते हुए)

09:19.803 --> 09:21.483
ये क्या हो गया?
(रोते हुए)

09:21.843 --> 09:23.843
(इरशाद के अब्बू के रोने की आवाज़)

09:36.203 --> 09:37.883
[गार्ड]: ए, ए, ए, भैया!
[विजय]: ए!

09:38.603 --> 09:40.113
[गार्ड]: कहाँ? कहाँ?
[विजय]: दो घंटे से बिठाया हुआ है।

09:40.123 --> 09:42.603
[विजय]: मुजरा चल रहा है अंदर, हाँ?
हट, मा****! (दरवाज़ा खोलने की आवाज़)

09:43.963 --> 09:45.283
ए, छुन्नू, देख कहाँ है।

09:46.403 --> 09:47.523
देख।

09:51.883 --> 09:53.363
[छुन्नू]: ये तो हग रहा है, चू**।

09:54.803 --> 09:56.203
[विजय]: खोल, सा**!
(दरवाज़े पर लात मारने की आवाज़)

10:00.563 --> 10:02.923
[कर्मचारी 1]: भाई,
क्या किसी को हगने नहीं दोगे क्या?

10:03.243 --> 10:06.483
[कर्मचारी 1]: कौन हो तुम लोग?
[विजय]: विजय सिंह के आदमी हैं हम।

10:08.603 --> 10:10.923
[विजय]: चलिए,
सिंचाई विभाग के बड़े बाबू लोग!

10:11.203 --> 10:12.833
काम बंद।
थोड़ा सा मध्यांतर लो।

10:12.843 --> 10:14.873
[कर्मचारी 2]: आप लोग कौन हैं?
[विजय]: अरे, बैठिए।

10:14.883 --> 10:15.803
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

10:16.083 --> 10:17.363
[विजय]: बैठिए!

10:17.683 --> 10:20.003
[त्रिपुरारी]: अरे, ढूँढ़, ढूँढ़, ढूँढ़।
[विजय]: कहाँ है फ़ाइल?

10:20.323 --> 10:22.883
[विजय]: ए, छुन्नू! इसमें देखो।
देखो इसमें।

10:39.443 --> 10:40.563
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

10:56.403 --> 11:00.283
[विजय]: ए, भाई, जल्दी-जल्दी हाथ चलाइए।
सामान पहुँचवाना है रात तक। हाँ!

11:00.963 --> 11:02.483
ठीक से कीजिए इसको।
इधर डालिए।

11:02.723 --> 11:06.603
[आदमी 1]: तीन दिन पहले गोरखपुर में
नक़ली शराब से बीस लोग मर गए थे।

11:07.003 --> 11:09.163
तब से शासन बड़ा चौकन्ना हो गया है।

11:09.403 --> 11:11.043
[विजय]: क्या बात कर रहे हो?

11:11.643 --> 11:14.603
[विजय]: कहाँ का शासन चौकन्ना हो गया है?
[आदमी 1]: गोरखपुर, भैया।

11:16.723 --> 11:18.803
[विजय]: नक़ली शराब पीने से?
[आदमी 1]: हाँ, हाँ।

11:18.923 --> 11:19.643
[विजय]: तो?

11:19.763 --> 11:21.353
[आदमी 1]: नहीं, भैया,
हम तो बस कह रहे थे...

11:21.363 --> 11:22.713
[विजय]: हाँ?
[आदमी 1]: सावधानी बरतने के लिए।

11:22.723 --> 11:25.033
[विजय]: यहाँ सब काम सावधानी से होता है।
तुमको विश्वास नहीं होता?

11:25.043 --> 11:26.193
[विजय]: ए, किशोर!
[किशोर]: जी, भैया?

11:26.203 --> 11:27.083
[विजय]: दो ज़रा।

11:27.723 --> 11:29.683
[आदमी 1]: भैया... भैया, हम तो ऐसे ही...
[विजय]: तुम्हारे सामने ये ताज़ा-ताज़ा बनाया है।

11:29.803 --> 11:31.483
[विजय]: पीके तुम को बताते हैं। देखो।

11:34.923 --> 11:36.603
[विजय]: कुछ हुआ हमको?
[आदमी 1]: नहीं, भैया।

11:53.003 --> 11:54.833
[छुन्नू]: अरे, क्या कर रहे हो?
आग थोड़ा ठीक से जलाओ।

11:54.843 --> 11:56.883
ये देखो, सब ठंडा पड़ा है।
ठीक से जलाओ।

11:58.203 --> 11:59.683
अरे, ऐसे नहीं!

12:05.443 --> 12:06.513
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

12:06.523 --> 12:09.043
[पुजारी]: बाक़ी का तुम देख लो। ठीक है?
[पीए]: ठीक है।

12:10.283 --> 12:11.723
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

12:12.723 --> 12:14.523
[पुजारी]: हेलो?
[ठेकेदार]: प्रणाम, पुजारी जी।

12:14.643 --> 12:15.923
[ठेकेदार]: ट्रकें पहुँची नहीं अब तक।

12:16.243 --> 12:19.033
अगर ट्रकें नहीं पहुँची,
तो कोयला आएगा कैसे?

12:19.043 --> 12:21.443
[पुजारी]: ठीक है,
मैं वसीम से बात करता हूँ।

12:29.123 --> 12:33.043
(लैंडलाइन फ़ोन बजने की आवाज़)

12:34.763 --> 12:36.763
[पुजारी]: वसीम।
[वसीम]: जी, भाई साहब।

12:37.243 --> 12:39.403
[पुजारी]: ये कोयला कब तक पहुँचेगा?

12:40.563 --> 12:42.483
[वसीम]: मैं जानता हूँ
इस बार थोड़ी देर हो गई है।

12:43.043 --> 12:44.683
लेकिन मैंने बिलाल से कह दिया है।

12:45.043 --> 12:47.643
अस्सी ट्रक भरकर कोयला
परसों तक मंडी में होगा।

12:48.083 --> 12:49.313
[पुजारी]: अ...

12:49.323 --> 12:54.323
वसीम, मैं जानता हूँ
इस वक़्त तुम्हारे दिमाग़ में क्या चल रहा है।

12:56.163 --> 12:58.353
लेकिन धंधा ज़रूरी है।

12:58.363 --> 13:00.323
बदला लेने के लिए भी वक़्त मिल जाएगा।

13:01.083 --> 13:02.403
थोड़ा इंतज़ार कर लो।

13:03.643 --> 13:06.083
[वसीम]: इंतज़ार सिर्फ़ मौत का किया जाता है,
भाई साहब,

13:07.043 --> 13:08.683
सही वक़्त का नहीं।

13:09.683 --> 13:12.683
और सच कहूँ तो,
अब आपकी ये जो खोखली राजनीती है ना,

13:13.443 --> 13:15.683
मेरे सम्मान को चोट पहुँचाने लगी है।

13:18.203 --> 13:19.283
रखता हूँ।

13:32.843 --> 13:35.083
[ठाकुर]: शेर अगर बूढ़ा भी हो जाए,

13:37.003 --> 13:39.163
तो कोई दिक्क़त नहीं है, पुजारी बाबू।

13:40.963 --> 13:44.683
दिक्क़त तो तब होती है,
जब शेर शेरों वाली हरकत ही करना छोड़ दे।

13:45.483 --> 13:49.473
[पुजारी]: ठाकुर साहब, यहाँ हम आपके पास
अपनी समस्या का समाधान करवाने आए हैं

13:49.483 --> 13:51.203
और आप ज्ञान दे रहे हैं।

13:51.603 --> 13:54.003
अरे, ज्ञान लेने के लिए तो
इलाहाबाद में कुंभ में

13:54.123 --> 13:56.483
हम बाबा जी के पास
हर छह साल में जाते हैं।

13:56.723 --> 13:59.043
[ठाकुर]: हम कह रहे हैं
वसीम का हाथ क्यों नहीं छोड़ रहे हैं आप?

14:01.243 --> 14:05.043
पुजारी जी, जहाँ बात पैसे और ताक़त की है ना,
वहाँ विजय को पकड़िए आप।

14:06.643 --> 14:10.243
विजय सिंह आपके वसीम के सर पे चढ़ के
मूतना शुरू कर चुका है।

14:11.963 --> 14:15.243
मेरी बात मान लीजिए।
विजय सिंह का हाथ पकड़ लीजिए।

14:17.203 --> 14:19.033
(पुजारी के हँसने की आवाज़)

14:19.043 --> 14:20.443
[ठाकुर]: ये हँसी क्यों आ रही है?

14:22.443 --> 14:25.083
[ठाकुर]: मज़ाक हो रहा है यहाँ पे?
[पुजारी]: आपको क्या लगता है

14:26.523 --> 14:29.003
[पुजारी]: कि पार्टी वसीम को किनारे लगाकर

14:29.363 --> 14:31.713
अगर विजय का हाथ थाम लेगी,
तो सब कुछ ठीक हो जाएगा?

14:31.723 --> 14:34.883
[ठाकुर]: भई, मुझे क्या लगता है,
क्या नहीं लगता है, ये मायने नहीं रखता है।

14:36.763 --> 14:38.243
पार्टी को तो ऐसा लगता है।

14:39.963 --> 14:42.803
और मुख्यमंत्री जी भी कुछ ऐसा ही चाहते हैं।

14:45.403 --> 14:48.643
ब्रिजशंकर तिवारी को
विजय सिंह चुनौती दे सकता है।

14:50.963 --> 14:52.683
लड़के में दम है बहुत।

14:53.003 --> 14:55.523
[पुजारी]: ठाकुर साहब,
एक सलाह देता हूँ मैं आपको।

14:56.803 --> 14:59.803
अब ग़लती से
ये बात आपके दिमाग़ में तो आ गई है।

15:00.283 --> 15:04.163
लेकिन भूलकर भी आप ये बात
अपने दिमाग़ से बाहर मत निकालिएगा।

15:04.763 --> 15:08.393
अगर वसीम को भनक तक लग गई ना
कि आपके दिमाग़ में ऐसा कुछ चल रहा है,

15:08.403 --> 15:10.923
तो आप सोच भी नहीं सकते
कि आपके साथ क्या हो सकता है।

15:12.283 --> 15:14.963
और हाँ!
जाते-जाते मैं एक बात और बता दूँ आपको।

15:15.923 --> 15:19.043
आप मुख्यमंत्री जी को
मेरा ये संदेश दे दीजिएगा

15:19.283 --> 15:22.323
कि मेरे बाग़ीचे में बीस फूल हैं।

15:23.923 --> 15:26.203
उनका क्या करना है,
वो मुझे बता दें।

15:35.603 --> 15:38.003
[ठेकेदार 2]: कच्चा कोयला कोई ले नहीं रहा है।

15:38.523 --> 15:40.043
सबको पक्का कोयला चाहिए।

15:40.723 --> 15:45.203
अगर आपसे कोयला ख़रीदकर हम उसे बेच भी ना पाएँ,
तो फिर फ़ायदा क्या हुआ, वसीम साहब?

15:45.523 --> 15:47.283
[आदमी 2]: हार्ड कोक कहते हैं उसे सब।

15:47.483 --> 15:50.283
बनाना आसान है, लेकिन...

15:50.803 --> 15:51.873
[वसीम]: लेकिन क्या?

15:51.883 --> 15:54.883
[आदमी 2]: हार्ड कोक बनाने के लिए
सरकारी लाइसेंस की ज़रूरत पड़ती है।

15:55.123 --> 15:58.323
पर्यावरण विभाग और ना जाने क्या-क्या।

16:00.923 --> 16:02.723
[वसीम]: अगली बार हम भी
आपको पक्का कोयला देंगे।

16:03.763 --> 16:06.123
और रही सरकार की बात,
तो उसकी चिंता आप मत कीजिए।

16:07.243 --> 16:11.083
आप बस इस बात का ध्यान रखिएगा
कि कोयला आप हम ही से लेंगे।

16:11.603 --> 16:12.883
समझे?

16:13.803 --> 16:15.923
[वसीम]: चलिए।
[ठेकदार]: जी, वसीम साहब।

16:19.683 --> 16:21.683
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)

16:23.203 --> 16:25.923
[विजय]: भैया, वो बिहार का
सारा ट्रक का इंतज़ाम हो गया ना?

16:26.563 --> 16:29.763
[त्रिपुरारी]: हाँ, हो गया।
सीमा पे सब इंतज़ाम है।

16:30.323 --> 16:32.163
सब अपने लोग हैं। हो जाएगा।

16:33.003 --> 16:34.523
[छुन्नू]: भैया।
[विजय]: हूँ?

16:36.323 --> 16:38.883
[छुन्नू]: वो... आज माल बहुत कम बना।

16:39.123 --> 16:41.283
[विजय]: कम बना? क्यों?

16:41.763 --> 16:45.083
[छुन्नू]: पता नहीं, भट्टी को गर्म होने में
बहुत ज़्यादा समय लग रहा है।

16:45.923 --> 16:49.203
सा**, कोयले में से धुआँ ही धुआँ निकल रहा है,
आग तो दिख ही नहीं रहा है।

16:50.243 --> 16:54.203
हमें तो लग रहा है कि शराब की तरह
कोयला भी नक़ली आने लगा है शायद?

16:55.683 --> 16:56.923
[त्रिपुरारी]: एक आदमी है।

16:57.763 --> 16:58.843
पता करते हैं।

17:06.123 --> 17:08.763
[रतन]: क्या है ये झोल?
इतना लोडिंग होता है?

17:09.363 --> 17:10.683
इतना कम-कम क्यों है, बे?

17:11.043 --> 17:12.443
जा, लेके जा।
ठीक से करा।

17:13.363 --> 17:15.003
[बिलाल]: क्यों, रतन सिंह?

17:16.283 --> 17:17.563
क्या, बे? क्या सोचे?

17:18.043 --> 17:21.843
[रतन]: सोचेंगे क्या?
हार्ड कोक का दाम हम तय करेंगे।

17:22.763 --> 17:24.243
समझ में आए तो बोलो।

17:24.443 --> 17:28.363
कच्चा कोयला वसीम का
और पक्का करके हम देंगे। समझे?

17:28.483 --> 17:31.403
[बिलाल]: अरे, शाबाश! जियो, राजा।

17:31.963 --> 17:34.883
भो** के!
तू किससे बात कर रहा है तुझे मालूम है?

17:35.403 --> 17:37.763
रेट तू तय करेगा, मा****!

17:38.283 --> 17:39.443
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)
(बिलाल के कराहने की आवाज़)

17:42.683 --> 17:43.843
[सनकी]: ए!

17:54.803 --> 17:57.443
अबे ए,
फटे निरोध के नतीजे!

18:00.163 --> 18:02.403
हार्ड कोक का रेट हम तय करेंगे।

18:03.403 --> 18:05.363
जाके बोल देना अपने बाप को।

18:10.123 --> 18:12.643
और जो ये चू** की फ़ौज इकट्ठी की है ना,

18:13.723 --> 18:15.923
पहले इनको लं** खड़ा करना सिखा।

18:17.923 --> 18:19.283
चल भाग, भो** के!

18:19.883 --> 18:22.443
भाग! उधर क्या देख रहा है?

18:27.283 --> 18:30.443
(सनकी के हँसने की आवाज़)

18:33.043 --> 18:34.713
[त्रिपुरारी]: ये कोयला नक़ली भी होता है क्या?

18:34.723 --> 18:36.403
[करिया]: नहीं। नक़ली नहीं होता।

18:36.723 --> 18:40.203
[विजय]: चाचा, जब नक़ली नहीं होता,
तो आपका वाला कोयला जलता क्यों नहीं है?

18:40.763 --> 18:42.283
इतना धुआँ क्यों देता है, सा**?

18:42.443 --> 18:45.603
[करिया]: धुआँ इसलिए देता है...
कि ये कोयला कच्चा है।

18:51.883 --> 18:53.803
[विजय]: कच्चा कोयला?
[चाचा]: हूँ।

18:54.163 --> 18:57.803
[विजय]: ये कच्चा कोयला क्या होता है,
करिया चाचा? ज़रा विस्तार में बताइए हमको।

18:58.163 --> 19:01.163
[करिया]: जो कोयला खदानों से निकलता है,
वो कच्चा होता है।

19:01.843 --> 19:03.563
देखो,
कोयला कई किस्म का होता है।

19:03.963 --> 19:05.723
हर किस्म की अपनी ख़ासियत होती है।

19:06.123 --> 19:09.643
और उसकी ख़ासियत के हिसाब से
उस कोयले का दाम होता है।

19:09.883 --> 19:13.643
कच्चे कोयले को भट्टी में पकाकर
पक्का कोयला बनाया जाता है।

19:15.003 --> 19:17.003
और इसका भी दाम अलग से होता है।

19:17.723 --> 19:19.593
कोयला लाने के लिए ट्रक लगती है।

19:19.603 --> 19:22.513
एक नहीं, दो नहीं, कई सौ ट्रक।

19:22.523 --> 19:24.163
इन ट्रकों का भी ठेका होता है।

19:25.083 --> 19:26.953
इन ट्रकों से कोयले की चोरी होती है।

19:26.963 --> 19:28.513
वज़न कम-ज़यादा करके।

19:28.523 --> 19:30.883
और ये सब धर्मकाँटा पर होता है।

19:31.003 --> 19:33.723
(लोगों के बड़बड़ाने की आवाज़)

19:33.883 --> 19:35.163
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

19:36.883 --> 19:39.043
[बिलाल]: आज का भाव सात सौ रूपया।

19:39.243 --> 19:41.083
[बिलाल]: कितना? सात सौ।
[आदमी 3]: सात सौ रूपया।

19:41.203 --> 19:44.603
[बिलाल]: आज का भाव सात सौ रूपया! फाइनल!

19:45.803 --> 19:48.243
[करिया]: और ये सारा काम
नकद पैसों में होता है।

19:48.683 --> 19:51.843
और पैसे... पैसे बोरों में आते हैं।

19:56.563 --> 19:58.563
[विजय]: चाचा,
इस धंधे का बाप कौन है?

20:01.803 --> 20:04.723
[करिया]: इस धंधे का बाप वसीम ख़ान

20:05.043 --> 20:06.643
और पुजारी सिंह है।

20:14.483 --> 20:16.043
[वसीम]: क्यों, भो** के?

20:16.523 --> 20:19.323
आजकल वसीम ख़ान से गाँ** फटना
बंद हो गया क्या?

20:19.803 --> 20:21.683
ज़बान कुछ ज़्यादा ही चल रही है तेरी!

20:22.203 --> 20:24.043
[वसीम]: हाँ?
[ठेकदार 3]: ऐसी बात नहीं है, भाई जान।

20:24.283 --> 20:25.753
[ठेकेदार 3]: कोई भीगा कोयला
ख़रीद ही नहीं रहा है।

20:25.763 --> 20:27.603
[वसीम]: भीगा कोयला नहीं ख़रीद रहा है?

20:28.203 --> 20:30.523
तो, उसे कहो कि अपनी पतलून उतारकर

20:31.003 --> 20:33.043
अपनी गाँ** कोयले पर टिका दे।

20:33.403 --> 20:35.203
कोयला अपने आप सूख जाएगा।

20:36.083 --> 20:38.403
[वसीम]: और एक बात बता देना, भो** वाले को।
[ठेकदार 3]: जी।

20:39.043 --> 20:42.683
[वसीम]: कि मेरे अलावा
किसी और से कोयला ले नहीं पाएगा वो।

20:43.003 --> 20:45.923
[ठेकेदार 3]: जी, भाई जान।
[वसीम]: मा****!

20:54.843 --> 20:56.003
[वसीम]: नाम क्या है?

20:57.963 --> 20:58.883
[सनकी]: पांडे।

20:59.803 --> 21:01.163
सनकी पांडे!

21:20.803 --> 21:22.043
[रतन]: दिमाग़ ख़राब है तेरा!

21:22.923 --> 21:24.923
फ़ालतू का काम नहीं करने का।
जाओ, जाओ!

21:25.243 --> 21:28.043
चलो, काम करो अपना!
फ़ालतू वाला काम करते हो!

21:28.163 --> 21:32.203
(डंपर के चलने की आवाज़)

21:32.483 --> 21:34.763
(कोयले को ज़मीन पर गिराने की आवाज़)
(रतन के कराहने की आवाज़)

21:50.403 --> 21:51.643
[सनकी]: ए!

21:52.283 --> 21:54.483
कोयला सारा भट्टी में डालो! चलो।

22:05.803 --> 22:07.723
'15 साल पहले'

22:11.363 --> 22:13.323
[ठेकदार 5]: ए! कहाँ जा रहा है, बे?
[सनकी]: मूतना है!

22:13.643 --> 22:15.203
[ठेकदार 5]: भाग, सा**! बैठ चुपचाप!

22:15.563 --> 22:18.803
सा**, गाँ** एक जगह टिकती ही नहीं है!
हगना, मूतना सब यहीं कर!

22:19.003 --> 22:20.523
कामचोर, साला!

22:22.963 --> 22:24.683
अरे, अरे! क्या कर रहा है, मा****?

22:25.523 --> 22:27.243
[सनकी]: तुमने ही तो कहा मूतने के लिए,
इसलिए मूत रहे हैं।

22:27.483 --> 22:28.713
[ठेकदार 5]: भाग! भाग, सा**!
(चिल्लाते हुए)

22:28.723 --> 22:32.043
[सनकी]: ये कारीगरी अपनी गाँ** में डाल ले!
[ठेकदार 9]: भाग, सा**! भो** के!

22:32.763 --> 22:33.833
[ठेकदार 5]: सनकी सा**!

22:33.843 --> 22:38.203
[भाभी 5]: साहब, हम तो ख़ुद ही परेशान हैं।
दो दिन से हमारा आदमी घर नहीं आया है।

22:38.643 --> 22:40.843
अब आप ही बताइए ना,
क्या करें हम?

22:41.123 --> 22:44.203
हमारे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।
अरे...

22:44.723 --> 22:48.763
अरे, हमारा आदमी किधर गया,
हमें कुछ भी ख़ुद ही नहीं मालूम।

23:01.483 --> 23:02.723
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

23:04.723 --> 23:06.563
'वर्तमान समय वाराणसी - 1987'

23:09.243 --> 23:12.043
[विजय]: बंद कराओ रे सारा काम यहाँ पे।
सबको इकट्ठा करो एक-एक करके।

23:12.363 --> 23:13.353
बीच में लेके आओ।

23:13.363 --> 23:15.443
[छुन्नू]: ए, भो** के! काम बंद करो, बे!

23:17.923 --> 23:19.443
[छुनू]: बंद करो!
[बेचैन]: चलो!

23:19.803 --> 23:21.763
[छुन्नू]: नीचे, नीचे, नीचे, नीचे।
[बेचैन]: आज से इस कोयला मंडी में

23:22.483 --> 23:24.723
[बेचैन]: कोयले का दाम विजय सिंह तय करेगा।

23:24.923 --> 23:27.843
आज से धंधा सिर्फ़ और सिर्फ़
विजय सिंह के साथ होगा।

23:29.283 --> 23:34.403
और अगर आज के बाद तुम लोगों में से
किसी ने वसीम के साथ धंधा किया ना,

23:34.603 --> 23:38.163
तो यहीं उसकी हड्डियों को तोड़ूँगा,
उसका चूरा बनाके इसी कोयले मंडी में

23:38.363 --> 23:40.163
कोयला बनाके बेचूँगा।

23:41.203 --> 23:43.563
कच्चा हो या पक्का,

23:43.723 --> 23:45.803
कोयला सिर्फ़ विजय सिंह का होगा!

23:46.083 --> 23:47.713
[वसीम]: पक्के कोयले का देखो क्या करना है।

23:47.723 --> 23:49.643
ये कोयले का मुझे सुनना नहीं है आगे से।

23:51.963 --> 23:55.123
[गुंडा 1]: भैया, वो विजय का आदमी
कोयला मंडी में कब्ज़ा जमाने पहुँच गया है।

23:55.523 --> 23:58.123
[वसीम]: मा****!
उसका जनाज़ा निकालूँगा आज मैं!

24:01.963 --> 24:03.083
चल!

24:03.363 --> 24:07.563
(गाड़ियों के चलने की आवाज़)

24:12.643 --> 24:15.483
[पुजारी]: अब वो विजय सिंह
कोयले पर भी अपनी आँख लगा रहा है!

24:15.683 --> 24:17.723
एक बात याद रखना, वसीम!

24:17.923 --> 24:20.313
ये ठेके मैंने तुम्हें इसलिए दिलवाए थे,

24:20.323 --> 24:22.993
क्योंकि जो दहशत आज विजय पैदा कर रहा है,

24:23.003 --> 24:25.363
वो कभी तुम पैदा किया करते थे!
(चिल्लाते हुए)

24:26.203 --> 24:27.353
[वसीम]: तू विजय को मारेगा मेरे लिए।

24:27.363 --> 24:28.273
(बम धमाके की आवाज़)

24:28.283 --> 24:30.123
[सनकी]: ओए! भाग, सा**!
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
