WEBVTT

00:07.003 --> 00:10.603
[उद्घोषक]: साहेब सिंह, ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:10.803 --> 00:14.003
[उद्घोषक 2]: हमारा नेता कैसा हो?
[सभी लोग]: साहेब सिंह जैसा हो!

00:14.723 --> 00:17.763
[उद्घोषक]: साहेब सिंह, ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:18.363 --> 00:20.203
[छुन्नू]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!

00:20.363 --> 00:23.483
[उद्घोषक]: साहेब सिंह, ज़िंदाबाद!
[छुन्नू]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:23.683 --> 00:26.523
[उद्घोषक 2]: पुजारी सिंह, ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:26.683 --> 00:31.203
[उद्घोषक 3]: राष्ट्रीय एकता पार्टी!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:33.683 --> 00:36.003
[पुजारी]: किसी बाहरी को

00:37.243 --> 00:41.753
यदि ऐसा लगता है
कि मेरे सामने खड़ा होकर

00:41.763 --> 00:44.393
वो आप सबका वोट ले लेगा,

00:44.403 --> 00:47.443
तो ये उसकी बहुत बड़ी ग़लतफहमी है!

00:47.603 --> 00:51.083
[उद्घोषक 2]: पुजारी सिंह, ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

00:51.283 --> 00:56.043
[पुजारी]: मेरी ज़िंदगी का मकसद सिर्फ़ एक है!

00:57.123 --> 01:01.033
और वो है गाज़ीपुर का विकास!

01:01.043 --> 01:04.763
[उद्घोषक 2]: पुजारी सिंह, ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

01:04.883 --> 01:08.723
[उद्घोषक 3]: राष्ट्रीय एकता पार्टी!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद! (चिल्लाते हुए)

01:23.883 --> 01:27.593
[उद्घोषक]: जय श्री राम! जय श्री राम!
[सभी लोग]: जय श्री राम! जय श्री राम!

01:27.603 --> 01:29.523
[उद्घोषक]: जय श्री राम!
[सभी लोग]: जय श्री राम!

01:29.643 --> 01:31.523
[पुजारी]: ये हरा*** साहेब सिंह...

01:33.883 --> 01:38.043
[वसीम]: भाई साहब, इस बार
सिर्फ़ बातों से काम नहीं चलेगा।

01:39.123 --> 01:40.283
[साहेब]: बाबा।

01:42.763 --> 01:44.843
कई तरह के भक्त हैं आपके पास।

01:45.683 --> 01:50.203
आपकी कृपा बनी रही, तो वही भक्त
हमें हमारी मंज़िल तक पहुँचा सकते हैं, बाबा।

01:51.803 --> 01:55.163
[साहेब]: क्या क़ीमत होगी भक्त की?
[विजय]: और उनके भगवान की भी?

02:03.963 --> 02:05.363
[साधु महाराज]: बिंदु!

02:07.083 --> 02:11.683
[साहेब]: बिंदु वही बंबई सिनेमा वाली?
[साधु महाराज]: जी।

02:12.203 --> 02:13.523
[साहेब]: सही है।

02:13.643 --> 02:17.923
[साधु महाराज]: क्योंकि बिंदु के आने से
पुजारी के क्षेत्र विशेष पर गहरा आघात लगेगा।

02:18.163 --> 02:19.763
[छुन्नू]: क्षेत्र विशेष मतलब?

02:20.763 --> 02:22.163
[विजय]: गाँ**!

02:25.483 --> 02:27.723
पुजारी सिंह की गाँ** फट जाएगी।

02:29.043 --> 02:33.163
साधू महात्मा हैं।
गाली भी मर्यादा में रहकर देते हैं।

02:34.403 --> 02:36.203
[साधु महाराज]: ऐसा है, नेता जी।
[साहेब]: हाँ।

02:36.323 --> 02:38.683
[साधु महाराज]: जनता भीड़ देखकर मतदान करती है।

02:40.043 --> 02:43.123
और भीड़ दो तरह से आती है।

02:44.643 --> 02:46.123
पहला,

02:46.643 --> 02:48.603
कि आपके पास वसीम ख़ान हो,

02:50.203 --> 02:52.043
जो कि आपके पास है नहीं।

02:53.003 --> 02:54.443
और दूसरा,

02:55.403 --> 02:58.203
कि आपके पास देखने के लायक कोई चेहरा हो।

02:59.043 --> 03:03.083
उस चेहरे को देखने के लिए
भीड़ दौड़ी चली आएगी।

03:04.203 --> 03:07.563
और वही भीड़ आपको विजयी बनाएगी।

03:13.683 --> 03:18.203
[बिंदु]: गाज़ीपुर! कैसे हैं?
[सभी लोग]: बढ़िया! (चिल्लाते हुए)

03:18.563 --> 03:22.083
[बिंदु]: आज मैं बंबई से
ख़ास आप सबसे मिलने आई हूँ।

03:22.243 --> 03:24.643
(सभी के शोर मचाने की आवाज़)

03:24.963 --> 03:28.803
[बिंदु]: और हमारी आपसे
एक ही विनती है और वो ये

03:28.963 --> 03:33.923
कि इस बार भारी मतों में वोट देकर
आप साहेब सिंह को ही जिताएँ! (आवाज़ गूँजते हुए)

03:34.083 --> 03:36.283
[सभी लोग]: साहेब सिंह, ज़िंदाबाद!
[साधु महाराज]: जय हो।

03:36.403 --> 03:38.043
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!
[उद्घोषक]: साहेब सिंह...

03:38.163 --> 03:39.993
[उद्घोषक]: ज़िंदाबाद!
[बिंदु]: और एक और बात बता दूँ!

03:40.003 --> 03:43.283
[बिंदु]: आज का दिन हम सभी के लिए
बहुत ही शुभ है।

03:43.723 --> 03:46.313
आज हम बहुत ख़ुशक़िस्मत महसूस कर रहे हैं,

03:46.323 --> 03:49.393
क्योंकि स्वयं साधु जी महाराज
यहाँ उपस्थित हैं... (आवाज़ गूँजते हुए)

03:49.403 --> 03:52.483
[बिंदु]: हमें आशीर्वाद देने के लिए।
[सभी लोग]: जय साधू महाराज की!

03:52.603 --> 03:57.123
[बिंदु]: तो, क्या आप सब वादा कर रहे हैं हमसे
इस बार जीतेंगे साहेब सिंह जी?

03:58.763 --> 04:01.523
एक बार हमारे साथ हो जाए फिर?

04:01.763 --> 04:05.483
[बिंदु]: साहेब सिंह जी ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

04:06.243 --> 04:09.553
[विजय]: क्या, चाचा? क्या लग रहा है?
कौन जीतेगा इस बार?

04:09.563 --> 04:14.523
[चाचा]: बिंदु सिंह को तो हमने देख लिया है।
अब मेरा वोट साहेब सिंह को ही जाएगा।

04:18.843 --> 04:21.483
[आदमी 1]: स्वामी जी, वो आ गई हैं।

04:26.803 --> 04:29.003
[साधु महाराज]: उन्हें विश्राम घर में बैठाइए।

04:29.563 --> 04:30.923
हम आते हैं।

04:41.163 --> 04:44.723
[साहेब]: स्वामी जी?
[आदमी 1]: स्वामी जी विश्राम कक्ष में हैं।

04:44.963 --> 04:46.163
[साहेब]: अच्छा।

04:49.403 --> 04:50.683
ये...

04:51.603 --> 04:54.923
स्वामी जी के लिए है,
इसे रखवा दीजिएगा।

04:56.083 --> 04:57.123
[आदमी 1]: जी।

05:13.123 --> 05:14.563
[वसीम]: आओ, पहलवान।

05:16.563 --> 05:18.603
(पहलवान के हाँफने की आवाज़)

05:19.003 --> 05:21.443
[वसीम]: दंगल के नियम
कितने भी बदल जाएँ,

05:22.603 --> 05:27.043
लेकिन आज भी
दंगल केवल दाव से जीता जाता है।

05:35.403 --> 05:37.353
[इरशाद]: ए! सब लाइन में!
एकदम सीधे!

05:37.363 --> 05:39.243
[कॉन्स्टेबल]: ए! इधर कहाँ?

05:40.203 --> 05:43.633
[इरशाद]: ए, भाई। तुम्हारे पापा उधर हैं।
जाओ, बात करो। जाओ!

05:43.643 --> 05:44.643
फुर्ती में।

05:45.043 --> 05:47.683
चलो, एकदम लाइन में!
साँस-वाँस लेते रहना, बस!

05:48.243 --> 05:50.793
[इरशाद]: चलो, श्याम लाल! जाओ,
जाओ, जाओ, घर अपने। [गुंडा 2]: चलो!

05:50.803 --> 05:52.363
[इरशाद]: हाँ, भैया। हो गई छुट्टी तुम्हारी।
[गुंडा 2]: चुनाव ख़त्म!

05:52.483 --> 05:53.683
[इरशाद]: चलो, कितना काम करोगे?
जाओ! जाओ!

05:53.803 --> 05:55.603
[इरशाद]: निकल!
[गुंडा 2]: अबे, चल!

05:55.923 --> 05:59.363
[कॉन्स्टेबल 2]: भाई, ये क्या?
वोटिंग चल रही है। दिक्क़त हो जाएगी।

06:01.323 --> 06:03.083
[वसीम]: जो चल रहा है, चलने दो।

06:04.083 --> 06:05.513
(दबोचने की आवाज़)
(पहलवान के हाँफने की आवाज़)

06:05.523 --> 06:07.923
[वसीम]: जिसका जितना अच्छा दाव,

06:08.323 --> 06:12.123
उसके जीतने की संभावना उतनी ही प्रबल।

06:13.923 --> 06:17.403
वोट डालने वाला, वोट डालेगा ज़रूर,

06:18.923 --> 06:20.563
लेकिन वोट पड़ेगा आपको।

06:20.803 --> 06:24.163
[इरशाद]: पुजारी सिंह को वोट नहीं, तो...
[गुंडे]: तो गोली की चोट! (चील्लाते हुए)

06:24.403 --> 06:27.763
[इरशाद]: पुजारी सिंह को वोट नहीं, तो...
[गुंडे]: तो गोली की चोट! (चील्लाते हुए)

06:30.603 --> 06:32.243
(पर्ची पर ठप्पा लगाने की आवाज़)

06:34.163 --> 06:36.193
[इरशाद]: अम्मा, प्रणाम।
[अम्मा]: ख़ुश रह, बेटा।

06:36.203 --> 06:38.683
[इरशाद]: तुम्हारा वोट डल गया।
जाओ, घर में आराम करो। जाओ।

06:38.883 --> 06:40.723
[इरशाद]: ठीक है?
[अम्मा]: ठीक है। ठीक है।

06:43.563 --> 06:49.003
[वसीम]: भाई साहब,
और जिस बूथ पर आपको वोट नहीं मिलेगा,

06:50.163 --> 06:52.283
वो बूथ का बक्सा बेकार हो जाएगा।

06:55.763 --> 06:57.923
[इरशाद]: हाँ, उठाओ। उठाओ।
ला, ला, ला!

07:02.003 --> 07:02.923
डालना!

07:03.683 --> 07:04.963
पूरा, अच्छे से। अच्छे से।

07:05.803 --> 07:11.003
[उद्घोषक 4]: गाज़ीपुर विधान सभा क्षेत्र के
प्रथम चरण के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं:

07:11.163 --> 07:13.433
साहेब सिंह पुजारी सिंह से

07:13.443 --> 07:17.083
लगभग एक हज़ार वोटों से पीछे चल रहे हैं।

07:19.123 --> 07:22.363
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

07:30.203 --> 07:32.923
[उद्घोषक 4]: दूसरे चरण के
परिणाम कुछ इस प्रकार हैं:

07:33.203 --> 07:36.843
पुजारी सिंह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी
साहेब सिंह से

07:36.963 --> 07:40.673
लगभग दो हज़ार वोटों से आगे चल रहे हैं!

07:40.683 --> 07:42.883
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

07:43.563 --> 07:45.963
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

07:53.563 --> 07:57.083
[उद्घोषक 4]: और तीसरे चरण के
चुनाव के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं:

07:57.323 --> 08:02.083
साहेब सिंह पुजारी सिंह से
पाँच हज़ार वोटों से आगे चल रहे हैं।

08:02.203 --> 08:04.203
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

08:14.843 --> 08:18.243
[सूत्रधार]: वसीम ने वोटर्स से
जबरन पुजारी सिंह के नाम की मोहर लगवाई,

08:19.443 --> 08:23.723
लेकिन उसे ये नहीं पता था
कि उधर विजय सिंह बंदूक के दम पर

08:24.443 --> 08:28.843
ख़ुद चुनाव अधिकारीयों से ही
साहेब सिंह के नाम पर ठप्पा लगवा रहा था।

08:32.083 --> 08:35.003
[उद्घोषक 4]: चुनाव के अंतिम चरण का
परिणाम कुछ इस प्रकार है!

08:35.323 --> 08:39.313
साहेब सिंह ने
अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पुजारी सिंह को

08:39.323 --> 08:42.203
तीस हज़ार वोटों से हरा दिया है!

08:43.803 --> 08:47.003
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!

08:47.123 --> 08:48.753
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

08:48.763 --> 08:55.153
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

08:55.163 --> 08:56.193
[इरशाद]: चलो, बे!

08:56.203 --> 08:58.523
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

08:58.683 --> 09:02.083
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

09:02.323 --> 09:05.603
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद! [सभी लोग]:
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद! (पटाखों की आवाज़)

09:05.723 --> 09:08.083
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

09:08.203 --> 09:11.643
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

09:11.843 --> 09:14.403
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

09:15.643 --> 09:17.043
[पुजारी]: साहेब!

09:20.243 --> 09:22.403
क्या है ये साहेब?

09:25.723 --> 09:27.563
[वसीम]: बस कीजिए, भाई साहब।

09:28.323 --> 09:29.763
अब दिक्क़त करेगा।

09:41.483 --> 09:43.523
[पुजारी]: दिक्क़त करेगा नहीं,

09:45.643 --> 09:47.523
दिक्क़त कर रहा है।

09:50.283 --> 09:53.963
[वसीम]: भाई साहब, ख़ुद को गाली देने से
कुछ हासिल नहीं होगा।

09:54.963 --> 10:00.043
[पुजारी]: वसीम,
ख़ुद को गाली नहीं दूँ, तो किसे दूँ? हाँ?

10:02.163 --> 10:04.323
कौन है ज़िम्मेदार मेरी हार का?

10:06.763 --> 10:09.163
(पुजारी के आहें भरने की आवाज़)

10:10.763 --> 10:12.283
[पुजारी]: वसीम!

10:13.723 --> 10:16.323
(पुजारी के रोने की आवाज़)

10:17.963 --> 10:21.923
[पुजारी]: मुझे मेरी सीट वा... वापस चाहिए!
(रोते हुए)

10:25.083 --> 10:28.763
ये मेरी इज़्ज़त का सवाल है, वसीम।
(रोते हुए)

10:30.963 --> 10:32.203
[वसीम]: भाई साहब,

10:33.483 --> 10:35.883
आपको आपकी सीट वापस दिलाऊँगा मैं।

10:57.323 --> 10:58.723
(लाइटर जलाने की आवाज़)

11:02.363 --> 11:04.603
(कागज़ के जलने की आवाज़)

11:14.203 --> 11:17.803
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

11:18.043 --> 11:20.763
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
[सभी लोग]: ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद!

11:21.203 --> 11:23.243
[उद्घोषक]: साहेब सिंह ज़िंदाबाद!
(ढोल बजाने की आवाज़)

11:23.883 --> 11:26.403
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

11:26.763 --> 11:28.803
(ढोल बजाने की आवाज़)
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

11:36.083 --> 11:37.643
[साहेब]: तुम्हारी ख़्वाहिश थी ना

11:38.883 --> 11:42.483
कि वसीम के इलाक़े में
उसके ठेकों को अपने नाम पर करो?

11:43.923 --> 11:45.163
वो दिन आ गया है।

11:48.043 --> 11:51.483
और ये दिन तुमने लाया है, विजय।

11:55.203 --> 11:56.283
शुक्रिया।

11:59.323 --> 12:00.443
[विजय]: आइए।

12:10.683 --> 12:12.603
चाचा,
दो दिन के लिए बनारस जा रहे हैं।

12:13.283 --> 12:15.523
लोक निर्माण विभाग का टेंडर खुलने वाला है।

12:16.203 --> 12:19.323
और हमें अगर नहीं जाएँगे,
तो ठेका हाथ से निकल जाएगा।

12:20.923 --> 12:22.643
तब तक आप दोनों यहाँ का संभालिए।

12:22.883 --> 12:24.923
[बेचैन]: अब चुनाव तो ख़त्म हो गया है।

12:25.403 --> 12:27.323
टेंशन की कोई बात ही नहीं है।

12:27.963 --> 12:30.803
[बेचैन]: चाहिए तो त्रिपुरारी भैया को
साथ ले जाओ। [विजय]: नहीं, नहीं, चाचा।

12:31.803 --> 12:33.483
[विजय]: भैया आपके साथ रहेंगे।

12:33.723 --> 12:35.443
आपको यहाँ अकेला नहीं छोड़ सकते हम।

12:35.843 --> 12:37.963
[विजय]: क्यों, भैया? हाँ?
[त्रिपुरारी]: ठीक है।

12:39.563 --> 12:40.843
[विजय]: ठीक है फिर।

12:41.883 --> 12:43.483
[त्रिपुरारी]: विजय, संभाल के।

12:45.203 --> 12:47.243
[बेचैन]: ख़याल रखना अपना।
[विजय]: जी, चाचा।

12:51.323 --> 12:52.243
[बेचैन]: जाओ।

12:52.963 --> 12:54.803
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)

13:05.043 --> 13:07.003
(पुलिस कार के साइरन की आवाज़)

13:18.883 --> 13:21.523
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

13:31.003 --> 13:33.723
[त्रिपुरारी]: बेचैन!
बेचैन, चलो, चलो यहाँ से!

13:37.523 --> 13:38.523
[साहेब]: ए, देख!

13:42.443 --> 13:43.803
ए, त्रिपुरारी!
(चिल्लाते हुए)

13:44.883 --> 13:46.483
[त्रिपुरारी]: भाग यहाँ से! ए!

13:50.523 --> 13:51.923
[साहेब]: अरे, मर जाएँगे!

13:53.203 --> 13:54.323
[बेचैन]: ए! चल!

13:58.523 --> 14:00.323
[बेचैन]: त्रिपुरारी! आग!

14:01.003 --> 14:04.163
[इरशाद]: जला डालो इसे!
[त्रिपुरारी]: बेचैन! ए!

14:05.123 --> 14:07.843
[त्रिपुरारी]: ब****! हट, मा****!

14:08.483 --> 14:09.923
[साहेब]: ए!
(रोते हुए)

14:11.723 --> 14:13.323
(आदमी के कराहने की आवाज़)

14:13.483 --> 14:16.963
[बेचैन]: त्रिपुरारी! त्रिपुरारी! ब****!

14:18.483 --> 14:24.123
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

14:29.923 --> 14:32.643
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

14:33.883 --> 14:36.473
[विजय]: माल सब सही से चढ़ रहा है ना?
और सुनो, एक-एक माल हम चेक करेंगे।

14:36.483 --> 14:37.353
[छुन्नू]: भैया!
[विजय]: हाँ?

14:37.363 --> 14:38.153
[विजय]: ठीक है, भैया। कर लीजिए।

14:38.163 --> 14:39.243
[छुन्नू]: भैया।
[विजय]: ए, जल्दी कीजिए!

14:39.363 --> 14:40.753
[विजय]: हाँ, बोल।
[आदमी 3]: ए, चलो, चलो। जल्दी करो!

14:40.763 --> 14:42.003
[छुन्नू]: गाज़ीपुर में दंगा हो गया है।

14:42.203 --> 14:44.643
[छुन्नू]: साहेब सिंह को ज़िंदा जला
दिया गया है और... [विजय]: क्या?

14:45.843 --> 14:47.233
[छुन्नू]: त्रिपुरारी भैया...

14:47.243 --> 14:49.563
[विजय]: भैया क्या?
[छुन्नू]: त्रिपुरारी भैया को...

14:50.163 --> 14:51.403
[छुन्नू]: वो...

14:53.563 --> 14:55.683
(मोटरसाइकिल स्टार्ट करने और चलाने की आवाज़)

15:02.083 --> 15:04.523
(बच्चों के रोने की आवाज़)
(भाभी के रोने की आवाज़)

15:12.563 --> 15:14.443
[भाभी 1]: क्या हुआ इन को?

15:39.523 --> 15:41.563
'दो साल पहले - बनारस 1984'
(कैमरे के क्लिक की आवाज़)

15:44.323 --> 15:46.763
[कैदी 1]: सब बढ़िया, भैया।
सारी गोटी सेट कर दिए हैं।

15:53.643 --> 15:54.883
[त्रिपुरारी]: ये कौन?

15:55.043 --> 15:57.163
[कैदी 1]: गुल्ली सिंह को
कुत्ते की मौत मारा है।

15:59.043 --> 16:01.483
सा** कहीं और जाता तो बच भी जाता।

16:02.603 --> 16:04.683
यहाँ तो निश्चित ही पेला जाएगा।

16:05.043 --> 16:06.963
[कैदी 2]: क्यों, बे? क्यों पेले जाएँगे?

16:07.803 --> 16:11.993
[त्रिपुरारी]: क्योंकि गुल्ली वसीम के
ठेके का काम देखता था।

16:12.003 --> 16:12.803
[कैदी 2]: हाँ।

16:14.123 --> 16:15.483
[कैदी 1]: अच्छा, सुना है...
[त्रिपुरारी]: और यहाँ तो...

16:15.603 --> 16:17.923
[त्रिपुरारी]: वसीम के पिल्ले ही
पिल्ले घूमते हैं।

16:20.163 --> 16:24.403
[कैदी 1]: अच्छा, सुना है भैया
कि बाप का बदला लेके आए हैं।

16:40.483 --> 16:42.043
[त्रिपुरारी]: पीछे से वार नहीं!

16:45.643 --> 16:47.643
[विजय]: हट!
(त्रिपुरारी के चिल्लाने की आवाज़)

16:48.843 --> 16:50.603
[विजय]: यहाँ आ जाओ! पेला जाओ!

17:00.083 --> 17:01.843
[कॉन्स्टेबल 3]: ए! रुक!
(चिल्लाते हुए)

17:02.563 --> 17:04.923
[कॉन्स्टेबल 3]: चल, फेंक! ए, चल रे!
चल रे! छोड़! [कॉन्स्टेबल 5]: ए!

17:05.083 --> 17:07.753
[कॉन्स्टेबल 3]: अरे, पकड़ो रे सबको! पकड़ो,
मा**** को! [कॉन्स्टेबल 5]: रुक जा, ओए!

17:07.763 --> 17:09.113
[कॉन्स्टेबल 3]: पकड़ो! चलो! चल रे!
[कॉन्स्टेबल 5]: चलो, चलो। चलो तुम लोग।

17:09.123 --> 17:10.283
[कॉन्स्टेबल 3]: अंदर डालो! चल!
[कॉन्स्टेबल 5]: चलो! हटो, हटो!

17:10.643 --> 17:12.203
[कॉन्स्टेबल 3]: चल, अंदर चल!
(चिल्लाते हुए)

17:12.523 --> 17:14.483
[विजय]: जान बचाने के लिए धन्यवाद।

17:14.603 --> 17:15.803
(त्रिपुरारी के मुस्कुराने की आवाज़)

17:18.443 --> 17:22.283
[त्रिपुरारी]: वैसे, जो लोग तुम्हारे ऊपर
वार किए थे, वो क़ैदी नहीं थे,

17:24.203 --> 17:25.923
वसीम ख़ान के आदमी थे।

17:26.883 --> 17:29.563
तुम्हें मारने के लिए जेल में लाए गए थे।

17:30.723 --> 17:32.243
[विजय]: आपको कैसे पता?

17:33.123 --> 17:35.723
[त्रिपुरारी]: एक नेता जी हैं। साहेब सिंह।

17:36.243 --> 17:37.883
हम उनके लिए काम करते हैं।

17:38.683 --> 17:42.883
और साहेब सिंह की वसीम ख़ान
और पुजारी सिंह के साथ गहरी दुश्मनी है।

17:45.243 --> 17:47.123
[विजय]: साहेब सिंह?
[त्रिपुरारी]: हूँ।

17:48.603 --> 17:51.483
[त्रिपुरारी]: राजनीती और ठेकेदारी,
दोनों का काम करते हैं।

17:53.603 --> 17:57.363
वैसे, राजनीती में पुजारी सिंह
और साहेब सिंह का तो कोई लेना-देना नहीं है,

17:57.483 --> 18:01.083
पर ठेकेदारी के चक्कर में
दोनों की दुशमनी बहुत है।

18:02.323 --> 18:05.363
साहेब सिंह की गाँ** फटती है पुजारी सिंह से।

18:06.723 --> 18:09.723
क्योंकि उसके साथ वसीम ख़ान है।

18:11.323 --> 18:13.403
और वसीम ख़ान कौन है,

18:14.163 --> 18:16.523
अब तुम्हें ये बताने की ज़रूरत तो नहीं है।

18:19.843 --> 18:21.243
वैसे, बहादुर हो।

18:22.603 --> 18:24.203
बाप का बदला लिए हो।

18:26.003 --> 18:27.083
आ जाओ।

18:31.643 --> 18:33.803
[विजय]: बदला अभी पूरा नहीं हुआ है, भैया।

18:34.523 --> 18:36.123
[त्रिपुरारी]: पाचो चाहिए तुम्हें?

18:40.043 --> 18:42.363
[विजय]: भैया,
एक बात पूछना चाहते थे आपसे।

18:43.563 --> 18:45.723
आप ये सब क्यों कर रहे हैं हमारे लिए?

18:51.923 --> 18:55.003
[त्रिपुरारी]: क्योंकि साहेब सिंह
और पुजारी सिंह की दुश्मनी में

18:56.523 --> 18:59.563
वसीम ख़ान ने हमारा भी बहुत कुछ छीना है।

19:03.003 --> 19:06.283
हमारी बीवी... बच्चे...

19:08.763 --> 19:10.923
घर में घुस के मार दिया उनको।

19:11.763 --> 19:13.083
कुछ नहीं छोड़ा।

19:16.203 --> 19:19.483
उल्टा केस बना के हमें यहाँ अंदर भिजवा दिया।

19:23.603 --> 19:25.403
बदला तो लेंगे हम।

19:30.043 --> 19:31.323
[विजय]: अकेले नहीं।

19:51.043 --> 19:52.603
[त्रिपुरारी]: क्या हुआ?

19:53.843 --> 19:55.643
[विजय]: भैया, नींद नहीं आती है हमको।

19:56.803 --> 19:57.923
[त्रिपुरारी]: क्या सोच रहे हो?

19:58.963 --> 20:00.603
[विजय]: ये सब होगा कैसे?

20:04.283 --> 20:07.163
[त्रिपुरारी]: ठेकेदारी से।
[विजय]: ठेकेदारी?

20:12.563 --> 20:16.003
[त्रिपुरारी]: साहेब सिंह बाहर निकलवाएगा।
[विजय]: हमें?

20:18.683 --> 20:20.163
[त्रिपुरारी]: नेता आदमी है।

20:22.683 --> 20:23.883
कमीना है,

20:25.123 --> 20:26.363
पर करेगा।

20:29.883 --> 20:31.203
बात करते हैं।

20:32.643 --> 20:33.883
चलो, सो जाओ।

20:38.803 --> 20:40.803
'वाराणसी 1985
जेल से छूटने के एक साल बाद'

20:45.443 --> 20:47.403
[पाचो]: हर महीने पेशी करवा रहे हो।
ज़मानत कब होगी?

20:47.523 --> 20:49.793
[वकील]: भैया, दो-चार दिन का समय दीजिए।
कोशिश कर रहे हैं।

20:49.803 --> 20:50.763
[पाचो]: अच्छा।

20:51.083 --> 20:53.363
[पाचो]: जल्दी से जल्दी ज़मानत करा, ठीक है?
[वकील]: जी, भैया।

20:53.483 --> 20:55.723
[पाचो]: जज को बोल, हम मूत के आते हैं।
[कॉन्स्टेबल 7]: जी।

21:06.283 --> 21:07.763
(पेशाब करने की आवाज़)

21:17.123 --> 21:19.003
(चाकू घोंपने की आवाज़)
(पाचो के कराहने की आवाज़)

21:27.163 --> 21:29.403
[आदमी 8]: अरे, ये क्या! अरे!

21:30.003 --> 21:31.243
[त्रिपुरारी]: नीचे बैठ!
[आदमी 5]: अरे, क्या कर रहे हैं?

21:35.683 --> 21:37.163
(चाकू घोंपने की आवाज़)
(पाचो के कराहने की आवाज़)

21:41.803 --> 21:43.443
(चाकू घोंपने की आवाज़)
(पाचो के कराहने की आवाज़)

22:06.443 --> 22:09.723
[त्रिपुरारी]: चल, विजय! निकल यहाँ से! निकल!
[विजय]: ब****!

22:10.163 --> 22:11.873
[सूत्रधार]: त्रिपुरारी की मदद से

22:11.883 --> 22:16.563
विजय सिंह ने अपने बाप के आख़िरी क़ातिल
पाचो को भी मौत के घाट उतार दिया।

22:20.003 --> 22:21.393
[त्रिपुरारी]: चलो, निकलो यहाँ से।
तुम लोग कल्टी लो।

22:21.403 --> 22:23.283
निकलो, निकलो, निकलो, निकलो, निकलो।

22:24.603 --> 22:25.923
(बम धमाके की आवाज़)
(लोगों के चीखने की आवाज़)

22:28.483 --> 22:31.323
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

22:41.363 --> 22:43.993
♪लुट जाए कचहरी और थाने।♪

22:44.003 --> 22:46.563
♪आग लगे महफ़िल में।♪

22:46.963 --> 22:49.123
[भाई]: क्या नाचती हो तुम, झुमकी!

22:50.083 --> 22:51.443
[गुंडा 2]: भाई!

22:52.683 --> 22:56.153
[पुजारी]: वसीम, मैं जानता हूँ
इस वक़्त तुम्हारे दिमाग़ में क्या चल रहा है।

22:56.163 --> 22:58.283
बदला लेने के लिए भी
वक़्त मिल जाएगा।

22:58.923 --> 23:01.723
[बेचैन]: आज से धंधा सिर्फ़
और सिर्फ़ विजय सिंह के साथ होगा।

23:01.843 --> 23:05.283
[गुंडा 4]: भैया, वो विजय का आदमी
कोयला मंडी में कब्ज़ा जमाने पहुँच गया है।

23:08.643 --> 23:12.043
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
