WEBVTT

00:06.963 --> 00:08.803
'वर्तमान समय - बनारस 1986'

00:17.203 --> 00:18.723
(लोगों के बड़बड़ाने की आवाज़)
(पुलिस की गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़)

00:49.483 --> 00:51.363
(लोगों के बड़बड़ाने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)

00:51.643 --> 00:53.203
[छुन्नू]: त्रिपुरारी भैया,

00:53.803 --> 00:56.763
ये सा** सब ठेकेदार लोग वसीम के आदमी हैं।

00:57.843 --> 00:59.603
लचांड तो पक्का होगा आज।

01:21.083 --> 01:22.563
[मिश्रा]: काम हो गया है ना?

01:22.683 --> 01:24.193
[मिश्रा]: फ़ाइल पे चढ़ाना ही तो बाक़ी है।
[कर्मचारी 1]: जी।

01:24.203 --> 01:25.923
[मिश्रा]: रखिए हमारे टेबल पे। देखते हैं।
[कर्मचारी 1]: जी।

01:26.043 --> 01:28.763
[गुप्ता]: मिश्रा जी, नमस्ते।
[मिश्रा]: नमस्ते, भैया। नमस्ते। नमस्ते।

01:29.203 --> 01:31.643
[मिश्रा]: आप लोगों में से
कुछ लोग तो यहाँ नये हैं।

01:32.283 --> 01:35.083
लेकिन हम कई साल से इसी विभाग में हैं

01:35.203 --> 01:36.563
और यहाँ के रीति-रिवाज़ से

01:36.683 --> 01:38.403
[मिश्रा]: अच्छी तरह से वाक़िफ़ हैं।
[गुप्ता]: जी, मिश्रा जी।

01:39.043 --> 01:42.363
[मिश्रा]: देखिए,
आबकारी विभाग का ठेका हर बार की तरह

01:42.603 --> 01:44.603
इस बार भी
वसीम भाई को ही जाएगा।

01:44.763 --> 01:48.923
तो, इसमें किसी प्रकार की
लघु या दीर्घ शंका ना तो है

01:49.123 --> 01:51.683
[मिश्रा]: और ना ही होनी चाहिए। हाँ!
[कर्मचारी 3]: वो तो है ही।

01:52.043 --> 01:53.513
[मिश्रा]: वसीम भाई...
[कर्मचारी 4]: बिलकुल सही। सही है।

01:53.523 --> 01:55.633
[मिश्रा]: हमें हमारा मेहनताना देते आए हैं।

01:55.643 --> 01:57.433
[मिश्रा]: और इस बार भी दे रहे हैं।
[गुप्ता]: जी, जी।

01:57.443 --> 01:58.633
[मिश्रा]: ठीक है?
[कर्मचारी 5]: जी, जी, जी।

01:58.643 --> 02:00.313
[मिश्रा]: तो, झोला-वोला लाए हैं ना?

02:00.323 --> 02:02.153
[कर्मचारी 6]: हाँ, लाए हैं।
[गुप्ता]: हाँ, लाए हैं।

02:02.163 --> 02:05.123
[मिश्रा]: तो, बटोरने के लिए तैयार रहिए।
[इरशाद]: ओ, मिश्रा!

02:06.003 --> 02:07.683
[मिश्रा]: ये लो, इरशाद भाई आ गए।
[इरशाद]: ए!

02:08.683 --> 02:10.163
[इरशाद]: पलट दो।

02:14.323 --> 02:16.443
गिरने ना पाए।
गिरने ना पाए, भाई।

02:16.643 --> 02:17.593
गिन लो, मिश्रा।

02:17.603 --> 02:19.643
[इरशाद]: कम-वम हुआ, तो पहुँच जाएगा।
[मिश्रा]: अरे, इरशाद भाई!

02:20.283 --> 02:22.203
[मिश्रा]: आज तक कभी कम हुआ है?
(इरशाद के हँसने की आवाज़)

02:22.483 --> 02:23.873
पाँच-छह गड्डी ज़्यादा ही निकली है।

02:23.883 --> 02:25.403
(मिश्रा के हँसने की आवाज़)

02:25.803 --> 02:28.203
[मिश्रा]: हम बाहर जाके
भीड़ को वापस भेजते हैं। हैं?

02:28.803 --> 02:30.433
ठेका जिसे बँटना था,
बँट गया।

02:30.443 --> 02:31.763
(इरशाद के हँसने की आवाज़)
(मिश्रा के हँसने की आवाज़)

02:32.003 --> 02:33.993
[मिश्रा]: एक काम करो। फ़ाइल उठाओ।
चलो, जल्दी। आओ। [कर्मचारी 1]: हाँ।

02:34.003 --> 02:35.683
[कर्मचारी 1]: लाइए।
[इरशाद]: और, गुप्ता?

02:36.283 --> 02:39.003
[इरशाद]: झोला लाए कि नहीं इसके लिए अलग से।
[गुप्ता]: लाए... लाए, सर, लाए, लाए।

02:40.803 --> 02:42.443
[ठेकेदार 1]: अरे, लो आ गए।
[ठेकेदार 2]: आ गए। आ गए। आ गए।

02:42.723 --> 02:44.043
[मिश्रा]: बैठिए, बैठिए।
[ठेकेदार 3]: बाबू साहब, आ गए।

02:44.763 --> 02:49.313
[मिश्रा]: ज़िले भर से आए हुए ठेकेदार भाइयों,
अब आप लोग घर जा सकते हैं।

02:49.323 --> 02:50.683
(ठेकेदारों के शोर मचाने की आवाज़)

02:50.843 --> 02:52.563
[मिश्रा]: टेंडर बँट चुका है।

02:52.923 --> 02:55.603
ठेका जिसे मिलना था,
मिल चुका है।

02:56.163 --> 02:58.483
अब साल भर के बाद दर्शन होंगे।
धन्यवाद।

02:59.483 --> 03:01.563
(ठेकेदारों के शोर मचाने की आवाज़)

03:05.483 --> 03:06.803
[बेचैन]: बाबू साहब!

03:07.963 --> 03:10.123
बाबू साहब। बाबू साहब।

03:12.123 --> 03:14.883
लेकिन... अभी तो ठेका खुला ही नहीं?

03:16.203 --> 03:18.643
इतने दिनों से
हम विभाग के चक्कर लगा रहें और...

03:19.483 --> 03:21.393
आप बंद कमरे में ही ठेका बाँट दिए?

03:21.403 --> 03:23.323
[बेचैन]: ये कोई बात है, बाबू साहब?
[मिश्रा]: जाओ ना, यार।

03:23.603 --> 03:25.963
[मिश्रा]: अभी बोला ना, साल भर बाद आना।
[बेचैन]: लेकिन...

03:26.323 --> 03:28.883
[मिश्रा]: खोपड़ी मत खाओ। भागो यहाँ से।
[बेचैन]: लेकिन, बाबू साहब।

03:30.283 --> 03:33.003
[मिश्रा]: गाँ** खौरही
और चाहिए मख़मल का गद्दा।

03:42.323 --> 03:43.723
[बेचैन]: हम को भगा दिया, सा**।

03:45.363 --> 03:47.043
[मिश्रा]: ठेका लेंगे ससुर के नाती।

03:47.163 --> 03:49.523
[इरशाद]: ओ, मिश्रा। आ गए?
[मिश्रा]: हाँ, इरशाद भाई।

03:49.803 --> 03:51.713
[इरशाद]: हो गया नोट गिनना इधर?
[मिश्रा]: हाँ?

03:51.723 --> 03:52.643
[मिश्रा]: बढ़िया चल रहा है ना सब?

03:52.763 --> 03:54.723
[इरशाद]: हाँ, सब संभाल लिए, गुप्ता जी।
[विजय]: बाबू साहब!

03:56.243 --> 03:58.043
[मिश्रा]: ए! तुम अंदर कैसे आ गए?

03:58.563 --> 04:01.603
[विजय]: हमने सुना कि आपने टेंडर बाँट दिया?
[मिश्रा]: हाँ, तो?

04:02.123 --> 04:04.163
[विजय]: ना लॉटरी खोले,
ना रेट तय किए।

04:05.043 --> 04:08.043
पता है आपको हम कितने साल से
प्रयास में थे ये ठेका लेने के?

04:09.163 --> 04:11.283
पैसा चाहिए था,
तो हमको कह देते।

04:12.803 --> 04:15.963
यहाँ जितना मिल रहा है ना,
उससे कहीं ज़्यादा आपके मुँह पर मारते।

04:16.323 --> 04:17.763
[इरशाद]: ए, भो** के!

04:19.003 --> 04:20.753
पैसा के साथ-साथ में

04:20.763 --> 04:23.603
गाँ** में गूदा भी होना चाहिए
ठेका लेने के लिए।

04:23.883 --> 04:26.673
पूरे पूर्वांचल में
एक ही आदमी के गाँ** में गूदा है।

04:26.683 --> 04:28.563
उसका नाम है वसीम भाई।

04:28.803 --> 04:30.723
[विजय]: भैया,
तो आप नाराज़ क्यों हो रहे हैं?

04:31.043 --> 04:33.403
अरे, हम तो इनसे इतना ही पूछ रहे हैं
कि ये ठेका हमको क्यों नहीं मिला।

04:33.523 --> 04:35.523
[इरशाद]: अरे, बैल सा**।

04:36.603 --> 04:39.283
तुम जानते भी हो
कि वसीम भाई कौन है रे? हूँ?

04:39.443 --> 04:41.163
[विजय]: लेकिन आप भी नहीं जानते हैं
कि हम कौन हैं।

04:41.363 --> 04:43.603
[इरशाद]: हाँ,
ये बात तो सही है।

04:44.643 --> 04:47.283
बताओ तुम कौन हो, यार।
हम तो नहीं जानते। बताओ।

04:47.643 --> 04:49.603
[इरशाद]: कौन हो तुम?
[विजय]: विजय सिंह।

04:52.523 --> 04:54.163
(इरशाद के कराहने की आवाज़)
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

04:58.483 --> 05:00.283
[इरशाद]: मार सा** को! ब****!

05:01.443 --> 05:03.363
[कर्मचारी 1]: बहुत बड़ी ग़लती हो गई, सर जी।

05:07.243 --> 05:08.843
[इरशाद]: हट, मा****! हट!

05:19.603 --> 05:21.203
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

05:29.643 --> 05:31.083
[इरशाद]: हट! हट!
(चिल्लाते हुए)

05:33.203 --> 05:35.043
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

05:46.843 --> 05:49.003
(मिश्रा के घबराने और आहें भरने की आवाज़)

05:52.883 --> 05:54.163
[विजय]: बाबू साहब,

05:55.523 --> 05:59.203
[विजय]: ठेका जो है ना, अब बँटेगा।
[मिश्रा]: अच्छा। जी... जी।

05:59.403 --> 06:01.443
[विजय]: और आज के बाद से
यहाँ का हर ठेका

06:02.603 --> 06:03.923
विजय सिंह के नाम से जाएगा।

06:04.643 --> 06:05.963
[मिश्रा]: जी... जी।

06:21.043 --> 06:24.443
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)

06:36.243 --> 06:38.243
(आदमी के ज़ोरों से कराहने की आवाज़)
(डंडे से मारने की आवाज़)

06:43.963 --> 06:46.243
(आदमी के ज़ोरों से कराहने की आवाज़)
(डंडे से मारने की आवाज़)

06:51.923 --> 06:53.563
[गुंडा 1]: भो** के!

06:54.163 --> 06:56.443
हमसे ग़द्दारी, भो** के!

06:57.443 --> 06:59.683
(आदमी के ज़ोरों से कराहने की आवाज़)
(डंडे से मारने की आवाज़)

07:05.123 --> 07:08.803
[आदमी 1]: वसीम भाई!
हमसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई, वसीम भाई!

07:09.483 --> 07:11.723
मेरी जान बख़्श दीजिए, वसीम भाई!
(कराहते हुए)

07:12.083 --> 07:13.883
[वसीम]: मा****!

07:14.523 --> 07:16.403
तूने अपनी ज़मीन साहेब सिंह को बेची ना?

07:16.963 --> 07:18.803
[वसीम]: सा**, अब वहीं जाके रो।
[आदमी 1]: भाई! (कराहते हुए)

07:19.803 --> 07:21.033
[वसीम]: मार मा**** को।

07:21.043 --> 07:23.643
[आदमी 1]: भाई! मुझे माफ़ कर दो, भाई!
(कराहते हुए)

07:24.123 --> 07:25.483
भाई!
(कराहते हुए)

07:27.123 --> 07:28.803
(आदमी के ज़ोरों से कराहने की आवाज़)

07:29.043 --> 07:31.283
[गुंडा 1]: ले, भो** के!
[आदमी 1]: आ! भाई! (कराहते हुए)

07:36.803 --> 07:38.043
[इरशाद]: भाई जान, वो...

07:38.643 --> 07:41.723
बनारस, बलिया, मऊ और अलाहबाद के
सारे ठेके विजय सिंह ने ले लिए।

07:43.323 --> 07:44.683
इस बार चूक गए हम।

07:45.243 --> 07:46.643
लेकिन आप चिंता ना कीजिए।

07:47.443 --> 07:49.083
सा** को काम नहीं करने देंगे हम।

07:52.683 --> 07:53.723
[वसीम]: क्या कहा?

07:54.843 --> 07:56.083
चिंता ना करें?

07:57.163 --> 07:58.243
हाँ?

07:59.083 --> 08:01.323
(पुलिस की गाड़ी के साइरन की आवाज़)
(गाड़ी के चलने की आवाज़)

08:29.163 --> 08:30.163
[वसीम]: भाई साहब।

08:36.083 --> 08:38.003
[पुजारी]: जो कुछ भी हुआ है,
ठीक नहीं हुआ है।

08:39.883 --> 08:42.243
विजय सिंह को शराब के
ठेके मिलने का मतलब साफ़ है

08:43.243 --> 08:44.723
कि हम कमज़ोर हैं!

08:45.883 --> 08:48.243
और कमज़ोर के पास धन कभी नहीं आता।

08:50.003 --> 08:52.363
अरे, मैं सत्ता में हूँ।
मेरी पार्टी सत्ता में है।

08:52.843 --> 08:54.923
जिसका फ़ायदा सिर्फ़ तुम्हें मिल रहा है।

08:57.203 --> 09:00.113
अगर फ़ायदे से ज़्यादा नुकसान हुआ,

09:00.123 --> 09:02.163
तो मुझे कुछ सोचना होगा।

09:04.723 --> 09:06.283
[वसीम]: भाई साहब, ऐसा है

09:07.203 --> 09:10.003
कि अगर आपको फ़ायदे से ज़्यादा
नुकसान हो रहा होता,

09:11.003 --> 09:13.683
तो आज आप यहाँ बैठे नहीं होते।
समझे, भाई साहब?

09:14.643 --> 09:15.843
[वसीम]: ए!
[गुंडा 2]: क्या... क्या?

09:16.563 --> 09:18.043
[वसीम]: गला काट मा**** का!
(चिल्लाते हुए)

09:19.083 --> 09:20.753
[गुंडा 1]: चिल्ला! चिल्ला! चिल्ला और चिल्ला!

09:20.763 --> 09:22.283
(चाकू से वार करने की आवाज़)
(आदमी के ज़ोरों से कराहने की आवाज़)

09:24.803 --> 09:26.043
[वसीम]: चेहरा देखे?

09:27.883 --> 09:29.843
[इरशाद]: देखा ना सा** का शकल।

09:31.523 --> 09:32.843
[वसीम]: ख़त्म करो सा** के।

09:35.363 --> 09:36.643
[छुन्नू]: क्या हुआ, भैया?

09:37.323 --> 09:39.393
[राम]: अब आपको छोड़कर
ये राम का शरीर ही जाएगा। (टीवी पर चलते हुए)

09:39.403 --> 09:40.603
[छुन्नू]: सब ठीक है?

09:40.923 --> 09:43.403
[विजय]: हाँ, छुन्नू।
तुम सो जाओ। तुम सो जाओ।

09:43.563 --> 09:47.353
[राम]: और इस इक्ष्वाकु वंश की मर्यादा का मान
रखने के लिए समर्पित रहें।

09:47.363 --> 09:48.883
[चाचा]: राम!(रोते हुए)

09:50.923 --> 09:56.163
मृत्यु से पहले मुझे मेरे बेटे राम से
कोई मिला दे! (आग की लपटों की आवाज़)

09:56.923 --> 10:00.163
राम! राम!(रोते हुए)

10:00.483 --> 10:01.763
राम!(रोते हुए)

10:03.003 --> 10:04.523
'दो साल पहले - बनारस 1984'

10:04.643 --> 10:07.283
[वीरेंद्र]: बेटा, हमारे पूरे ख़ानदान में ना,

10:07.643 --> 10:09.243
आज तक कोई सरकारी अफ़सर नहीं बना।

10:11.083 --> 10:13.043
मैं चाहता हूँ कि तुम कलेक्टर बनो।

10:15.643 --> 10:18.363
[विजय]: बाबू जी,
आपका ये सपना हम ज़रूर पूरा करेंगे।

10:19.003 --> 10:20.923
[वीरेंद्र]: और हमें तुमसे यही उम्मीद भी है।

10:25.043 --> 10:27.003
अरे, बेटा। हम चले जाते।
तुम्हें लेट हो रहा होगा।

10:27.203 --> 10:29.363
[विजय]: लेट नहीं हो रहा है, बाबू जी।
अरे, आपको छोड़ के चले जाएँगे।

10:29.563 --> 10:30.793
[वीरेंद्र]: ठीक है।
[विजय]: जी, बाबू जी।

10:30.803 --> 10:32.323
[वीरेंद्र]: संभल के जाना, बेटा।
[विजय]: जी, बाबू जी।

10:32.523 --> 10:34.363
[वीरेंद्र]: ये ठेकेदार
और मज़दूर क्यों खड़े हैं यहाँ पे?

10:34.483 --> 10:36.243
[विजय]: पता नहीं। पूछते हैं, बाबू जी।
[वीरेंद्र]: गाड़ी रोको।

10:39.043 --> 10:40.363
[वीरेंद्र]: क्या हो गया?
[गाँव वाला 1]: प्रणाम, वीरेंद्र सिंह जी।

10:40.643 --> 10:42.043
[गाँव वाला 1]: हम सब बहुत ही परेशान हैं।

10:42.363 --> 10:45.403
इस खदान में हर हफ्ते
एक ना एक मज़दूर मर जाता है।

10:46.003 --> 10:48.603
कुछ कीजिए।
पहाड़ तोड़ते हुए मर जाएँ हम

10:48.963 --> 10:50.323
या ज़ख़्मी हो जाएँ,

10:50.883 --> 10:53.563
पर गुल्ली सिंह हम लोगों की
एक रुपए की मदद नहीं करता।

10:54.803 --> 10:57.443
[विजय]: बाबू जी,
ये गुल्ली सिंह है कौन?

10:57.803 --> 10:59.603
[वीरेंद्र]: गुल्ली सिंह वसीम ख़ान का आदमी है।

11:00.283 --> 11:02.963
वसीम ख़ान के गुंडाई के दम पर
वो यहाँ लोगों को दबा रहा है।

11:03.203 --> 11:04.923
मज़दूरों पे अत्याचार कर रहा है।

11:05.883 --> 11:07.083
[वीरेंद्र]: चलिए मेरे साथ!
[गाँव वाला 1]: चलिए।

11:07.323 --> 11:09.193
[विजय]: पिताजी! पिताजी,
आप क्यों जा रहे हैं लेकिन?

11:09.203 --> 11:10.673
[वीरेंद्र]: अरे, बेटा। बात करने जा रहे हैं।
[विजय]: हम समझ नहीं पा रहे हैं।

11:10.683 --> 11:11.873
[विजय]: पिताजी,
आप ही तो बोले कि ये लोग

11:11.883 --> 11:13.203
[विजय]: अच्छे लोग नहीं हैं।
[वीरेंद्र]: अरे! गुंडा लोग हैं वो!

11:13.323 --> 11:16.243
[विजय]: हाँ, इसीलिए तो, पिताजी। पिताजी...
आप मत जाइए, पिताजी। पिताजी, आप...

11:16.603 --> 11:18.163
(डंपर के चलने की आवाज़)

11:25.203 --> 11:27.683
(लोगों के शोर मचाने की आवाज़)

11:29.243 --> 11:30.563
[पांचो]: गुल्ली भैया।
[गुल्ली]: हाँ?

11:30.843 --> 11:34.963
[पांचो]: बिहारी यादव का मुंशी वीरेंद्र
यहाँ मज़दूरों के साथ क्यों आ रहा है?

11:35.963 --> 11:37.563
[गुल्ली]: आने दे ना।

11:54.843 --> 11:57.203
[गुल्ली]: क्या बात है, वीरेंद्र सिंह?
[वीरेंद्र]: गुल्ली सिंह।

11:58.363 --> 12:02.203
[वीरेंद्र]: इन मज़दूरों से तुम जो ये दिन-रात
जानवरों की तरह काम करवाते हो,

12:02.643 --> 12:04.723
उन्हें इंसान समझकर उनके दर्द को समझो।

12:04.843 --> 12:07.163
[गुल्ली]: समस्या क्या है, ये बोलो।
ज्ञान मत पेलो।

12:07.323 --> 12:10.283
[वीरेंद्र]: तुम्हारी ये जो खदान है ना,
ये अवैध है।

12:12.043 --> 12:13.443
इसे तत्काल बंद करो।

12:13.603 --> 12:14.833
[गुल्ली]: बंद कर दें?
[वीरेंद्र]: हाँ!

12:14.843 --> 12:17.603
[वीरेंद्र]: और जितने भी मज़दूर
तुम्हारे खदान में काम कर रहे हैं ना,

12:18.083 --> 12:19.433
और जो मारे गए हैं,

12:19.443 --> 12:21.563
उनके घर वालों को हर्जाना दो!

12:21.843 --> 12:25.123
[गुल्ली]: अरे! वीरेंद्र सिंह। हाँ!

12:26.683 --> 12:28.193
है ये खदान अवैध।

12:28.203 --> 12:30.313
और इंसान एक ना एक दिन तो मरता है।

12:30.323 --> 12:33.483
अस्पताल में मरे, सड़क पे मरे
या हमारी इस खदान में,

12:34.643 --> 12:37.603
अमरता का वरदान लेकर तो
कोई नहीं आया है ना? हाँ?

12:38.363 --> 12:40.683
प्रभु की इच्छा थी, यहाँ मर गए।

12:41.603 --> 12:44.113
इसमें हर्जाने की बात
बीच में क्यों घुसेड़ रहे हो?

12:44.123 --> 12:45.633
[पांचो]: ए, भैया समाज सेवक,

12:45.643 --> 12:48.163
हम तुम को पहले भी समझाए थे
और अभी भी समझा रहे हैं।

12:48.323 --> 12:50.273
नेतागिरी ज़्यादा करो नहीं,
नेतागिरी गाँ** में घुसेड़ देंगे!

12:50.283 --> 12:52.803
[विजय]: ए! तमीज़ से बात कर मेरे बाबू जी से!
[वीरेंद्र]: तमीज़ से बात करो तुम!

12:53.043 --> 12:54.523
[विजय]: मा****, छोड़!
[वीरेंद्र]: हमारे बेटे को छोड़ो!

12:54.643 --> 12:57.643
[गुल्ली]: ये कौन है, भाई?
[पांचो]: ये हमारे मुंशी जी के लाड़ले हैं।

12:58.723 --> 13:00.163
[वीरेंद्र]: गुल्ली सिंह, हमसे बात करो।
[गाँव वाला 2]: ए!

13:00.643 --> 13:02.353
[विजय]: बाबू जी!
बाबू जी, कुछ नहीं हुआ है हमको!

13:02.363 --> 13:03.963
[गुल्ली]: तोड़ो मा**** को!

13:05.643 --> 13:09.483
सा**! तू इन लोगों का मसीहा बनकर आया है,
इन हरा**** का!

13:09.683 --> 13:12.243
तेरी बहुत इज़्ज़त है इनके सामने? हाँ?

13:12.643 --> 13:14.323
चल, एक काम करते हैं!

13:15.043 --> 13:17.643
[विजय]: बाबू जी! [गुल्लू]: अब मैं
तेरे बेटे को तभी यहाँ से जाने दूँगा,

13:17.803 --> 13:20.993
[गुल्लू]: जब तू इन सबके सामने मेरे पैर धोए।
[विजय]: ए!

13:21.003 --> 13:23.123
[विजय]: गुल्ली सिंह, छोड़ दे उनको!
[गुल्ली]: समझे?

13:23.363 --> 13:24.563
[विजय]: बाबू जी!

13:24.683 --> 13:27.723
[गुल्ली]: नहीं तो तेरा लड़का गया जान से!
[वीरेंद्र]: मेरे बेटे को मत मारो!

13:28.643 --> 13:31.403
[विजय]: गुल्ली सिंह! [वीरेंद्र]:
तुम जो कहोगे, वो मैं करूँगा, गुल्ली सिंह!

13:32.083 --> 13:33.793
[वीरेंद्र]: बस, मेरे बेटे को मत मारो!

13:33.803 --> 13:35.473
[विजय]: छोड़ दो उनको!

13:35.483 --> 13:36.843
बाबू जी!
(पुलिस की गाड़ी के रुकने की आवाज़)

13:38.243 --> 13:40.283
(लोगों के बड़बड़ाने की आवाज़)

13:40.843 --> 13:42.483
[इंस्पेक्टर]: ए! इधर आ!

13:43.723 --> 13:45.083
[गाँव वाला 3]: जी, साहब। प्रणाम।

13:45.523 --> 13:46.713
[इंस्पेक्टर]: कैसी भीड़ लगी है?
क्या हो रहा है इधर?

13:46.723 --> 13:48.443
[गाँव वाला 3]: ये साहब, वसीम के आदमी...

13:48.563 --> 13:51.443
[गाँव वाला 3]: गुल्ली सिंह और पांचो वीरेंद्र
जी को... [इंस्पेक्टर]: बम-गोला कुछ चला?

13:51.603 --> 13:53.603
[गाँव वाला 3]: नहीं, साहब।
ऐसा तो कुछ सुनने को नहीं मिला।

13:53.803 --> 13:55.203
[इंस्पेक्टर]: ठीक है। ठीक है। जाओ तुम।

13:56.323 --> 13:58.323
अपराध होने से पहले ही पुलिस पहुँच गई।

13:58.923 --> 14:00.683
[विजय]: अरे, कोई कुछ तो करो!
(रोते हुए)

14:01.443 --> 14:02.763
बाबू जी!
(रोते हुए)

14:05.243 --> 14:06.563
बाबू जी!
(रोते हुए)

14:10.083 --> 14:12.163
बाबू जी, रुक जाइए!
(रोते हुए)

14:12.603 --> 14:15.203
(गुल्ली के ज़ोरों से हँसने की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत)

14:26.323 --> 14:28.203
[गुल्ली]: वीरेंद्र सिंह...
(हँसते हुए)

14:29.203 --> 14:30.883
अरे! उठो, उठो, वीरेंद्र सिंह।

14:32.563 --> 14:34.843
तुम भी परेशान हुए,
हमें भी परेशान करा।

14:35.523 --> 14:37.323
इन हरा**** की बातों में आ गए तुम।

14:37.763 --> 14:38.873
मत परेशान हो।

14:38.883 --> 14:41.283
छोड़ देंगे तुम्हारे लड़के को।
ए, ए, छोड़ो।

14:41.763 --> 14:43.043
छोड़ो! हाँ?

14:43.883 --> 14:45.833
हाथ जोड़ने की ज़रूरत नहीं है।
भाई हो हमारे।

14:45.843 --> 14:47.403
[विजय]: बाबू जी।
[गुल्ली]: है ना? आओ, गले मिलो।

14:47.603 --> 14:49.643
[विजय]: बाबू जी! बाबू जी!
[गुल्ली]: आ जाओ। आ जाओ।

14:49.803 --> 14:52.043
[गुल्ली]: बिलकुल नहीं रोना।
बिलकुल नहीं रोना, हाँ?

14:52.323 --> 14:53.523
(खंजर घोंपने की आवाज़)
(वीरेंद्र के कराहने की आवाज़)

14:55.243 --> 15:00.603
(दुखद पार्श्व संगीत)
(वीरेंद्र के कराहने की आवाज़)

15:00.923 --> 15:03.083
[विजय]: बाबू जी!
(चीखते हुए)

15:04.563 --> 15:07.083
[विजय]: ए, छोड़ो हमको!
(रोते हुए)

15:07.763 --> 15:10.163
ए, छोड़ो हमको!
(रोते हुए)

15:10.723 --> 15:12.403
बाबू जी!
(रोते हुए)

15:12.723 --> 15:14.633
(विजय के बिलख-बिलखकर रोने की आवाज़)

15:14.643 --> 15:16.283
[विजय]: बाबू जी!
(रोते हुए)

15:19.923 --> 15:21.683
बाबू जी!
(रोते हुए)

15:22.123 --> 15:23.763
बाबू जी!
(रोते हुए)

15:33.363 --> 15:35.323
[बेचैन]: भैया!
(रोते हुए)

15:36.843 --> 15:38.603
भैया!
(रोते हुए)

15:40.443 --> 15:41.563
भैया!
(रोते हुए)

15:42.363 --> 15:43.523
[चाचा]: राम!
(रोते हुए)

15:43.643 --> 15:44.803
'वर्तमान समय - बनारस 1986'

15:54.363 --> 15:56.283
(पुलिस की गाड़ी के चलने और रुकने की आवाज़)

15:57.923 --> 16:00.283
[व्यापारी]: पुजारी सिंह के कहने पर
रोज़ पुलिस वाले चले आते हैं।

16:00.523 --> 16:03.523
और उनको खिलाने-पिलाने में
सारी कमाई चली जा रही है।

16:05.563 --> 16:09.003
[साहेब]: तो, तू ये कहना चाहता है
कि तू पैसे नहीं दे पाएगा।

16:09.243 --> 16:12.203
[व्यापारी]: नहीं... दे पाऊँगा,
लेकिन कुछ... कम।

16:14.083 --> 16:15.523
[साहेब]: भो** के!

16:16.523 --> 16:21.363
तू ये सब जो कर पा रहा है ना,
क्योंकि साहेब सिंह का हाथ तेरे ऊपर है।

16:22.763 --> 16:26.563
वरना सारी ज़िंदगी उठाईगिरी में बीत जाती।

16:28.043 --> 16:31.563
अब ज़्यादा ज्ञान मत चो**! समझा?

16:32.803 --> 16:35.483
चल! चल! मा****!

16:42.083 --> 16:44.243
(साहेब के हँसने की आवाज़)

16:46.923 --> 16:49.683
[साहेब]: आत्मा को आज तृप्ति मिली है।

16:51.243 --> 16:56.363
शराब के ठेके पर पुजारी
और वसीम के वर्चस्व को ललकारा है तुमने।

16:59.643 --> 17:02.683
सचमुच आज तुमने हमारी छाती चौड़ी कर दी।

17:03.283 --> 17:05.363
[विजय]: मर्दों का सीना होता है,
साहेब सिंह जी,

17:06.203 --> 17:07.843
छाती औरतों की होती है।

17:09.923 --> 17:11.403
अंग्रेज़ी में एक कहावत है,

17:11.763 --> 17:13.763
ज़्यादा जोखिम, तो ज़्यादा तकलीफ़।

17:14.283 --> 17:16.363
और ज़्यादा तकलीफ़ यानी की ज़्यादा बड़ा मुनाफ़ा।

17:19.163 --> 17:20.443
समझाते हैं आपको अभी।

17:22.643 --> 17:25.403
शराब के ठेके में
अब हिसाब एक चौथाई का नहीं,

17:26.603 --> 17:27.723
आधे-आधे का होगा।

17:29.963 --> 17:31.603
क्योंकि इसमें जोखिम ज़्यादा है।

17:32.843 --> 17:35.963
और ज़्यादा जोखिम मतलब,
ज़्यादा हिस्सा।

17:41.923 --> 17:43.203
सोच लीजिए आप।

17:44.483 --> 17:45.763
अभी चलते हैं।

17:50.763 --> 17:52.163
[बेचैन]: विजय।
[विजय]: जी।

17:53.363 --> 17:57.843
[बेचैन]: तुम्हें क्या लगता है,
साहेब सिंह आधे-आधे में मान जाएगा?

18:00.403 --> 18:02.883
[विजय]: चाचा,
उसके पास अभी कोई रास्ता बचा नहीं है।

18:04.603 --> 18:07.123
वसीम से बचने के लिए
उसे हमारा साथ चाहिए।

18:08.363 --> 18:10.083
और वसीम पर पुजारी सिंह का हाथ है।

18:11.283 --> 18:12.963
पुजारी सिंह की पार्टी सत्ता में है,

18:14.003 --> 18:16.003
और साहेब सिंह की पार्टी
सत्ता में आना चाहती है।

18:17.443 --> 18:20.283
तो, हमको इससे अच्छा
और कोई मौक़ा लगा नहीं अपनी शर्त रखने का।

18:21.443 --> 18:24.643
[त्रिपुरारी]: ससुरा, साहेब को
आज से पहले हम जितना जानते थे,

18:25.803 --> 18:28.873
उसके जैसा हरा** आदमी अपने धंधे में

18:28.883 --> 18:31.203
आधा हिस्सा कभी किसी को देता नहीं है।

18:32.203 --> 18:35.633
[विजय]: लेकिन अब देगा। [त्रिपुरारी]:
देगा नहीं, तो ब****, गाँ** मरवाएगा।

18:35.643 --> 18:37.603
(विजय और त्रिपुरारी के हँसने की आवाज़)

18:37.883 --> 18:38.963
[छुन्नू]: भैया...

18:39.443 --> 18:41.843
वो... कल बड़की का गवना है।

18:43.763 --> 18:45.163
घर चलेंगे ना?

18:46.923 --> 18:48.043
[बेचैन]: बेटा...

18:49.163 --> 18:51.443
घर चलोगे,
तो भाभी को अच्छा लगेगा।

19:00.563 --> 19:03.283
'एक साल पहले - बनारस 1985'
[सुधा]: एक अपराधी मेरा बेटा नहीं हो सकता।

19:03.603 --> 19:06.123
[सुधा]: और वीरेंद्र सिंह का तो
क़तई नहीं हो सकता।

19:07.243 --> 19:10.163
[विजय]: इस दुनिया में उस आदमी के
जान की कोई क़ीमत नहीं होती है,

19:10.923 --> 19:12.643
जिसकी रीढ़ की हड्डी झुकी हुई हो।

19:12.923 --> 19:15.683
[सुधा]: तो, तू हत्यारा बन जाएगा?
ग़लत-सलत काम करेगा?

19:16.043 --> 19:19.483
देख, विजय।
तूने बदला लेना था, तूने ले लिया।

19:20.483 --> 19:22.843
बस, अब ख़त्म कर दे ये सब।

19:23.003 --> 19:24.443
और वापस आजा।

19:26.403 --> 19:27.803
[विजय]: नहीं, माई।

19:29.043 --> 19:30.563
अभी सब ख़त्म नहीं हुआ है।

19:32.763 --> 19:35.123
अभी सब ख़त्म नहीं हुआ है, माई!

19:36.443 --> 19:37.843
[सुधा]: तो निकल यहाँ से।

19:38.283 --> 19:39.473
[बेचैन की पत्नी]: भाभी, रहने दीजिए ना।
[सुधा]: निकल घर के बाहर!

19:39.483 --> 19:41.073
[बेचैन]: भाभी...
[सुधा]: बस!

19:41.083 --> 19:42.083
[बड़की]: माँ।
(रोते हुए)

19:46.003 --> 19:48.363
(बड़की के रोने की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत)

20:00.563 --> 20:02.643
[बेचैन]: विजय!
[बेचैन की पत्नी]: विजय... भाभी... (रोते हुए)

20:21.643 --> 20:27.483
(विजय के रोने की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत)

20:30.043 --> 20:31.723
'वर्तमान समय - बनारस 1986'
(ढोलक बजाने की आवाज़)

20:31.923 --> 20:35.963
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪

20:36.083 --> 20:40.483
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪
(औरतों और लड़कियों के हँसने की आवाज़)

20:41.163 --> 20:43.353
[छुन्नू]: अरे, सुनो! तीन ठोक और लेके आओ।
जल्दी लेके आओ, यार!

20:43.363 --> 20:45.043
जल्दी जाओ वहाँ पे फ़टाफ़ट से।

20:45.243 --> 20:47.593
अच्छा, अम्मा।
वो तीन ठोक बोरे रखवा दिए हैं बर्तन के।

20:47.603 --> 20:50.083
[छुन्नू]: और एक और आ रहा है अभी। [सुधा]:
ठीक है, तो उसको देखते रहना। बताते रहना।

20:50.203 --> 20:51.433
[छुन्नू]: और, भैया!
[भैया]: ठीक हैं, भैया।

20:51.443 --> 20:54.153
[छुन्नू]: अरे, जीजा जी, प्रणाम। कैसे हैं?
[जीजा]: अरे, अरे! सब ठीक है, ठीक है, ठीक है।

20:54.163 --> 20:57.803
[छुन्नू]: अच्छा, हम ये कह रहे थे
कि वो बिदाई-विदाई तो हो नहीं पाएगी आज।

20:58.363 --> 20:59.323
[जीजा]: अरे, ऐसे कैसे?

20:59.443 --> 21:02.123
अरे, वो पंडित जी बोल रहे हैं
कि मुहूर्त-वुहूर्त सब निकल गया है।

21:02.563 --> 21:04.233
[जीजा]: अरे, हम भी पत्रा देखकर आए हैं।

21:04.243 --> 21:06.553
ऐसा तो कोई दोष नहीं है।
आज तो पूरा दिन शुभ है।

21:06.563 --> 21:09.203
[छुन्नू]: दोष तो नहीं है,
लेकिन पंडित जी कह रहे हैं कि कुछ...

21:09.323 --> 21:11.393
ब्रह्मांड में कुछ तो ऐसा गड़बड़ हो रहा है

21:11.403 --> 21:14.603
कि मतलब, जो सूरज है, और जो चंद्रमा है,
उसका आगे-पीछे का जो बीच का

21:14.723 --> 21:17.763
जो मामला है ना, वो थोड़ा सा कुछ गड़बड़ा गया है।

21:17.923 --> 21:19.833
[जीजा]: देखिए, छुन्नू जी,
ऐसा मज़ाक ठीक नहीं है।

21:19.843 --> 21:22.403
[भाभी]: अरे, भाभीजी, का कह रहा है ये? [जीजा]:
एक तो आप लोग 3 साल बाद गवना कर रहे हैं।

21:22.603 --> 21:24.513
[जीजा]: आज तो देखिए लेकर ही जाना है,
कुछ भी हो जाए।

21:24.523 --> 21:27.083
[छुन्नू]: अरे! जीजा जी, मैं मज़ाक...
[सुधा]: अरे, दामाद जी, ये मज़ाक कर रहा है।

21:27.203 --> 21:29.203
[जीजा]: अरे, देखिए ना आप।
[सुधा]: ये पुरानी आदत है इसकी।

21:29.323 --> 21:30.073
[सुधा]: छुन्नू।
[छुन्नू]: जी।

21:30.083 --> 21:31.083
[सुधा]: कोई मिला नहीं तुझे?

21:31.203 --> 21:32.523
[सुधा]: जा तू अपना काम कर।
[छुन्नू]: पंडित जी बोल रहे थे।

21:32.723 --> 21:34.843
[सुधा]: बारातियों को देख।
जा, चल! चल निकल!

21:35.083 --> 21:36.633
[सुधा]: आप बैठिए।
[छुन्नू]: बता रहे हैं, कुछ गड़बड़ है।

21:36.643 --> 21:37.963
[छुन्नू]: संभल के रहो।

21:40.003 --> 21:42.203
[बिलाल]: चल, चल, चल, चल। मा****!
[इरशाद]: - बिलाल!

21:42.323 --> 21:44.723
[इरशाद]: तू इधर से जा।
[बिलाल]: चल, उसकी मैया चो** आज तो।

21:45.203 --> 21:46.443
[बिलाल]: चल!

21:49.923 --> 21:51.643
[बेचैन]: सुनो।
[रसोइया]: जी, भैया जी?

21:53.003 --> 21:55.083
[बेचैन]: पनीर पे ही नज़र मत टिकाए रखना।

21:55.883 --> 21:57.793
इधर-उधर भी नज़र दौड़ाते रहना।

21:57.803 --> 21:59.483
[रसोइया]: भैया जी, आप निश्चिंत रहिए।

22:01.683 --> 22:04.123
[भाई]: सब ठीक है, भैया।
दिक्क़त की कोई बात है नहीं ऐसे।

22:05.243 --> 22:06.403
[छुन्नू]: पिताजी,

22:08.203 --> 22:09.723
भैया तो आएँगे ना?

22:12.243 --> 22:13.683
[बेचैन]: बहन का गौना है,

22:15.443 --> 22:16.603
ज़रूर आएगा।

22:17.723 --> 22:19.123
लेकिन...

22:21.083 --> 22:22.243
वो...

22:24.043 --> 22:26.923
वसीम का आदमी
उस दिन उसका चेहरा देख लिया था।

22:28.243 --> 22:30.603
उस दिन आबकारी विभाग में उसे

22:31.603 --> 22:34.043
सबके सामने खुल के नहीं आना चाहिए था।

22:34.803 --> 22:36.323
ख़तरा बढ़ चुका है।

22:38.363 --> 22:42.713
♪जिनके गोरे-गोरे गाल, सुहानी चूड़ियाँ।♪
[भाभी]: अरे, आइए, आइए। इधर!

22:42.723 --> 22:47.083
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪

22:47.683 --> 22:50.563
[इरशाद]: ज़रा ध्यान रखना, हिफ़ाज़त।
मिलेगा सा** ज़रूर आज वो।

22:51.403 --> 22:52.873
[हिफ़ाज़त]: और नहीं मिलेगा,
तो क्या करेंगे, भैया?

22:52.883 --> 22:55.433
[इरशाद]: नहीं मिलेगा, तो सा**
उसकी बहन को विधवा बनाएँगे, ब****!

22:55.443 --> 22:56.793
ध्यान से आना।

22:56.803 --> 22:58.633
♪ससुराल गलियाँ।♪

22:58.643 --> 23:02.883
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪

23:03.163 --> 23:07.043
♪जिनका सुतवा संभाले हज़ार सखियाँ।♪

23:08.763 --> 23:10.043
[सुधा]: बहुत सुंदर लग रही हो।

23:11.723 --> 23:14.803
इसके काले-काले बाल♪

23:16.163 --> 23:18.163
[सुधा]: हम तो सोच भी नहीं पा रहे कि हम...

23:19.803 --> 23:22.923
कि हमारी ज़िंदगी
तुम्हरे बग़ैर कितनी सूनी हो जाएगी।

23:26.923 --> 23:28.123
[बड़की]: अम्मा।
(रोते हुए)

23:30.363 --> 23:33.683
विजय भैया की बहुत याद आ रही है, अम्मा।
(रोते हुए)

23:41.523 --> 23:43.323
[सुधा]: वो... हम... ज़रा...
(रोते हुए)

23:44.923 --> 23:47.363
बाहर देख के आते हैं, हाँ?
काफ़ी मेहमान हैं ना। (रोते हुए)

23:51.803 --> 23:55.963
♪जिनके गोरे-गोरे गाल, सुहानी चूड़ियाँ।♪
(औरतों-लड़कियों के हँसने की आवाज़)

23:56.123 --> 24:00.443
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪

24:00.603 --> 24:04.963
♪बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियाँ।♪
(क़दमों की आवाज़)

24:05.163 --> 24:09.803
♪जिनका सुतवा संभाले हज़ार सखियाँ।♪
(भावुक पार्श्व संगीत)

24:14.003 --> 24:18.443
♪जिनके लंबे-लंबे...
हाँ, जिनके लंबे-लंबे बाल...♪

24:18.603 --> 24:20.363
[गुंडा 3]: भाई, ऐसा... कैसे पता चलेगा, भाई?

24:20.963 --> 24:23.603
[बिलाल]: इरशाद भाई देखे हैं ना।
वो गोली मारेंगे, तो हम भी मारेंगे, मा****!

24:23.883 --> 24:25.483
[गुंडा 3]: अगर विजय मिल गया, तो भैया?

24:26.163 --> 24:28.083
[बिलाल]: भो** के,
गाँ** फट रहा है क्या तुम्हारा?

24:28.483 --> 24:30.483
मैया चो** आए हैं उसकी!
मारेंगे ना, बे!

24:30.843 --> 24:32.363
मा****!

24:34.803 --> 24:36.083
[इरशाद]: आजा।

24:38.283 --> 24:42.323
[दादी]: ले चलो ससुराल, सखियाँ।
[बड़की]: अम्मा, विजय भैया कहाँ हैं? (रोते हुए)

24:42.603 --> 24:44.283
[दादी]: बेटा, आएँगे ना।
[सुधा]: बेटा... अरे!

24:45.003 --> 24:46.883
[इरशाद]: सा** दिख रहा है क्या?
[हिफ़ाज़त]: नहीं, भैया।

24:47.323 --> 24:49.083
[इरशाद]: मा****!
[हिफ़ाज़त]: दिख नहीं रहा है, बे।

24:49.203 --> 24:51.883
[हिफ़ाज़त]: अरे, आप ही तो देखे हैं उसको।
हम तो देखे नहीं थे।

24:52.403 --> 24:54.323
[इरशाद]: दिख ही नहीं रहा, मा****!

24:54.563 --> 24:56.233
[हिफ़ाज़त]: देखिए ना, दिखेगा।
[इरशाद]: वो ब**** नहीं दिखेगा।

24:56.243 --> 24:57.753
[इरशाद]: इसी को मारो, मा****।
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

24:57.763 --> 24:59.923
(जीजा के कराहने की आवाज़)
(भाभी के रोने की आवाज़)

25:00.403 --> 25:03.003
[इरशाद]: चल! आजा, आजा! चल! मार!

25:03.243 --> 25:05.233
(औरतों के चीखने की आवाज़)
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

25:05.243 --> 25:07.443
[त्रिपुरारी]: अंदर जाने बोल! ए!
[छुन्नू]: अम्मा!

25:08.123 --> 25:10.043
[छुन्नू]: मा****!
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

25:11.323 --> 25:13.763
[त्रिपुरारी]: मा****! मारो मा**** को!
[बेचैन]: नीचे बैठ!

25:17.563 --> 25:19.363
[बेचैन]: तेरी माँ की चू**!
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

25:19.563 --> 25:21.033
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

25:21.043 --> 25:22.763
[बिलाल]: अरे, चल, चल, चल, चल!
(चिल्लाते हुए)

25:22.923 --> 25:27.003
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)

25:27.323 --> 25:29.203
(औरतों के चीखने की आवाज़)

25:33.083 --> 25:34.643
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़)

25:43.963 --> 25:45.713
(विजय के चीखने की आवाज़)

25:45.723 --> 25:47.003
(कुल्हाड़ी से वार करने की आवाज़)

25:49.483 --> 25:51.593
[विजय]: अम्मा!
(चीखते हुए)

25:51.603 --> 25:53.473
(दुखद पार्श्व संगीत)

25:53.483 --> 25:55.043
'सच्ची घटनाओं से प्रेरित'

25:58.643 --> 26:00.963
[बड़की]: अम्मा!
(रोते हुए)

26:02.123 --> 26:04.163
[बेचैन]: जम के बदला लेंगे।

26:04.403 --> 26:06.843
[इरशाद]: हिफ़ाज़त अली की गन फैक्ट्री में
छापा पड़ने वाला है, भाई।

26:07.883 --> 26:10.963
[दरोगा]: ए, तलाशी लो!
[हिफ़ाज़त]: ए, दरोगा! कहाँ घुसे चले आ रहे हो?

26:11.123 --> 26:14.083
[दरोगा]: अवैध हथियार रखते हो, बे?
[हिफ़ाज़त]: वसीम ख़ान के आदमी हैं।

26:14.363 --> 26:15.363
(थप्पड़ मारने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
